इंदौर कांड पर उमा भारती का बड़ा बयान, 15 मौतों का किया दावा !

इंदौर में दूषित पानी पीने से 9 लोगों मौत हो गई है, जबकि BJP पार्षद 15 मौतों का दावा कर रहे हैं. उमा भारती ने इस घटना पर मोहन यादव सरकार से सवाल पूछे हैं.

मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाले इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक मामले में अब तक 9 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि की गई है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पार्षद कमल वाघेला ने 15 लोगों की मौत का दावा किया है। मौत के बढ़ते आंकड़ों और हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता उमा भारती ने इस पूरे प्रकरण को लेकर मोहन यादव सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

इंदौर कांड पर उमा भारती का बड़ा बयान, 15 मौतों का किया दावा !
इंदौर कांड पर उमा भारती का बड़ा बयान, 15 मौतों का किया दावा !

इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का मामला सामने आने के बाद शहर में भय और आक्रोश का माहौल है। जिन इलाकों में यह घटना हुई है, वहां लोग दहशत में हैं और प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मृतकों के परिजनों का कहना है कि लंबे समय से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नतीजा यह हुआ कि लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए उमा भारती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक और तीखा पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवॉर्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी और ज़हर मिला पानी—जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और अभी भी निगलता जा रहा है। मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।”

उमा भारती ने इस घटना को सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि नैतिक विफलता बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के पुरस्कार और रैंकिंग तब बेमानी हो जाती हैं, जब नागरिकों को पीने के लिए शुद्ध पानी तक उपलब्ध न हो। उनका कहना था कि इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान होनी चाहिए और सरकार को “घोर प्रायश्चित” करना होगा।

बीजेपी पार्षद कमल वाघेला द्वारा 15 मौतों का दावा किए जाने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। हालांकि प्रशासन अभी भी 9 मौतों की ही आधिकारिक पुष्टि कर रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है। कई मरीज अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों के लक्षण कई लोगों में देखे गए हैं। उल्टी-दस्त, बुखार और पेट दर्द की शिकायतों के बाद बड़ी संख्या में लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय पर शुद्ध पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है और टैंकरों के माध्यम से स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की बात कही है। साथ ही जल स्रोतों की जांच और पाइपलाइन की सफाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये कदम बहुत देर से उठाए गए हैं।

इस पूरे मामले ने इंदौर की ‘सबसे स्वच्छ शहर’ की छवि पर गहरा धब्बा लगा दिया है। स्वच्छता सर्वेक्षणों में लगातार अव्वल रहने वाले शहर में यदि लोगों को दूषित पानी पीकर जान गंवानी पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

फिलहाल सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। मृतकों के परिजनों को न्याय दिलाने, दोषियों पर कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग तेज हो गई है। इंदौर का यह मामला अब केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था की कसौटी बन गया है।

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