लुलु मॉल के मैनेजर पर एक युवती ने रेप, ब्लैकमेलिंग और मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का बहुचर्चित लुलु मॉल एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मॉल के एक सीनियर मैनेजर पर बलात्कार और ब्लैकमेलिंग का सनसनीखेज आरोप लगा है, जिसने न केवल मॉल की छवि को प्रभावित किया है बल्कि कानून-व्यवस्था और कार्यस्थल की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़िता की शिकायत से हड़कंप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लखनऊ की एक युवती ने लुलु मॉल के एक सीनियर मैनेजर के खिलाफ हजरतगंज थाने में गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसे झूठे प्रेमजाल में फंसाकर दुष्कर्म किया, उसके निजी पलों के वीडियो बनाए और बाद में उन्हें वायरल करने की धमकी देकर लगातार ब्लैकमेल करता रहा।
पीड़िता के अनुसार, मॉल में नौकरी के दौरान उसकी मुलाकात आरोपी से हुई थी। शुरुआती दोस्ती धीरे-धीरे नजदीकियों में बदली और आरोपी ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाए। बाद में जब युवती ने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी मुकर गया और उसे ब्लैकमेल करने लगा।
पुलिस का बयान
हजरतगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक ने पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 506 (धमकी देना) और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा चुका है और जांच प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।
पुलिस ने यह भी कहा है कि आरोपी को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा और मोबाइल, लैपटॉप आदि डिजिटल सबूतों की भी जांच की जाएगी ताकि पीड़िता के दावों की पुष्टि की जा सके।
लुलु मॉल प्रशासन की प्रतिक्रिया

मामले के सामने आने के बाद लुलु मॉल प्रशासन ने खुद को घटना से दूरी बनाते हुए बयान जारी किया है। उनके अनुसार,
“यह एक व्यक्तिगत मामला है जो दो कर्मचारियों के बीच हुआ है। मॉल प्रशासन सभी कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और गरिमामय कार्यस्थल सुनिश्चित करता है। कानून के तहत जो भी कार्रवाई होगी, प्रशासन उसमें सहयोग करेगा।”
हालांकि इस बयान के बाद भी सोशल मीडिया पर मॉल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं, विशेषकर तब जब पहले भी लुलु मॉल धार्मिक विवादों और सुरक्षात्मक चूकों को लेकर सुर्खियों में रह चुका है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
घटना के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि “राजधानी में स्थित सबसे बड़े मॉल में यदि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा नहीं है, तो सरकार किस बात का सुशासन दिखा रही है?”
महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और लखनऊ पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, पीड़िता को मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।
सोशल मीडिया पर आक्रोश
घटना के वायरल होते ही ट्विटर और इंस्टाग्राम पर #LuluMallControversy और #JusticeForVictim जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूजर्स ने मॉल के बहिष्कार की मांग की है, तो वहीं कुछ लोगों ने आरोपी के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
निष्कर्ष
लखनऊ के प्रतिष्ठित लुलु मॉल में हुआ यह ताजा विवाद केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन गया है।
जहां एक ओर पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है, वहीं दूसरी ओर यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या देश के नामी कॉर्पोरेट संस्थानों में अब भी महिलाओं को पूरी सुरक्षा और सम्मान मिल पा रहा है?
आने वाले दिनों में इस केस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।
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