वंदे मातरम् पर सियासत गरम, सीएम योगी का बड़ा पलटवार !

यूपी के स्कूलों में अब वंदे मातरम् के गायन पर सियासत शुरू हो गई है. एक ओर जहां सीएम योगी ने स्कूलों में इसे अनिवार्य करने का फैसला लिया है तो वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पर तंज कसा है.

उत्तर प्रदेश में वंदे मातरम् को लेकर सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। राज्य सरकार द्वारा स्कूलों में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन अनिवार्य किए जाने के फैसले के विरोध के बाद अब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख दिखाया है। उनका यह बयान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद सामने आया, जिसने इस निर्णय पर तंज कसते हुए कहा था कि सरकार को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रभक्ति किसी नारे, गीत या आदेश से नहीं मापी जाती।

वंदे मातरम् पर सियासत गरम, सीएम योगी का बड़ा पलटवार !
वंदे मातरम् पर सियासत गरम, सीएम योगी का बड़ा पलटवार !

सीएम योगी आदित्यनाथ बाराबंकी जिले में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, जहां उन्होंने इस विवाद पर सीधा और तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “जो लोग ‘वंदे मातरम्’ का विरोध कर रहे हैं, वे वास्तव में भारत माता का विरोध कर रहे हैं। इन चेहरों को पहचानने की जरूरत है। जब सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की बात आती है, तब ये सबसे आगे खड़े होते हैं, लेकिन जब राष्ट्र के सम्मान में दो शब्द बोलने की बात आती है, तो पीछे हट जाते हैं।”

सीएम ने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की मिट्टी, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन की पहचान है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों भारतवासियों ने ‘वंदे मातरम्’ को एक प्रेरणा के रूप में अपनाया था। “यह गीत हमारे पूर्वजों की बलिदान की गवाही देता है। क्या इस गीत से परहेज करना उन बलिदानों का अपमान नहीं है?” उन्होंने पूछा।

योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि भारत में रहकर, भारत के संसाधनों का उपयोग करते हुए और भारत की जनता के टैक्स पर चलने वाले लोगों को इस भूमि के सम्मान में वंदे मातरम् कहने में समस्या क्यों होनी चाहिए। उन्होंने तंज करते हुए कहा, “आज भी कुछ लोग हैं जो रहेंगे हिंदुस्तान में, खाएंगे हिंदुस्तान में, पर ‘वंदे मातरम्’ नहीं बोलेंगे। यह केवल राजनीतिक सोच नहीं, बल्कि मानसिकता का मुद्दा है। हमें इस मानसिकता को समझने की जरूरत है।”

अखिलेश यादव का बयान और उसके बाद सियासत तेज

अखिलेश यादव का बयान और उसके बाद सियासत तेज
अखिलेश यादव का बयान और उसके बाद सियासत तेज

दरअसल, कुछ दिन पहले अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा केवल राष्ट्रभक्ति के नाम पर लोगों को बांटना चाहती है। उन्होंने कहा था कि वंदे मातरम् या जय श्री राम बोलने से कोई देशभक्त या देशद्रोही नहीं हो जाता। समाजवादी पार्टी नेताओं ने इसे ‘राजनीतिक एजेंडा’ बताकर विरोध किया था।

योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद यह मुद्दा अब सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। भाजपा इसे राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक के रूप में आगे बढ़ा रही है, जबकि विपक्ष इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक दबाव का मुद्दा बता रहा है।

शिक्षा संस्थानों में नए निर्देश

राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रतिदिन की प्रार्थना सभाओं में राष्ट्रगान के साथ वंदे मातरम् का भी सामूहिक गायन होगा। सरकार का तर्क है कि यह बच्चों में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करेगा।

राजनीतिक अर्थ और भविष्य की दिशा

विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं है। यह चुनावी और वैचारिक राजनीति में राष्ट्रवाद के स्वर को तेज करने की रणनीति का हिस्सा भी है। भाजपा इसे राष्ट्रीय पहचान और गौरव के प्रतीक के रूप में स्थापित करना चाहती है, जबकि विपक्ष इसे विचारों की स्वतंत्रता का मामला बता रहा है।

निष्कर्ष

वंदे मातरम् को लेकर उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्र के सम्मान से जोड़ने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक हथकंडा बताकर विरोध कर रहा है। परंतु इस बहस के केंद्र में वही सवाल फिर खड़ा है—भारत में रहकर भारत माता के सम्मान में “वंदे मातरम्” कहना क्या किसी के लिए मुश्किल होना चाहिए?

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