यूपी में कनेक्टिविटी का बड़ा प्लान पास पूर्वांचल–बुंदेलखंड कॉरिडोर पर शासन की मुहर !

उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली-आगरा-झांसी-ललितपुर कॉरिडोर निर्माण को मंजूरी दे दी है. इसके लिए बजट में शासन ने सात हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है.

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार बड़े फैसले ले रही है। इसी क्रम में सरकार ने बरेली–आगरा–झांसी–ललितपुर कॉरिडोर के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से पूर्वांचल, बुंदेलखंड और दिल्ली-एनसीआर के बीच कनेक्टिविटी को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे पहले सरकार गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी दे चुकी है, जो बरेली से होकर गुजरेगा और इस पूरे क्षेत्र को एक बड़े ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर में बदल देगा।

यूपी में कनेक्टिविटी का बड़ा प्लान पास पूर्वांचल–बुंदेलखंड कॉरिडोर पर शासन की मुहर !
यूपी में कनेक्टिविटी का बड़ा प्लान पास पूर्वांचल–बुंदेलखंड कॉरिडोर पर शासन की मुहर !

प्रदेश सरकार के इस फैसले को कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बरेली–आगरा–झांसी–ललितपुर कॉरिडोर के जरिए पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी तक आवागमन सुगम होगा। साथ ही, दिल्ली-एनसीआर से बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश की सीमा तक सीधा और तेज़ सड़क संपर्क विकसित हो सकेगा। यह कॉरिडोर न केवल यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि उद्योग, व्यापार और निवेश को भी नई दिशा देगा।

गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे को भी मिली रफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोरखपुर–पानीपत एक्सप्रेसवे के लिए सरकार की ओर से टोकन मनी भी जारी कर दी गई है। यह एक्सप्रेसवे बरेली जिले की नवाबगंज और बहेड़ी तहसील के करीब 68 गांवों से होकर गुजरेगा। इसके निर्माण से पूर्वांचल से हरियाणा और दिल्ली तक सीधा संपर्क स्थापित होगा। सबसे खास बात यह है कि यह एक्सप्रेसवे बरेली को एक प्रमुख जंक्शन के रूप में विकसित करेगा, जहां से कई बड़े एक्सप्रेसवे आपस में जुड़ेंगे।

सरकार की योजना के मुताबिक, इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे एक-दूसरे से कनेक्ट हो जाएंगे। इससे उत्तर प्रदेश में एक विशाल और मजबूत रोड कॉरिडोर नेटवर्क तैयार होगा, जो देश के अन्य राज्यों से भी बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

547 किलोमीटर लंबा होगा नया कॉरिडोर

547 किलोमीटर लंबा होगा नया कॉरिडोर
547 किलोमीटर लंबा होगा नया कॉरिडोर

बरेली–आगरा–झांसी–ललितपुर कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 547 किलोमीटर प्रस्तावित है। यह मार्ग बरेली से शुरू होकर विभिन्न जिलों से गुजरते हुए आगरा, झांसी और अंत में ललितपुर तक पहुंचेगा। इस परियोजना के तहत पहले से मौजूद फोरलेन सड़कों का उपयोग करते हुए उन्हें आधुनिक मानकों के अनुसार अपग्रेड किया जाएगा। इससे निर्माण लागत भी कम होगी और परियोजना को अपेक्षाकृत कम समय में पूरा किया जा सकेगा।

इस कॉरिडोर के जरिए बुंदेलखंड क्षेत्र को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां लंबे समय से बेहतर कनेक्टिविटी की मांग की जा रही थी। बेहतर सड़क नेटवर्क से यहां कृषि उत्पादों, खनिज संसाधनों और स्थानीय उद्योगों को बड़े बाजारों तक पहुंचने में आसानी होगी।

गंगा एक्सप्रेसवे से भी बढ़ेगा नेटवर्क

दूसरी ओर, मेरठ–प्रयागराज गंगा एक्सप्रेसवे भी प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देने वाला है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों से होकर गुजरेगा और बदायूं में बरेली–मथुरा हाईवे से जुड़ेगा। आगे चलकर यह वृंदावन में मथुरा हाईवे से कनेक्ट होगा। बदायूं में ही गंगा एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद हाईवे से भी जुड़ता है। इस तरह पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड तक सड़क नेटवर्क और अधिक मजबूत हो जाएगा।

7 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रावधान

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, बरेली–आगरा–झांसी–ललितपुर कॉरिडोर के लिए सरकार ने लगभग 7 हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। इसके अलावा प्रदेश में चल रही अन्य बड़ी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर भी तेजी से काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों के भीतर सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे को एक-दूसरे से जोड़ दिया जाए।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक्सप्रेसवे प्राधिकरण, स्टेट हाईवे अथॉरिटी और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया मिलकर समन्वय के साथ काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से उत्तर प्रदेश देश का सबसे मजबूत रोड इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क वाला राज्य बन सकता है।

कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह कदम न केवल प्रदेश की भौगोलिक दूरी को कम करेगा, बल्कि आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और निवेश को भी नई रफ्तार देगा। कनेक्टिविटी के इस नए अध्याय से उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और तेज होने की उम्मीद है।

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