नगर पालिका सीतापुर ने सपा के जिला कार्यालय को खाली करने का नोटिस भेजा है। कार्यालय खाली करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से एक बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक खबर सामने आई है, जिसने जिले की सियासत में हलचल मचा दी है। नगर पालिका प्रशासन ने समाजवादी पार्टी (सपा) के जिला कार्यालय को खाली करने का नोटिस जारी किया है। यह कार्यालय बीते करीब 20 वर्षों से टाउन हॉल परिसर में संचालित हो रहा था। नगर पालिका ने सपा के जिलाध्यक्ष को नोटिस भेजते हुए 15 दिनों के भीतर परिसर खाली करने के निर्देश दिए हैं।

नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि टाउन हॉल स्थित जिस भूमि पर सपा का जिला कार्यालय बना हुआ है, वह नजूल की जमीन है। प्रशासन के अनुसार यह जमीन किसी भी राजनीतिक दल को स्थायी रूप से कार्यालय संचालन के लिए आवंटित नहीं की जा सकती। नगर पालिका का दावा है कि वर्तमान में वहां सपा का कार्यालय अवैध रूप से संचालित हो रहा है, इसलिए नियमानुसार उसे खाली कराया जाना जरूरी है।
प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई भूमि रिकॉर्ड की जांच के बाद की गई है। नगर पालिका ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्यालय खाली नहीं किया गया तो आगे विधिक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें बलपूर्वक कब्जा हटाने की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। इस नोटिस के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है और राजनीतिक हलकों में इस फैसले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

समाजवादी पार्टी का कहना है कि यह कार्यालय सपा सरकार के कार्यकाल में विधिवत रूप से आवंटित किया गया था और बीते दो दशकों से यहां पार्टी की गतिविधियां चल रही हैं। सपा नेताओं का आरोप है कि वर्तमान सरकार के दबाव में यह कार्रवाई की जा रही है और इसका मकसद विपक्ष की आवाज को दबाना है। सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि पार्टी इस नोटिस को पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध मानती है और इसके खिलाफ कानूनी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
सपा नेताओं का यह भी कहना है कि अगर जमीन नजूल की थी तो इतने वर्षों तक प्रशासन की ओर से कोई आपत्ति क्यों नहीं उठाई गई। उन्होंने सवाल किया कि चुनावी माहौल में ही इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं में इस फैसले को लेकर नाराजगी है और विरोध प्रदर्शन की भी संभावना जताई जा रही है।
वहीं, नगर पालिका प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह नियमों और कानून के तहत की जा रही है। नगर पालिका के अनुसार, नजूल भूमि से संबंधित कई मामलों की समीक्षा की जा रही है और अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया उसी का हिस्सा है। प्रशासन का दावा है कि इसमें किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव या भेदभाव नहीं है।
इस घटनाक्रम के बाद सीतापुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां इसे सरकार की दमनकारी नीति बता रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष इसे कानून का पालन कराए जाने की सामान्य प्रक्रिया बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि सपा इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाती है।
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि समाजवादी पार्टी 15 दिनों की समयसीमा के भीतर क्या रुख अपनाती है। क्या पार्टी कार्यालय खाली करेगी या फिर अदालत का दरवाजा खटखटाएगी, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। इतना तय है कि इस कार्रवाई ने सीतापुर की सियासत को एक बार फिर गर्मा दिया है और इसका असर प्रदेश स्तर की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
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