चुनाव आयोग का नतीजा—BJP ने खोला जीत का खाता

जम्मू कश्मीर की नगरोट सीट पर हुए विधानसभा उपचुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं. बीजेपी ने यहां से जीत हासिल कर ली है.

नगरोटा विधानसभा सीट (जम्मू-कश्मीर) के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को एक बड़ी जीत मिली है। भाजपा की उम्मीदवार देवयानी राणा ने इस सीट पर जीत हासिल कर 42350 वोट प्राप्त किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी हर्ष देव सिंह (जम्मू & कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी) को 17703 वोट मिले। इस तरह, देवयानी राणा ने करीब 24647 वोटों के अंतर से अपनी जीत पक्की की।

चुनाव आयोग का नतीजा—BJP ने खोला जीत का खाता
चुनाव आयोग का नतीजा—BJP ने खोला जीत का खाता

यह सीट इसलिए खाली हुई थी क्योंकि पूर्व विधायक देवेंद्र सिंह राणा (भाजपा) का अक्टूबर 2024 में निधन हो गया था, और उनके निधन के बाद यह उपचुनाव कराया गया था।

देवयानी राणा ने चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्होंने स्थानीय जनसंपर्क किया, निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को सामने रखा और “विकास एवं समावेशी पेशेवर नेतृत्व” का एजेंडा उठाया।

उनकी जीत भाजपा के लिए दो-तरफा मायने रखती है: एक, यह दिखाती है कि वह जम्‍मू-कश्मीर की उस विधानसभा सीट को बरकरार रख पाने में सफल रही जहाँ पिछली बार उनके पिता जीते थे; और दो, यह भाजपा की स्थानीय पकड़ व संगठनात्मक तैयारियों का प्रभावशाली अंक है।

प्रतिद्वंद्वी दलों की स्थिति देखें तो: हर्ष देव सिंह ने 17,703 वोट हासिल किए, वहीं राष्ट्रीय कांग्रेस (एनसी) की उम्मीदवार शमिम बेगम को 10872 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहीं।

विश्लेषणियों के अनुसार, इस जीत में भाजपा की मजबूत स्थानीय नेटवर्क, सीट-परिवार संबंधी भावनात्मक जुड़ाव (पिता की मृत्यु के बाद पुत्री द्वारा चुनाव लड़ना), और विपक्ष में त्रिकोणीय मुकाबले का लाभ रहा है। इस तरह, भाजपा ने कठोर मुकाबले में अपेक्षाकृत आसान तरह से जीत दर्ज की।

इस उपचुनाव का राजनीतिक महत्व भी काफी है। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा की सीटें सीमित हैं और हर एक सीट का खाता राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक होता है। इस जीत से भाजपा को न सिर्फ संसदीय बहुमत के लिहाज़ से बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी बढ़त मिल सकती है।

दूसरी ओर, विपक्षी दलों के लिए यह हार चेतावनी है। एनसी व जेकनपीपी को इस हार से यह सवाल करना होगा कि वे स्थानीय स्तर पर कितनी सक्रिय थे, उम्मीदवार चयन कैसे किया गया, और जनता को किन-किन मुद्दों पर भरोसा दिलाया गया।

नगरोटा उपचुनाव ने भाजपा के लिए एक मनोवैज्ञानिक और वास्तविक जीत दोनों प्रदान की है। यह संकेत है कि पार्टी ने भाजपा-प्रमुख अंदाज में अपनी छवि, स्थानीय संगठन व जनसमर्थन बनाए रखने में सफलता पाई है। विपक्ष को अब खुद को पुनर्गठित करना होगा।

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