Bihar Next CM: बिहार चुनाव में बीजेपी अब तक के इतिहास में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है. 94 सीटों पर पार्टी ने बढ़त बनाए हुए है. 2010 में बीजेपी ने 91 सीटें जीती थीं.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शानदार प्रदर्शन करता दिख रहा है। रुझानों के अनुसार, गठबंधन 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जो बिहार की राजनीति में एक बार फिर NDA की मजबूत वापसी की ओर संकेत करता है। बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दलों में खुशी की लहर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, लेकिन इसी बीच सत्ता के शीर्ष पद—मुख्यमंत्री की कुर्सी—को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है।
जहाँ नीतीश कुमार को NDA का स्वाभाविक चेहरा माना जाता रहा है, वहीं बीजेपी के एक बड़े नेता के बयान ने इस पर अचानक सस्पेंस बढ़ा दिया है।

बीजेपी महासचिव विनोद तावड़े के बयान ने बढ़ाया संशय
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि “मुख्यमंत्री का फैसला NDA के घटक दल मिलकर करेंगे। अभी इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।”
उनके इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस बार सीएम पद को लेकर NDA के भीतर सहमति बनना इतना आसान नहीं होगा।
बीजेपी की ओर से आया यह बयान ऐसे समय पर आया है जब जनता, मीडिया और राजनीतिक दल सभी मान रहे थे कि नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। लेकिन अब जनता के बीच यह सवाल और बड़ा हो गया है—क्या नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे या बीजेपी इस बार नया चेहरा सामने लाएगी?
नीतीश कुमार की भूमिका पर उठ रहे सवाल
2015 से लेकर 2025 के बीच बिहार की राजनीति में कई उतार-चढ़ाव आए। नीतीश कुमार ने दो बार पाला बदलते हुए विपक्ष से गठबंधन तोड़कर फिर NDA में वापसी की। इन राजनीतिक घटनाक्रमों ने उनकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए थे, लेकिन उन्हें अब भी बिहार में प्रशासन और सुशासन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
हालाँकि इस बार चुनाव के दौरान बीजेपी की जोरदार कैंपेनिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए गए अभियान ने saffron पार्टी को बड़ा आधार दिया है। अपने दम पर अधिक सीटें मिलने से बीजेपी की bargaining power पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। यही वजह है कि नीतीश की ताजपोशी स्वतःसिद्ध नहीं मानी जा रही।
NDA के भीतर संभावित समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP अब गठबंधन में ‘मोदी मैजिक’ और अपनी बढ़ी हुई सीटों के दम पर मुख्यमंत्री पद को लेकर assertive रुख अपना सकती है।
NDA में इन संभावित स्थितियों पर चर्चा हो सकती है—
- नीतीश कुमार को फिर सीएम बनाना, लेकिन बीजेपी के साथ अधिक मंत्रालयों का समझौता।
- बीजेपी का अपना मुख्यमंत्री बनाना, जिसमें नया चेहरा उभर सकता है।
- डिप्टी सीएम के पदों का पुनर्संतुलन, जिसमें जेडीयू और बीजेपी दोनों के लिए नए फार्मूले बन सकते हैं।
तावड़े के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी जल्दबाज़ी में कोई घोषणा नहीं कर रही और भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री चयन को रणनीतिक रूप से देखना चाहती है।
जेडीयू और बीजेपी दोनों के भीतर खलबली
NDA की बढ़त के बावजूद जेडीयू खेमे में चिंता साफ है। जेडीयू नेताओं का तर्क है कि नीतीश कुमार का अनुभव, प्रशासनिक पकड़ और स्थिर छवि उन्हें एक स्वाभाविक मुख्यमंत्री बनाते हैं।
उधर बीजेपी के कई नेता यह बात जोर-शोर से कह रहे हैं कि पार्टी को अब नेतृत्व की भूमिका अपने हाथ में लेनी चाहिए।
इन दो मतों के बीच तावड़े का बयान यह संकेत देता है कि स्थिति उतनी सरल नहीं है जितनी दिखाई दे रही है।
अगला कदम क्या होगा?
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार:
- एनडीए की बैठक मतगणना के बाद जल्द ही होगी।
- सीएम का फैसला सभी घटक दलों की सहमति से लिया जाएगा।
- बीजेपी अपने बढ़त और लोकप्रियता के आधार पर बातचीत में अधिक assertive रहेगी।
फिलहाल, जनता और राजनीतिक हलकों की निगाहें सिर्फ एक सवाल पर टिकी हैं—क्या नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहेंगे या NDA में आए नए राजनीतिक समीकरण इतिहास बदल देंगे?