जनसुराज के संस्थापक और चुूनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के संदर्भ में दावा किया जा रहा है कि बीते दिनों उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नेता और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की.
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पहली बार चुनावी मैदान में उतरी जनसुराज पार्टी के नेता और चर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की हालिया राजनीतिक गतिविधियों ने देश की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। बीते दिनों प्रशांत किशोर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महासचिव और केरल के वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। केरल के वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की।हो गया है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या प्रशांत किशोर एक बार फिर कांग्रेस से जुड़ने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें आगामी चुनावों को लेकर रणनीतिक विमर्श हुआ। दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के संदर्भ में यह बैठक अहम थी। हालांकि, इस मुलाकात को लेकर न तो जनसुराज पार्टी की ओर से और न ही कांग्रेस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है, जिससे अटकलों को और हवा मिल गई है।
यह बैठक ऐसे समय पर हुई है, जब बिहार विधानसभा चुनाव को लगभग एक महीना बीत चुका है। इसी कारण राजनीतिक विश्लेषक इसे सामान्य मुलाकात से आगे का संकेत मान रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि यह केवल औपचारिक बातचीत होती, तो इसकी टाइमिंग इतनी अहम नहीं होती। लेकिन चुनाव के तुरंत बाद हुई इस मुलाकात ने इसके सियासी मायने बढ़ा दिए हैं।
प्रशांत किशोर का नाम देश के सबसे सफल चुनावी रणनीतिकारों में शुमार रहा है। उन्होंने अतीत में नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, जगन मोहन रेड्डी समेत कई बड़े नेताओं के लिए चुनावी रणनीतियां तैयार की हैं। खास बात यह है कि प्रशांत किशोर लंबे समय तक कांग्रेस के मुखर आलोचक रहे हैं। वे कई मौकों पर कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात को राजनीतिक गलियारों में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
जनसुराज पार्टी के सूत्र इस मुलाकात को “राजनीतिक विमर्श” बता रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशांत किशोर विभिन्न दलों के नेताओं से देश की राजनीति, लोकतंत्र और चुनावी सुधारों को लेकर चर्चा करते रहते हैं। वहीं कांग्रेस से जुड़े सूत्र भी फिलहाल इसे औपचारिक बातचीत से ज्यादा कुछ मानने को तैयार नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद सियासी हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ चुकी है कि आने वाले समय में कांग्रेस और प्रशांत किशोर के बीच कोई बड़ा राजनीतिक तालमेल बन सकता है।
इस संभावित समीकरण के कई मायने निकाले जा रहे हैं। एक ओर कांग्रेस लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना कर रही है और संगठन को मजबूत करने के लिए नए प्रयोगों की तलाश में है। दूसरी ओर, प्रशांत किशोर बिहार में जनसुराज के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल होंगे, या फिर दोनों के बीच केवल रणनीतिक सहयोग तक ही बात सीमित रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर कांग्रेस से जुड़ते हैं, तो यह पार्टी के लिए एक बड़ा कदम हो सकता है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कांग्रेस की स्थिति कमजोर मानी जाती है और ऐसे में प्रशांत किशोर की रणनीतिक समझ पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। वहीं, प्रशांत किशोर के लिए भी यह राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका को और मजबूत करने का अवसर हो सकता है।
फिलहाल इस मुलाकात को लेकर रहस्य बना हुआ है। न कांग्रेस की ओर से कोई संकेत दिया गया है और न ही प्रशांत किशोर ने खुलकर कुछ कहा है। लेकिन इतना तय है कि प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की यह मुलाकात आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति में नए समीकरणों की भूमिका तैयार कर सकती है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि आने वाले समय में इस मुलाकात का सियासी परिणाम क्या निकलता है।
गांधी परिवार से प्रशांत किशोर का पुराना रिश्ता
प्रशांत किशोर और गांधी परिवार के संबंध नए नहीं हैं. रणनीतिकार के तौर पर हो या राजनीतिक सलाहकार के रूप में, किशोर का कांग्रेस नेतृत्व से संवाद पहले भी रहा है. 2020 के बिहार चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कांग्रेस द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सार्वजनिक आपत्ति जताई थी. उन्होंने मतदाता सूची में संशोधन और राहुल गांधी के वोट चोरी अभियान को राज्य में गैर प्रासंगिक बताया था. हालांकि, उस समय उनकी आलोचना के बावजूद उनका खुद का चुनावी प्रयोग भी सफल नहीं रहा.
2021 में JDU से निष्कासन के बाद किशोर ने गांधी परिवार से संपर्क किया था और कांग्रेस को पुनर्जीवित करने का एक रोडमैप प्रस्तावित किया था. इसके बाद 2022 में दोनों पक्षों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू हुई. अप्रैल 2022 में सोनिया गांधी के जनपथ स्थित आवास पर हुई अहम बैठक में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे. इस बैठक में किशोर ने संगठनात्मक सुधार, चुनावी रणनीति और नेतृत्व संरचना को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी थी. उस समय किशोर कांग्रेस में शामिल होने के इच्छुक माने जा रहे थे, जिससे उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं.