अगले साल होने होने वाले विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने अपनी रणनीतियों धार देना शुरू कर दिया है. लखनऊ पार्टी कार्यालय में मायावती की अध्यक्षता में बड़ी बैठक आयोजित हुई.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के माल एवेन्यू स्थित बहुजन समाज पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में रविवार 22 फरवरी को एक अहम ऑल इंडिया बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने की। इस बैठक को आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव यानी ‘मिशन-27’ की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक में पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, सर्वसमाज में बसपा के जनाधार को बढ़ाने और देश-प्रदेश के ताजा राजनीतिक घटनाक्रमों पर गहन चर्चा की गई। इसके साथ ही संसद में हाल के दिनों में देखने को मिले टकराव, गतिरोध और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों की भी समीक्षा की गई। बसपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि पार्टी का लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि संविधान के दायरे में रहकर सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के मिशन को आगे बढ़ाना है।
जनसमस्याओं और बेहतर माहौल पर जोर
बैठक में ज्वलंत जनसमस्याओं के समाधान और देश में बेहतर राजनीतिक व साम्प्रदायिक माहौल की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। मायावती ने कहा कि करोड़ों गरीब, मजदूर और मेहनतकश लोग अपने “थोड़े अच्छे दिन” के हकदार हैं और उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने का अधिकार उनके जीवनकाल में ही मिलना चाहिए। इसके लिए बसपा को और अधिक संगठित, अनुशासित और जनसरोकारों से जुड़ा रहना होगा।

पिछली बैठक के निर्देशों की समीक्षा
मायावती ने बैठक की शुरुआत 19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में हुई पिछली ऑल इंडिया बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों की राज्यवार प्रगति रिपोर्ट लेकर की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी और मूवमेंट के हित में दिए गए निर्देशों का ईमानदारी से पालन ही बसपा को मजबूत बना सकता है।
“बसपा जितनी मजबूत होगी, साजिशें उतनी बढ़ेंगी”
अपने संबोधन में मायावती ने कहा कि जैसे-जैसे बसपा मजबूत होती जाएगी, वैसे-वैसे विरोधियों के षड्यंत्र भी बढ़ेंगे। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बहुजन आत्म-सम्मान और स्वाभिमान के मिशन के खिलाफ साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडे अपनाए जाएंगे, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं को डटकर उनका मुकाबला करते हुए आगे बढ़ना होगा। उन्होंने सत्ता को “मास्टर चाबी” बताते हुए कहा कि अपने पैरों पर खड़े होने के लिए सत्ता प्राप्त करना जरूरी है।
बहुजन मिशन और मायावती का नेतृत्व
बैठक में इस बात को भी रेखांकित किया गया कि मायावती को आज भी देश के करोड़ों लोग बहुजन समाज के आत्म-सम्मान की प्रतीक के रूप में देखते हैं। उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी अंबेडकरवादी उनसे उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जैसे उन्होंने अपने शासनकाल में संविधान को सही ढंग से लागू कर बहुजन समाज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए, वैसे ही आगे भी यह मिशन जारी रहेगा।
चंदे और पूंजीपतियों पर सख्त रुख
मायावती ने बड़ी पूंजी और धन्नासेठों पर निर्भर रहने वाली पार्टियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ऐसी पार्टियों का भविष्य देश-दुनिया के सामने है। बसपा अपने लोगों के खून-पसीने की कमाई पर निर्भर है और चुनावी बॉन्ड या ट्रस्ट जैसे संदिग्ध माध्यमों से मिलने वाले चंदों से पूरी तरह दूर है।
सरकारों की घटती विश्वसनीयता
मायावती ने कहा कि विरोधी दलों और उनकी सरकारों की कथनी और करनी में भारी अंतर है। गरीब, किसान और बहुजन विरोधी नीतियों तथा भ्रष्टाचार के कारण वे अपनी विश्वसनीयता तेजी से खो रही हैं। ऐसे में बसपा की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, क्योंकि पार्टी ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ और कानून के राज की अवधारणा के साथ लोगों की उम्मीद बनकर उभर रही है।
अंबेडकरवादियों से अपील
बैठक के अंत में मायावती ने अंबेडकरवादियों से आह्वान किया कि वे उनके नेतृत्व में तन-मन-धन से संघर्ष जारी रखें। साथ ही उन्होंने स्वार्थी और बिकाऊ मानसिकता वाले लोगों से सावधान रहने की भी अपील की।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रतिक्रिया
बैठक में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर मायावती ने कहा कि वैश्विक स्तर पर “कट-थ्रोट प्रतिस्पर्धा” ने शोषणकारी व्यवस्था को और गहरा किया है। ऐसे में भारत सरकार के सामने किसानों और बहुजनों के हितों की रक्षा की बड़ी चुनौती है।
कुल मिलाकर, यह बैठक साफ संकेत देती है कि बसपा मिशन-27 को लेकर पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुकी है और आने वाले समय में संगठनात्मक और राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी।
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