यूपी में KGMU मजार विवाद, AIMIM का आंदोलन अलर्ट!

ताहिर सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि आजादी से पहले की मजारें KGMU में स्थित हैं, कभी उन्हें अवैध नहीं ठहराया गया. लेकिन अब लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) परिसर में मौजूद मजार को हटाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जहां एक ओर प्रशासनिक स्तर पर इसे अवैध निर्माण बताने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर मुस्लिम संगठनों के साथ-साथ अब ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) भी खुलकर विरोध में उतर आई है। इस मुद्दे ने न सिर्फ धार्मिक बल्कि राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

यूपी में KGMU मजार विवाद, AIMIM का आंदोलन अलर्ट!
यूपी में KGMU मजार विवाद, AIMIM का आंदोलन अलर्ट!

मामले को लेकर AIMIM के यूपी सेंट्रल अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने लखनऊ में एक प्रेसवार्ता आयोजित की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने KGMU प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मजारों को अवैध बताकर गलत सूचना और भ्रामक तथ्यों के आधार पर नोटिस चस्पा की गई है। उन्होंने कहा कि KGMU द्वारा जारी नोटिस में 15 दिनों के भीतर दरगाह हटाने का निर्देश दिया गया है, जो पूरी तरह विधि विरुद्ध है और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

शेख ताहिर सिद्दीकी ने कहा कि KGMU परिसर में स्थित मजारें आजादी से पहले की हैं और अंग्रेजी शासन काल से भी पूर्व से मौजूद रही हैं। उन्होंने दावा किया कि जब KGMU की स्थापना हुई थी, उससे पहले भी ये मजारें वहां मौजूद थीं और उस समय किसी भी प्रशासन ने इन्हें अवैध नहीं ठहराया। ऐसे में अब अचानक इन्हें अवैध बताना लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ है।

यूपी में KGMU मजार विवाद, AIMIM का आंदोलन अलर्ट!
यूपी में KGMU मजार विवाद, AIMIM का आंदोलन अलर्ट!

उन्होंने कहा कि सैकड़ों वर्षों से ये मजारें श्रद्धा का केंद्र रही हैं और केवल मुस्लिम ही नहीं बल्कि हिंदू और अन्य धर्मों के लोग भी यहां आस्था रखते हैं। लोग अपनी धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार यहां आते-जाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी ऐतिहासिक और कानूनी जांच के नोटिस जारी करना पूरी तरह मनमाना फैसला है।

AIMIM नेता ने कहा कि अगर KGMU प्रशासन को किसी भी प्रकार की आपत्ति थी, तो उसे पहले कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी। अचानक नोटिस लगाकर 15 दिनों में दरगाह हटाने का आदेश देना न सिर्फ गलत है बल्कि इससे सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले से धार्मिक तनाव पैदा होने की आशंका है।

शेख ताहिर सिद्दीकी ने यह भी चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो AIMIM सड़क से लेकर अदालत तक आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी मजबूती से मजारों की रक्षा के लिए खड़ी है और जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक तरीके से बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

वहीं, इस मामले पर अन्य मुस्लिम संगठनों ने भी आपत्ति जताई है। संगठनों का कहना है कि यह केवल एक मजार का मामला नहीं है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़ा सवाल है। उनका आरोप है कि चुनिंदा धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है।

दूसरी ओर KGMU प्रशासन का कहना है कि परिसर में मौजूद अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है और यह किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है। प्रशासन का दावा है कि नोटिस नियमानुसार जारी किया गया है और कानून के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल यह मामला प्रशासन और धार्मिक संगठनों के बीच टकराव का रूप लेता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि KGMU प्रशासन अपने फैसले पर कायम रहता है या फिर विरोध और राजनीतिक दबाव के चलते कोई बीच का रास्ता निकलता है। इतना तय है कि KGMU मजार विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी इसकी गूंज सुनाई देने लगी है।

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