दिल्लीवालों के लिए खुशखबरी — सस्ती बिजली की दिशा में बड़ा कदम !

दिल्ली सरकार पहले से ही सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठा चुकी है. राजधानी में नेट मीटरिंग सिस्टम पहले से लागू है, जिसके तहत उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज सकते हैं.

दिल्ली में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक नई और अहम पहल की शुरुआत होने जा रही है, जो आने वाले समय में बिजली की कीमतों और उपयोग के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है। राजधानी में अब उपभोक्ता अपने घरों या इमारतों में लगे सोलर पैनल से उत्पादित बिजली को एक-दूसरे से खरीद और बेच सकेंगे।

दिल्लीवालों के लिए खुशखबरी — सस्ती बिजली की दिशा में बड़ा कदम !
दिल्लीवालों के लिए खुशखबरी — सस्ती बिजली की दिशा में बड़ा कदम !

इस अभिनव व्यवस्था को लागू करने के लिए दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने एक पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। यह योजना शुरुआती तौर पर छह महीने के लिए लागू की जाएगी, ताकि इसके असर और व्यावहारिकता का आकलन किया जा सके।

यह नई व्यवस्था “पीयर-टू-पीयर एनर्जी ट्रेडिंग” (Peer-to-Peer Energy Trading) के नाम से जानी जाएगी। आसान भाषा में समझें तो अब जिन उपभोक्ताओं के पास सोलर पैनल लगे हैं और उनकी जरूरत से ज्यादा बिजली बन रही है, वे उस अतिरिक्त बिजली को सीधे अन्य उपभोक्ताओं को बेच सकेंगे। वहीं, जिन लोगों को ज्यादा बिजली की जरूरत है, वे बाजार या वितरण कंपनी पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय दूसरे उपभोक्ताओं से बिजली खरीद सकेंगे। इससे बिजली की लागत घटने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।

दिल्लीवालों के लिए खुशखबरी — सस्ती बिजली की दिशा में बड़ा कदम !
दिल्लीवालों के लिए खुशखबरी — सस्ती बिजली की दिशा में बड़ा कदम !

DERC द्वारा मंजूर यह पायलट योजना फिलहाल सीमित स्तर पर शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य यह समझना है कि उपभोक्ताओं के बीच बिजली की सीधी खरीद-बिक्री का यह मॉडल कितना कारगर साबित होता है। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान तकनीकी, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं की गहराई से जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि क्या मौजूदा बिजली वितरण व्यवस्था में इस तरह के लेन-देन को बिना किसी बाधा के जोड़ा जा सकता है या नहीं।

इस योजना के तहत एक डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका भी अहम होगी। माना जा रहा है कि बिजली की खरीद-बिक्री के लिए एक ऑनलाइन या स्मार्ट सिस्टम विकसित किया जाएगा, जहां उपभोक्ता यह देख सकेंगे कि किसके पास कितनी अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है और किस दर पर वह बेची जा रही है। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से विकल्प चुनने की सुविधा मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से सोलर एनर्जी को अपनाने की रफ्तार तेज हो सकती है। अब तक कई लोग यह सोचकर सोलर पैनल लगाने से हिचकते थे कि जरूरत से ज्यादा बिजली बनने पर उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। लेकिन पीयर-टू-पीयर ट्रेडिंग शुरू होने के बाद अतिरिक्त बिजली बेचकर उपभोक्ता न सिर्फ अपनी लागत वसूल कर सकेंगे, बल्कि मुनाफा भी कमा सकते हैं। इससे सोलर पैनल लगाना एक आकर्षक विकल्प बन सकता है।

बिजली उपभोक्ताओं के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिजली सस्ती हो सकती है। जब उपभोक्ता सीधे एक-दूसरे से बिजली खरीदेंगे, तो वितरण कंपनियों और अन्य मध्यवर्ती खर्चों में कमी आएगी। इसका असर सीधे बिजली बिल पर पड़ सकता है। खासकर उन इलाकों में, जहां सोलर पैनल की संख्या ज्यादा है, वहां बिजली की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।

हालांकि, इस योजना के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बिजली की गुणवत्ता, ग्रिड की स्थिरता, बिलिंग प्रणाली और विवाद निपटान जैसे मुद्दों पर स्पष्ट नियम बनाने होंगे। यही वजह है कि DERC ने इसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करने का फैसला किया है। छह महीने की अवधि में मिलने वाले अनुभव और आंकड़ों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि इसे बड़े स्तर पर लागू किया जाए या नहीं।

यह पहल न सिर्फ दिल्ली के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकती है। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य राज्यों में भी इसी तरह की पीयर-टू-पीयर एनर्जी ट्रेडिंग व्यवस्था लागू की जा सकती है। इससे भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, दिल्ली में शुरू होने जा रही यह नई व्यवस्था बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है। सस्ती बिजली, सोलर एनर्जी को बढ़ावा और उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प—ये सभी पहलू इस प्रोजेक्ट को खास बनाते हैं। अब सबकी नजरें इस पायलट योजना के नतीजों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि भविष्य में बिजली का कारोबार किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

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