यूपी में शंकराचार्य विवाद पर यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बटुकों की शिखा खींचने वालों को पाप लगेगा। जो भी दोषी हों उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित बदसलूकी का मामला अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। इस प्रकरण पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बयान के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

क्या है पूरा मामला
प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप लगा। आरोप है कि इस दौरान उनकी चोटी या शिखा के साथ बदसलूकी की गई, जिसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया जा रहा है। यह मामला सामने आते ही साधु-संतों और धार्मिक संगठनों में नाराजगी देखने को मिली और राजनीतिक दलों ने भी इस पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का बयान
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि “चोटी खींचना, शिखा खींचना महापाप है।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो भी इस घटना का दोषी पाया जाएगा, उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। पाठक के इस बयान को जहां एक ओर धार्मिक भावनाओं के समर्थन के तौर पर देखा गया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता स्वीकार करने जैसा बताया।
शिवपाल यादव का तीखा हमला

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने ब्रजेश पाठक के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “वे उसी पार्टी का हिस्सा हैं और उसी मंत्रिमंडल में शामिल हैं, जहां से यह अपमान हुआ है। अगर उन्हें इतना ही बुरा लगा है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। पाप तो उन्हें भी लगेगा, क्योंकि वे उसी सरकार का हिस्सा हैं।”
शिवपाल यादव ने यह भी कहा कि सरकार अपने ही सिस्टम की खामियों पर बयान देकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उनके मुताबिक, अगर सरकार वास्तव में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई चाहती है, तो उसे सिर्फ बयानबाजी नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे।
कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा
इस विवाद में कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि आज कांग्रेस की बात सही साबित हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के डिप्टी सीएम वही बातें कह रहे हैं, जो कांग्रेस पहले से कहती आ रही है।
आराधना मिश्रा ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता जब मनरेगा, गरीबों और किसानों के मुद्दे पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे, तब उन पर बर्बर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया, वह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है।
लाठीचार्ज और लोकतंत्र पर सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि देश संविधान से चलता है और संविधान हर नागरिक को अपनी बात कहने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग यह दर्शाता है कि सरकार असहमति की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सियासी मायने
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, शंकराचार्य विवाद अब सिर्फ एक धार्मिक या प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव का बड़ा कारण बनता जा रहा है। एक तरफ सरकार दोषियों पर कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की नाकामी और दोहरे रवैये का उदाहरण बता रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती है और क्या बयानबाजी से आगे बढ़कर वास्तविक कार्रवाई होती है। फिलहाल इतना तय है कि शंकराचार्य विवाद ने यूपी की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और यह मुद्दा अभी और तूल पकड़ सकता है।
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