इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से डायरिया फैलने से 13 लोगों की मौत और 1300 से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने शहर की व्यवस्था और प्रशासन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्टी-दस्त और डायरिया के प्रकोप ने खासतौर पर भागीरथपुरा इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है, जहां हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे आंकड़े इससे कहीं अधिक भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स और अस्पताल सूत्रों के अनुसार दूषित पानी पीने से बीमार हुए लोगों में से 6 महीने के एक मासूम बच्चे समेत कुल 13 लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा 1300 से ज्यादा लोग बीमार बताए जा रहे हैं, जिनमें से 100 से अधिक मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।
भागीरथपुरा सहित आसपास के इलाकों में पिछले कई दिनों से लोग उल्टी, दस्त, पेट दर्द और तेज बुखार की शिकायत कर रहे थे। शुरुआत में इसे सामान्य मौसमी बीमारी मानकर नजरअंदाज किया गया, लेकिन जब मौतों का सिलसिला शुरू हुआ तो स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम हरकत में आया। जांच के दौरान यह सामने आया कि कई इलाकों में पेयजल लाइनों में सीवेज का पानी मिल रहा था, जिससे संक्रमण तेजी से फैला।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही गंदे पानी की शिकायत नगर निगम और संबंधित अधिकारियों से की थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि नलों से बदबूदार और मटमैला पानी आ रहा था, बावजूद इसके सप्लाई बंद नहीं की गई। इसी लापरवाही का नतीजा है कि आज पूरा इलाका बीमारी की चपेट में आ गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में पानी की सप्लाई अस्थायी रूप से बंद कर दी है और टैंकरों के जरिए साफ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं और बीमार लोगों को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा जा रहा है। साथ ही, पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं।
इंदौर के प्रमुख सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है। डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश मरीज गंभीर डिहाइड्रेशन और संक्रमण से जूझ रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों में खतरा ज्यादा देखा जा रहा है। डॉक्टरों ने लोगों को उबला हुआ या बोतलबंद पानी पीने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दलों ने नगर निगम और राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि “सबसे स्वच्छ शहर” का तमगा सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है। विपक्ष का कहना है कि अगर समय रहते शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी। वहीं, प्रशासन का दावा है कि हालात पर नियंत्रण पाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल इंदौर में दूषित पानी से फैली इस बीमारी ने लोगों के मन में डर और आक्रोश दोनों पैदा कर दिए हैं। स्वच्छता के लिए देशभर में मिसाल बनने वाला शहर आज बुनियादी सुविधा साफ पानी के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट से यह साफ होगा कि इस पूरे मामले में लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है, लेकिन तब तक कई परिवार अपनों को खोने का दर्द झेल चुके होंगे।
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