Bihar Elections Results 2025: बिहार में AIMIM ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है. चुनाव आयोग के रुझानों में ओवैसी की पार्टी 5 सीटों पर आगे है.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों और रुझानों में जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भारी बहुमत की ओर बढ़ता दिख रहा है, वहीं विपक्षी खेमे की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। इस राजनीतिक आंधी के बीच एक बड़ा और हैरान करने वाला मोड़ सामने आया है—असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने रुझानों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को पछाड़ते हुए ज्यादा सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है।

चुनाव आयोग के 12:50 बजे तक आए रुझानों के अनुसार, कांग्रेस जहाँ मात्र 4 सीटों पर आगे थी, वहीं AIMIM 5 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। यह आंकड़ा न सिर्फ सियासी विश्लेषकों के लिए चौंकाने वाला है, बल्कि बिहार की पारंपरिक राजनीति में एक बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।
कांग्रेस को मिली सिर्फ 8.22% वोट शेयर

अब तक मिले आंकड़ों में कांग्रेस का वोट शेयर 8.22% रहा है, जो उसके ऐतिहासिक प्रदर्शन की तुलना में काफी कम है। महागठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद कांग्रेस की स्थिति मजबूत नहीं दिख रही। राज्य की 243 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस न सिर्फ संख्या के मामले में पिछड़ रही है, बल्कि उसे उन सीटों पर भी संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है जहां वह पिछले चुनावों में अच्छी स्थिति में थी।
AIMIM का उभार—क्या बदली मुस्लिम वोटों की दिशा?
AIMIM का 5 सीटों पर आगे होना अचानक नहीं माना जा रहा। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी ने सीमांचल और कुछ अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में अपने संगठन को मजबूत किया है। ओवैसी ने पिछले चुनावों में भी सीमांचल की कई सीटों पर जीत हासिल कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
इस बार भी शुरुआती रुझानों में AIMIM की बेहतर स्थिति इस बात का संकेत है कि मुस्लिम वोटों का एक हिस्सा कांग्रेस और राजद के पारंपरिक आधार से हटकर AIMIM की ओर जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव आने वाले चुनावों में कई दलों की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।
कांग्रेस की सीट-वार स्थिति—चार सीटों पर मिल रही है बढ़त
रुझानों के मुताबिक कांग्रेस अभी तक 4 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इनमें सबसे उल्लेखनीय वाल्मीकि नगर सीट है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद 42,672 वोटों के साथ 898 वोटों के अंतर से आगे चल रहे हैं।
यहाँ 11/31 राउंड की गिनती पूरी हो चुकी है और प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंदी पर मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। इस सीट पर मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है और अंतिम परिणाम में उलटफेर की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ीं
महागठबंधन के लिए यह चुनाव किसी भी लिहाज से बेहतर साबित होता नहीं दिख रहा। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में प्रचार अभियान में युवा, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों को खूब उछाला गया, लेकिन रुझानों ने संकेत दिया है कि यह अभियान जनता को उतना प्रभावित नहीं कर पाया।
कांग्रेस की कमजोर स्थिति ने महागठबंधन के समीकरण को और भी नाज़ुक बना दिया है। जबकि AIMIM का उभरता ग्राफ यह बताता है कि विपक्षी वोटों का बिखराव इस बार भी महागठबंधन की हार की बड़ी वजह बन सकता है।
राजनीति में एक बड़ा संदेश
ओवैसी की पार्टी का कांग्रेस को पछाड़ना केवल सीटों का खेल नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा संकेत भी है।
यह बताता है कि—
- मुस्लिम वोटों की प्राथमिकताएँ बदली हैं
- कांग्रेस की पकड़ कमजोर हुई है
- AIMIM अब सीमांचल में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभर रही है
- महागठबंधन का पारंपरिक वोट बैंक सुरक्षित नहीं है
आगे क्या?
गिनती अभी जारी है, और अंतिम परिणाम ही यह तय करेंगे कि AIMIM और कांग्रेस की सीटों का अंतिम अंतर कितना रहता है। लेकिन एक बात साफ है—रुझानों ने कांग्रेस के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं और ओवैसी की पार्टी इस चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत दोबारा साबित करती दिखाई दे रही है।
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