इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है। खासतौर पर भगवान नरसिंह के नाम का जप करने से शत्रुओं का नाश और भय से मुक्ति मिलती है। पूजा के बाद 108 नामों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सनातन धर्म के शास्त्रों में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाला बताया गया है। प्रत्येक माह आने वाली एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, लेकिन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। इस एकादशी को आमलकी एकादशी या कई स्थानों पर रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में शुक्रवार, 27 फरवरी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह तिथि भगवान विष्णु की विशेष भक्ति, साधना और आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया व्रत साधक के सभी पापों का नाश करता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व
आमलकी एकादशी का नाम आंवला (आमलकी) वृक्ष से जुड़ा है। पुराणों के अनुसार, आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना गया है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि जो व्यक्ति आमलकी एकादशी का व्रत रखकर विष्णु भक्ति करता है, उसे जीवन और मृत्यु के बंधनों से मुक्ति मिलती है।
यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी मानी जाती है जो आध्यात्मिक उन्नति, रोगों से मुक्ति और मानसिक शांति की कामना करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने से सहस्र गोदान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।
पूजा-विधि और व्रत नियम
आमलकी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर या पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और लक्ष्मी नारायण जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजा में पीले फूल, तुलसी दल, दीपक, धूप, फल और नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है। व्रती को दिनभर सात्विक आचरण रखना चाहिए और क्रोध, निंदा तथा असत्य से दूर रहना चाहिए।
भगवान नरसिंह के 108 नामों का जाप

शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि आमलकी एकादशी की पूजा के बाद भगवान नरसिंह के 108 नामों का जाप अवश्य करना चाहिए। भगवान नरसिंह, भगवान विष्णु के उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं। उनके नामों का जाप भय, नकारात्मक शक्तियों और बाधाओं से रक्षा करता है।
मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा भाव से 108 नामों का जाप करता है, उस पर श्रीहरि शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन की कठिनाइयों को दूर करते हैं। यह जाप विशेष रूप से संकट, रोग और मानसिक अशांति से ग्रस्त लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।
व्रत का पारण और फल
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में किया जाता है। पारण के समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान देना उत्तम माना गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत रखने से न केवल इस लोक में सुख-समृद्धि मिलती है, बल्कि परलोक में भी उत्तम गति प्राप्त होती है। यह व्रत भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, भक्ति और आत्मिक शुद्धता का संचार करता है।
कुल मिलाकर, 27 फरवरी 2026 को आने वाली आमलकी एकादशी भगवान विष्णु की कृपा पाने का एक अत्यंत शुभ अवसर है। श्रद्धा, नियम और भक्ति भाव से किया गया यह व्रत साधक के जीवन को धर्म, शांति और आनंद से भर देता है।
