बिना जिम, बिना पसीना! रोज़मर्रा की आदतों से कैसे रहें हेल्दी !

बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं, जिनका मन तो एक्सरसाइज करने का होता है, लेकिन टाइम या मूड न होने के कारण वे नहीं कर पाते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि उनको क्या करना चाहिए.

अक्सर जब फिट रहने की बात होती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले जिम, ट्रेडमिल, भारी-भरकम एक्सरसाइज या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट क्लास की तस्वीर उभरती है। आम धारणा यही है कि अगर रोज पसीना नहीं बहाया, तो फिट रहना नामुमकिन है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास न तो इतना वक्त होता है और न ही हर दिन एक्सरसाइज करने का मन। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बिना जिम जाए, बिना लंबा वर्कआउट किए भी फिट रहा जा सकता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स का जवाब है—हां, बिल्कुल।

बिना जिम, बिना पसीना! रोज़मर्रा की आदतों से कैसे रहें हेल्दी !
बिना जिम, बिना पसीना! रोज़मर्रा की आदतों से कैसे रहें हेल्दी !

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

हेल्थ रिसर्चर जो ब्लॉजेट मानती हैं कि फिटनेस के लिए रोजाना घंटों की एक्सरसाइज जरूरी नहीं होती। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट, एक्सरसाइज एंड हेल्थ में सीनियर रिसर्च फेलो ब्लॉजेट के मुताबिक, दिनभर में किए गए छोटे-छोटे शारीरिक मूवमेंट भी सेहत पर बड़ा असर डाल सकते हैं। उनका कहना है कि अगर रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ा-सा भी अतिरिक्त प्रयास जोड़ा जाए, तो शरीर को उसका फायदा मिलने लगता है।

ब्लॉजेट बताती हैं कि फिटनेस सिर्फ जिम तक सीमित नहीं है। असल मायने में फिट रहने का मतलब है शरीर को नियमित रूप से हिलाना-डुलाना। जरूरी नहीं कि हर एक्टिविटी पसीना छुड़ा देने वाली हो, बल्कि लगातार एक्टिव बने रहना ज्यादा मायने रखता है।

खुद को फिट रखने के मौके तलाशें

खुद को फिट रखने के मौके तलाशें
खुद को फिट रखने के मौके तलाशें

एक्सपर्ट्स के अनुसार, फिट रहने का सबसे आसान तरीका है अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे मौके तलाशना। जैसे लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना। पूरा 10 या 12 फ्लोर चढ़ना जरूरी नहीं, आप सिर्फ दो फ्लोर सीढ़ियां चढ़िए और फिर लिफ्ट ले लीजिए। इसी तरह अगर आप बस या मेट्रो से सफर करते हैं, तो एक स्टॉप पहले उतरकर बाकी दूरी तेज चाल में चल सकते हैं।

अगर आप रोज टहलते हैं, तो बीच-बीच में रफ्तार बढ़ाने की कोशिश करें। उदाहरण के तौर पर, दो लाइट पोस्ट या खंभों के बीच थोड़ी तेज चाल से चलना। रिसर्च बताती है कि दिन में कुछ बार एक-दो मिनट की तेज गतिविधि भी दिल की सेहत को बेहतर बनाने में मदद करती है।

सिर्फ जिम पर निर्भर रहना सही नहीं

ब्लॉजेट का मानना है कि हफ्ते में एक-दो बार जिम जाना या कभी-कभार खेलकूद करना अच्छी आदत है, लेकिन केवल इसी पर निर्भर रहना फिटनेस के लिहाज से काफी नहीं है। बहुत से लोग सुबह या शाम को वर्कआउट तो करते हैं, लेकिन दिन का ज्यादातर वक्त कुर्सी या सोफे पर बैठे रहते हैं। ऐसे लोगों के लिए असली समस्या जिम न जाना नहीं, बल्कि लंबे समय तक बिना हिले बैठे रहना है।

सिर्फ जिम पर निर्भर रहना सही नहीं
सिर्फ जिम पर निर्भर रहना सही नहीं

एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि लगातार लंबे समय तक बैठना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है, भले ही आप रोज एक्सरसाइज करते हों। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि काम के दौरान बीच-बीच में उठें, थोड़ा टहलें और शरीर को मूवमेंट दें।

छोटे बदलाव, बड़ा असर

दफ्तर में काम करते हुए हर आधे या एक घंटे में कुर्सी से उठना, लंच ब्रेक में 10-15 मिनट की वॉक करना, फोन कॉल के दौरान चलते-फिरते बात करना जैसे छोटे बदलाव भी शरीर को एक्टिव रखने में मदद करते हैं। घर पर झाड़ू-पोंछा लगाना, सामान उठाना, बच्चों के साथ खेलना या किचन में काम करना भी फिटनेस का हिस्सा हो सकता है।

फिटनेस को देखने का नजरिया बदलिए

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिटनेस को लेकर हमारा नजरिया बदलने की जरूरत है। सिर्फ यह गिनना कि आपने कितनी एक्सरसाइज की, उतना जरूरी नहीं है, जितना यह देखना कि आपने दिनभर में कितना समय बिल्कुल बिना हिले बिताया। अगर इस “निष्क्रिय समय” को कम किया जाए, तो सेहत में अपने आप सुधार दिखने लगता है।

कोई एक तय नियम नहीं है कि रोज कितनी एक्टिविटी काफी है, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि जितना ज्यादा शरीर को हिलाया जाएगा, उतना ही बेहतर असर सेहत पर पड़ेगा। वक्त न हो या मन न करे, तब भी फिट रहना नामुमकिन नहीं—बस जरूरत है थोड़ी समझदारी और रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव की।

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