बिहार में मंत्री-बंटवारा सेट, लेकिन JDU-BJP की तकरार एक मुद्दे पर जारी !

बिहार में सरकार गठन की प्रक्रिया जारी है. इस बीच दावा है कि JDU-BJP के बीच विधानसभा स्पीकर पद के लिए पेच फंसा हुआ है.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणाम आने के बाद राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सरकार बनाने के लिए आवश्यक संख्याबल जुटा लिया है और अब मंत्रिमंडल के गठन का खाका लगभग तैयार है।
एनडीए के चारों प्रमुख घटक दल—भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड (JDU), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्यूलर) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), साथ ही राष्ट्रीय लोक मोर्चा—के बीच सीटों का बंटवारा लगभग फाइनल हो चुका है।

बिहार में मंत्री-बंटवारा सेट, लेकिन JDU-BJP की तकरार एक मुद्दे पर जारी !
बिहार में मंत्री-बंटवारा सेट, लेकिन JDU-BJP की तकरार एक मुद्दे पर जारी !

लेकिन सरकार गठन की इस प्रक्रिया के बीच एक बड़ा राजनीतिक पेच उभर आया है—विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) के पद को लेकर BJP और JDU के बीच खींचतान बढ़ गई है। यह मुद्दा इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि दिल्ली से लेकर पटना तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

सीटें बांटने में नहीं, स्पीकर के पद पर अटका मामला

सीटें बांटने में नहीं, स्पीकर के पद पर अटका मामला
सीटें बांटने में नहीं, स्पीकर के पद पर अटका मामला

मंत्रिमंडल में किस दल को कितने विभाग मिलेंगे, इस पर NDA की बैठकों में मोटा-मोटी सहमति बन चुकी है। सभी दलों ने अपनी-अपनी मांगें रखीं और उसे लेकर एनडीए ने एक संतुलित फॉर्मूला लगभग तय कर लिया है।
लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के नाम पर गतिरोध पैदा हो गया है।

BJP का तर्क:

– बीजेपी विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है।
– सबसे अधिक सीटें होने के कारण परंपरा व राजनीतिक तर्क के अनुसार स्पीकर का पद उसी को मिलना चाहिए
– पार्टी के भीतर भी इस पद को लेकर सहमति है और कुछ नामों की चर्चा भी शुरू हो चुकी है।

JDU का पलटवार:

– JDU का कहना है कि विधान परिषद (Legislative Council) में सभापति का पद पहले से ही BJP के पास है।
– इसलिए विधानसभा में स्पीकर का पद संतुलन बनाए रखने के लिए JDU को दिया जाना चाहिए
– JDU का यह भी दावा है कि गठबंधन राजनीति में “पावर शेयरिंग बैलेंस” जरूरी होता है और विधानसभा अध्यक्ष का पद इसी संतुलन का हिस्सा होना चाहिए।

इस प्रकार, दोनों दल अपने-अपने तर्कों पर अडिग दिख रहे हैं और यह विवाद फिलहाल सुलझता नहीं दिख रहा है।

दिल्ली से पटना तक तेज हुई हलचल

सूत्रों के मुताबिक स्पीकर के पद पर जारी इस खींचतान ने एनडीए के शीर्ष नेतृत्व को भी सक्रिय कर दिया है।
– दिल्ली में बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के साथ बिहार के नेताओं की मीटिंग हुई है।
– JDU के वरिष्ठ नेताओं ने भी अपने केंद्रीय नेताओं से बात कर स्पष्ट संदेश दिया है कि वे स्पीकर पद को छोड़ने के मूड में नहीं हैं।
– पटना में दोनों दलों के बीच लगातार बैक-टू-बैक मीटिंग चल रही है।

इस मुद्दे को जल्द निपटाने की कोशिश की जा रही है ताकि 20 नवंबर 2025 को होने वाले शपथ ग्रहण में किसी प्रकार का राजनीतिक संदेश गलत न जाए।

कौन-कौन हैं रेस में?

दोनों दलों की ओर से कुछ नाम चर्चा में हैं:

BJP की ओर से संभावित नाम:

– वरिष्ठ विधायक
– संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता
– ऐसे चेहरे जिनकी छवि साफ-सुथरी हो और जो विधानसभा को मजबूती से चला सकें

JDU के संभावित उम्मीदवार:

– पुरानी पारी के अनुभवी विधायकों के नाम
– संसदीय परंपराओं में दक्ष नेताओं को प्राथमिकता
– ऐसे चेहरे जो नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं

अभी किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि दोनों दल तैयारी के साथ अपने दावेदार मैदान में उतार रहे हैं।

मसले की गंभीरता—क्यों इतना अहम है स्पीकर का पद?

बिहार की राजनीतिक संरचना में स्पीकर का पद हमेशा से बेहद महत्वपूर्ण माना गया है।
– यह पद सदन में अनुशासन, कानून व नियमों के पालन और कार्रवाई की निगरानी करता है।
– सरकार बदलने या राजनीतिक संकट के समय स्पीकर की भूमिका कई बार बेहद निर्णायक हो जाती है।
– दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से जुड़े फैसलों में भी स्पीकर का अधिकार काफी अहम होता है।

यही कारण है कि BJP और JDU दोनों इस पद को अपने पास रखना चाहते हैं।

निष्कर्ष: सहमति कब बनेगी?

एनडीए के भीतर सरकार गठन को लेकर तस्वीर लगभग साफ है, लेकिन स्पीकर का मुद्दा गठबंधन में सबसे बड़ा पेच बन चुका है।
हालांकि सूत्रों का मानना है कि उच्चस्तरीय बातचीत के बाद आने वाले 24–48 घंटों में इस विवाद का समाधान निकाला जा सकता है।
जैसे ही यह मसला सुलझेगा, बिहार की नई सरकार की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।

Also Read :

PK ने तोड़ी चुप्पी—राजनीति छोड़ने की अटकलों पर बड़ा बयान !