UP Budget में बदलाव की बयार, किसान बना अर्थव्यवस्था की धुरी !

 भारत में गांव और किसान सशक्त होने पर देश समृद्ध होगा. योगी सरकार ने 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास, खेती-किसानी और रोजगार बढ़ाकर किसानों को आर्थिक भागीदार बनाया है.

भारत की आत्मा गांवों में बसती है और जब गांव व अन्नदाता किसान सशक्त होते हैं, तभी देश समृद्धि की राह पर आगे बढ़ता है। उत्तर प्रदेश के समावेशी विकास का लक्ष्य भी इसी सोच से जुड़ा है। इसी नीति को केंद्र में रखकर Yogi Adityanath के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश के नव निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। यह नया उत्तर प्रदेश शहर और गांव के बीच की खाई को पाटने, ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने और किसानों को विकास का सहभागी बनाने की मिसाल बन रहा है।

UP Budget में बदलाव की बयार, किसान बना अर्थव्यवस्था की धुरी !
UP Budget में बदलाव की बयार, किसान बना अर्थव्यवस्था की धुरी !

इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए योगी सरकार का बजट 2026-27 खेती-किसानी और ग्राम्य विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाता दिखाई दे रहा है। बजट में ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, किसानों को नई तकनीकों और नए बाजारों से जोड़ने तथा कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि किसान केवल सरकारी योजनाओं के लाभार्थी न रहें, बल्कि प्रदेश की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनें।

कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये

2017 में सत्ता संभालने के बाद से ही योगी सरकार ने किसानों को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है। एक ओर 36 हजार करोड़ रुपये की ऐतिहासिक कर्जमाफी की गई, तो दूसरी ओर केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 94,668.58 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में स्थानांतरित किए गए। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर पारदर्शिता सुनिश्चित की गई।

बजट 2026-27 में कृषि योजनाओं के लिए 10,888 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले बजट की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। यूपीएग्रीज परियोजना के तहत एक्वा कल्चर के लिए विश्वस्तरीय हैचरी और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना हेतु 155 करोड़ रुपये, एग्री-एक्सपोर्ट हब के लिए 245 करोड़ रुपये और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के लिए 75 करोड़ रुपये का रिवॉल्विंग फंड प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा किसानों के डीजल पंप सेट को सोलर में बदलने के लिए 673.84 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे खेती को टिकाऊ और किफायती बनाया जा सके।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फॉर्मिंग योजना के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में 94,300 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके लिए 298 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। निजी नलकूपों को अनवरत बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 2,400 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। वहीं पं. दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना के लिए लगभग 103 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

गन्ना किसानों के जीवन में मिठास

गन्ना किसानों के लिए योगी सरकार का कार्यकाल ऐतिहासिक रहा है। 2017 के बाद से अब तक 3.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया गया है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इससे किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिलेगा और ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा आएगी।

दुग्ध व मत्स्य पालकों को भी संबल

दुग्ध व मत्स्य पालकों को भी संबल
दुग्ध व मत्स्य पालकों को भी संबल

बजट में दुग्ध और मत्स्य पालकों के लिए भी नए अवसर खोले गए हैं। प्रदेश में 19 दुग्ध संघों के माध्यम से दुग्धशाला विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। मथुरा में अब 1 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेयरी प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव है। छुट्टा गोवंश की समस्या के समाधान के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मत्स्य पालकों के लिए एक्वा कल्चर और प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

इसके साथ ही 36.87 लाख किसानों को निःशुल्क तिलहन बीज मिनीकिट, लगभग 83 हजार सोलर पंप, 32 हजार खेत तालाबों का निर्माण और 2.46 लाख से अधिक कृषि यंत्रों का वितरण किया गया है। किसान पाठशाला के माध्यम से करीब दो करोड़ किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ा गया है।

आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ता अन्नदाता

धान खरीद अभियान के जरिए सरकार किसानों की आय सुनिश्चित करने में जुटी है। एमएसपी पर निर्बाध खरीद और DBT के माध्यम से समय पर भुगतान ने किसानों का भरोसा बढ़ाया है। धान खरीद सत्र 2025-26 में अब तक 12.78 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है और 60.98 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि योगी सरकार की नीतियां किसानों को आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की ओर ले जा रही हैं। इससे न केवल कृषि क्षेत्र मजबूत हो रहा है, बल्कि शहर और गांव के बीच की खाई भी कम हो रही है। यही समावेशी विकास की असली पहचान है।

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