बढ़ते UPI फ्रॉड केस पर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख सख्त !

दिल्ली में बढ़ते UPI फ्रॉड पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने पीड़ितों को राहत देने और सख्त गाइडलाइंस बनाने पर जवाब तलब किया है.

दिल्ली में ऑनलाइन पेमेंट के बढ़ते चलन के साथ-साथ UPI फ्रॉड के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। इस गंभीर समस्या को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सुरक्षित बनाना और ठगी के शिकार लोगों को समय पर राहत देना अब बेहद जरूरी हो गया है।

बढ़ते UPI फ्रॉड केस पर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख सख्त !
बढ़ते UPI फ्रॉड केस पर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख सख्त !

मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने UPI फ्रॉड रोकने और पीड़ितों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराने के लिए ठोस गाइडलाइंस बनाए जाने की मांग पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए हैं। कोर्ट ने इस मामले में वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर कोर्ट की चिंता

ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर कोर्ट की चिंता
ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर कोर्ट की चिंता

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी पर गहरी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि UPI जैसे डिजिटल भुगतान माध्यम आम जनता की रोजमर्रा की जरूरत बन चुके हैं, लेकिन इनके दुरुपयोग से लोगों का भरोसा डगमगा रहा है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मौजूदा सिस्टम में शिकायत दर्ज कराने और पैसे की रिकवरी की प्रक्रिया इतनी जटिल और धीमी है कि पीड़ित खुद को असहाय महसूस करता है।

याचिकाकर्ता ने बताई आपबीती

इस मामले में याचिकाकर्ता पंकज निगम ने अदालत को बताया कि फरवरी 2024 में ऑनलाइन किराये का फ्लैट तलाशने के दौरान उनसे 1.24 लाख रुपये की ठगी हो गई। उन्होंने बताया कि आरोपी ने खुद को प्रॉपर्टी डीलर बताकर UPI के जरिए पैसे ट्रांसफर करवाए। बाद में जब ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने साइबर क्राइम हेल्पलाइन और संबंधित थानों में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन न तो रकम वापस मिली और न ही आरोपियों की पहचान या कार्रवाई की कोई ठोस जानकारी दी गई।

पंकज निगम ने कोर्ट में कहा कि इस तरह के मामलों में आम नागरिक पूरी तरह असहाय हो जाता है। बैंक, पुलिस और UPI प्लेटफॉर्म एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहते हैं, जबकि पीड़ित महीनों तक न्याय का इंतजार करता रहता है।

याचिका में क्या मांग की गई?

याचिका में UPI फ्रॉड रोकने के लिए कई अहम सुझाव दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि फर्जी और अधूरे दस्तावेजों वाले बैंक अकाउंट्स के जरिए होने वाली ठगी को रोकने के लिए सिर्फ फुल KYC वाले बैंक अकाउंट को ही UPI से जोड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इससे फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी करने वालों पर लगाम लग सकेगी।

इसके अलावा, एक यूनिफाइड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म बनाने की मांग की गई है, जो साइबर क्राइम हेल्पलाइन को UPI ऐप्स, बैंकों, पेमेंट कंपनियों और टेलीकॉम ऑपरेटर्स से जोड़े। इसका मकसद यह है कि जैसे ही कोई फ्रॉड हो, पीड़ित एक ही प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कर सके और तुरंत कार्रवाई शुरू हो जाए।

SOP और ई-जीरो FIR की मांग

याचिका में यह भी कहा गया है कि 10 लाख रुपये तक के UPI फ्रॉड मामलों को ई-जीरो FIR सिस्टम में शामिल किया जाए, ताकि गंभीर मामलों में अपने-आप FIR दर्ज हो सके। इससे शुरुआती देरी खत्म होगी और जांच तेज हो पाएगी। साथ ही, अलग-अलग राज्यों के नियमों और प्रक्रियाओं के कारण जांच में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए पूरे देश में एक समान SOP लागू करने की मांग भी की गई है।

अगली सुनवाई पर टिकी नजर

दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई में इस पर विस्तार से विचार किया जाएगा। अदालत का रुख साफ संकेत देता है कि UPI फ्रॉड जैसे मामलों को अब हल्के में नहीं लिया जाएगा। अगर ठोस गाइडलाइंस और प्रभावी सिस्टम तैयार होते हैं, तो इससे न सिर्फ डिजिटल भुगतान व्यवस्था सुरक्षित होगी, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।

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