सपा प्रवक्ता की गिरफ्तारी से सियासत गरम — दो दिन से थे लापता !

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज यादव को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सपा नेता पर धमकी देने और जाति सूचक शब्द बोलने का आरोप है। इस संबंध में पुलिस ने मुकदमा भी दर्ज किया था।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। मनोज यादव को बाराबंकी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई, जब समाजवादी पार्टी ने कुछ ही घंटे पहले दावा किया था कि उनके टीवी पैनलिस्ट और राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव पिछले एक दिन से लापता हैं। पार्टी ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए सोशल मीडिया के जरिए चिंता जताई थी।

सपा प्रवक्ता की गिरफ्तारी से सियासत गरम — दो दिन से थे लापता !
सपा प्रवक्ता की गिरफ्तारी से सियासत गरम — दो दिन से थे लापता !

समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार सुबह अपने आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “समाजवादी पार्टी के टीवी पैनलिस्ट मनोज यादव कल रात से लापता हैं, जो कि एक बहुत गंभीर विषय है।” इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। पार्टी नेताओं और समर्थकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि आखिर मनोज यादव कहां हैं और उनसे संपर्क क्यों नहीं हो पा रहा है।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की इस पोस्ट के कुछ समय बाद ही स्थिति साफ होती नजर आई। पार्टी की ओर से ही यह जानकारी दी गई कि बाराबंकी के सफदरगंज थाने की पुलिस ने मनोज यादव की गिरफ्तारी के बारे में अवगत कराया है। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि मनोज यादव लापता नहीं थे, बल्कि पुलिस की कार्रवाई के तहत हिरासत में लिए गए थे। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

सपा प्रवक्ता की गिरफ्तारी से सियासत गरम — दो दिन से थे लापता !
सपा प्रवक्ता की गिरफ्तारी से सियासत गरम — दो दिन से थे लापता !

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मनोज यादव को बाराबंकी जिले के सफदरगंज थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, गिरफ्तारी के कारणों को लेकर शुरुआती तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। पुलिस का कहना है कि मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है और उचित समय पर पूरे प्रकरण की जानकारी साझा की जाएगी।

इस पूरे मामले में समाजवादी पार्टी ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मनोज यादव को किसी मामले में हिरासत में लिया गया था, तो इसकी जानकारी समय रहते दी जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि बिना सूचना के किसी राजनीतिक प्रवक्ता को उठाया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सपा नेताओं ने यह भी कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।

वहीं, पुलिस और प्रशासन का पक्ष इससे अलग बताया जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मनोज यादव की गिरफ्तारी एक कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और इसमें किसी तरह की राजनीतिक दुर्भावना नहीं है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जांच प्रक्रिया के तहत आवश्यक कदम उठाए गए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि गिरफ्तारी के दौरान सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया गया।

गौरतलब है कि मनोज यादव समाजवादी पार्टी के सक्रिय और मुखर प्रवक्ताओं में गिने जाते हैं। वह अक्सर टीवी डिबेट्स और सार्वजनिक मंचों पर सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी को लेकर सियासी प्रतिक्रियाएं आना स्वाभाविक माना जा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हो सकती है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे कानून का सामान्य पालन बता रहा है।

इस घटना के बाद बाराबंकी पुलिस भी सुर्खियों में आ गई है। बाराबंकी पुलिस का कहना है कि पूरे मामले में कानून के तहत ही कदम उठाए गए हैं और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। पुलिस का दावा है कि मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।

फिलहाल, मनोज यादव की गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है, वहीं पुलिस और प्रशासन अपने कदमों को सही ठहराने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।

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