चुनाव आयोग पर उंगली! अवधेश प्रसाद ने NDA की जीत पर उठाए सवाल !

बिहार में एनडीए की जीत को लेकर सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान खुलेआम आचार संहिता का उल्लंघन हुआ.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद राजनीतिक हलचल लगातार तेज़ होती जा रही है। एक तरफ जहां एनडीए अपनी ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहा है, वहीं विपक्षी दल इस परिणाम को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अवधेश प्रसाद ने चुनाव परिणामों के ठीक बाद एक बड़ा बयान देते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने खुलकर कहा कि “जनता बदलाव चाहती थी, लेकिन चुनाव आयोग की वजह से ऐसा नतीजा आया।”

चुनाव आयोग पर उंगली! अवधेश प्रसाद ने NDA की जीत पर उठाए सवाल !
चुनाव आयोग पर उंगली! अवधेश प्रसाद ने NDA की जीत पर उठाए सवाल !

उनका यह बयान बिहार के राजनीतिक माहौल को और गर्म कर रहा है, क्योंकि महागठबंधन पहले ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह जता चुका है।

“लोकतंत्र की खरीद-फरोख्त हुई”—अवधेश प्रसाद का आरोप

अवधेश प्रसाद ने अपने बयान में कहा कि इस चुनाव में लोकतंत्र को बड़े पैमाने पर खरीदा गया।
उनके अनुसार, चुनाव की घोषणा के बाद और आचार संहिता लागू होने के बावजूद सरकार की ओर से महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए, जो एक तरह से आचार संहिता का खुला उल्लंघन है।

उन्होंने कहा—
“जब राज्य में आचार संहिता लागू होती है, तो सरकार कोई भी आर्थिक लाभ या लाभार्थियों के खाते में राशि नहीं डाल सकती। लेकिन बिहार में खुलेआम ऐसा हुआ। यह लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है, और चुनाव आयोग इसकी अनदेखी करता रहा।”

उनका दावा है कि इस कदम ने चुनाव के परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया और मतदाताओं के निर्णय पर असर डाला।

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

अवधेश प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधी रही।
उनके मुताबिक, आचार संहिता लागू होने के बाद राज्य सरकार के किसी भी कल्याणकारी कार्यक्रम को रोका जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा—
“चुनाव आयोग की बहुत अहम भूमिका रही है। अगर आयोग निष्पक्ष होकर काम करता, तो इस तरह का नतीजा सामने नहीं आता। यह जीत एनडीए की नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की वजह से आई है।”

उनके इस बयान ने विपक्षी खेमे में नई जान फूंक दी है, जो पहले से ही परिणामों की समीक्षा और जांच की मांग उठा रहा है।

एनडीए की प्रचंड जीत और विपक्ष का आक्रोश

बिहार में एनडीए ने 243 में से 202 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ता में मजबूत वापसी की है। महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया, जिसमें आरजेडी ने 25 और कांग्रेस ने मात्र 6 सीटों पर जीत दर्ज की।
इतने बड़े अंतर से मिली जीत के बाद विपक्ष के पास परिणाम पर सवाल खड़े करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचा है।

अवधेश प्रसाद के बयान से यह स्पष्ट है कि विपक्ष इस बात को मुद्दा बनाकर अगले कुछ दिनों में और जोरदार तरीके से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर हमले तेज कर सकता है।

राजनीतिक माहौल में नई बहस

अवधेश प्रसाद के आरोपों ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान सरकारी योजनाओं के माध्यम से लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने का मामला संवेदनशील होता है, और यदि यह वास्तव में आचार संहिता के दौरान किया गया, तो यह गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

हालांकि राज्य सरकार और एनडीए की ओर से इस बयान पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बीजेपी और जेडीयू के नेता इसे विपक्ष की “निराशा और हताशा” बता रहे हैं।

क्या होगा आगे?

अवधेश प्रसाद ने यह भी संकेत दिया कि उनकी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक उठाने की तैयारी में हैं।
उनका कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसे मामलों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्ष एकजुट होकर इसे बड़ा मुद्दा बनाता है, तो आने वाले दिनों में यह बिहार की राजनीति में एक गंभीर विवाद का रूप ले सकता है।

Also Read :

बिहार में कांग्रेस का क्रैश—5 फैक्टर बने पार्टी की कमजोरी !