संघ का ‘डोर-टू-डोर’ सुपर ड्राइव शुरू, देशभर में संपर्क तेज !

RSS ने दुनिया का सबसे बड़ा गृह सम्पर्क अभियान शुरू किया है। इसके लिए संघ के 80 हजार कार्यकर्ता मैदान में हैं। लखनऊ में इस अभियान की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने रविवार को अपने अब तक के सबसे बड़े गृह-सम्पर्क अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। संघ का दावा है कि यह पहल न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इस तरह के आयोजनों में सबसे व्यापक और संगठित संपर्क प्रयासों में से एक है। देशभर में लगभग 80 हजार से अधिक स्वयंसेवक घर-घर जाकर समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करेंगे और संगठन की विचारधारा, गतिविधियों तथा सामाजिक योजनाओं से लोगों को अवगत कराएंगे।

संघ का ‘डोर-टू-डोर’ सुपर ड्राइव शुरू, देशभर में संपर्क तेज !
संघ का ‘डोर-टू-डोर’ सुपर ड्राइव शुरू, देशभर में संपर्क तेज !

अभियान का मकसद: समाज के हर वर्ग तक पहुंच

RSS के वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के उन वर्गों तक सीधा संपर्क बनाना है, जिन तक संगठन की पहुंच अभी सीमित रही है। संघ का मानना है कि सामाजिक एकता, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए प्रत्यक्ष संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है। इसके तहत स्वयंसेवक लोगों से परिवार की परिस्थिति, शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, सामाजिक भागीदारी और स्थानीय मुद्दों पर बात करेंगे।

अभियान का फोकस समाज में बढ़ती वैचारिक दूरी और गलतफहमियों को कम कर, सकारात्मक संवाद का वातावरण बनाना है। इसी कारण संघ ने पहली बार इतने बड़े पैमाने पर प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को एकसाथ उतारा है।

80 हजार कार्यकर्ताओं का ‘ग्राउंड प्लान’

80 हजार कार्यकर्ताओं का ‘ग्राउंड प्लान’
80 हजार कार्यकर्ताओं का ‘ग्राउंड प्लान’

अभियान की तैयारी कई महीनों से चल रही थी। इसके लिए स्वयंसेवकों को अलग-अलग मॉड्यूल के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया गया—

  • कैसे घर-घर जाकर संवाद किया जाए
  • किस प्रकार की जानकारी इकट्ठा करनी है
  • किन विषयों पर बात नहीं करनी है
  • परिवारों की समस्याओं को कैसे सुना जाए
  • स्थानीय समाजसेवा से उन्हें कैसे जोड़ा जाए

बताया जा रहा है कि हर कार्यकर्ता रोजाना कम से कम 20–25 घरों का दौरा करेगा। अभियान का कवरेज ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी बस्तियों तक फैला हुआ है। कई राज्यों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि किसी क्षेत्र में संगठनात्मक दबाव न बने और गुणवत्ता में कमी न आए।

सामाजिक समरसता पर बड़ा फोकस

RSS इस अभियान का एक प्रमुख लक्ष्य सामाजिक समरसता (Social Harmony) बताता है। संघ लगातार यह दोहराता रहा है कि उसकी गतिविधियाँ समाज के सभी वर्गों के लिए हैं। इसलिए इस बार विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यक क्षेत्रों में भी व्यापक संपर्क किया जाएगा।

संघ के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य राजनीतिक नहीं है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक इसे आने वाले चुनावी मौसम से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन संगठन का कहना है कि यह उनकी दीर्घकालिक सामाजिक योजनाओं का हिस्सा है, जो राजनीति से अलग है।

डाटा बेस और फीडबैक सिस्टम

इस बार संघ ने टेक्नोलॉजी का उपयोग भी बढ़ाया है।
स्वयंसेवकों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म मुहैया कराया गया है जिसमें वे—

  • अपने क्षेत्र का दैनिक अपडेट
  • परिवारों से मिले सुझाव
  • समस्याएं
  • सामाजिक आवश्यकताएँ
    आदि को दर्ज करेंगे। यह जानकारी आगे नीतिगत और सामाजिक गतिविधियों को बनाने में मदद करेगी।

देशव्यापी प्रतिक्रिया और माहौल

अभियान की घोषणा के तुरंत बाद कई शहरों में स्वयंसेवक सक्रिय होते दिखे। कई जगहों पर लोगों ने संघ के इस प्रयास का स्वागत किया तो कुछ स्थानों पर इसे राजनीतिक एजेंडा बताकर आलोचनाएँ भी सामने आईं। लेकिन संघ की ओर से कहा गया है कि जनता से सीधे मुलाकात के दौरान ही वास्तविक प्रतिक्रिया समझी जा सकेगी।

आगे क्या?

यह अभियान अगले कई हफ्तों तक चलेगा। संघ की योजना है कि इस दौरान देश के लगभग हर जिले में टीम पहुंचाएगी। अभियान के समापन के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिसे केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाएगा और उसके आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

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