भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जगदीप धनखड़ के लिए X पर ट्वीट किया है।
राज्यसभा के अध्यक्ष एवं उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार की शाम को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने त्यागपत्र में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही है। उनके इस कदम से हर कोई हैरान है और सभी दलों के नेता और सांसद धनखड़ की उत्तम स्वास्थ्य की कामना कर रहे हैं। अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद पहली प्रतिक्रिया दी है।

पीएम मोदी की पहली प्रतिक्रिया
पीएम नरेंद्र मोदी ने जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद मंगलवार को X पर ट्वीट किया है। पीएम मोदी ने ट्वीट में कहा- “श्री जगदीप धनखड़ जी को भारत के उपराष्ट्रपति सहित कई भूमिकाओं में देश की सेवा करने का अवसर मिला है। मैं उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।”
धनखड़ का इस्तीफा मंजूर
जानकारी के मुताबिक, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा मंगलवार को मंजूर कर लिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने संविधान के अनुच्छेद 67ए के तहत तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की सूचना दे दी है।
जगदीप धनखड़ के राजनीतिक जीवन के बारे में प्रमुख बातें

- भाजपा, कांग्रेस और जनता दल से जुड़े रह चुके।
- 1989 से 1991 तक राजस्थान के झुंझुनू लोकसभा सीट से सांसद रहे।
- 1993 से 1998 तक राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे।
- 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे।
- 2022 से 2025 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे।
जवाबी प्रतिक्रियाओं एवं राजनीतिक हलचल
1. स्वास्थ्य पर ही केंद्रित
मोदी ने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से केवल “भली‑भाँति स्वास्थ्य की कामना” पर ध्यान केंद्रित रखा। इससे यह संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार ने धनखड़ के स्वास्थ्य को ईमानदारी से प्राथमिकता देते हुए उनके इस्तीफे को वैध और सम्मानजनक समझा है।
2. तत्काल राजनीतिक संतुलन
धनखड़ के इस्तीफ़े के समय—21 जुलाई, प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया एक त्वरित राजनीतिक संदेश भी थी: “संसद की प्रक्रिया स्थिर रहेगी, कोई संकट नहीं।” यह संदेश विपक्ष की अटकलों को शांत करने की कोशिश जैसा था।
3. विपक्ष की आलोचना और परोक्ष चुनौती
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि स्वास्थ्य का हवाला केवल औपचारिक बहाना हो सकता है, और उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को क्यों नहीं रोक पाया ।
वहीं बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने विपक्षी आरोपों को खारिज किया और कांग्रेस के साजिशपूर्ण आरोपों के जवाब में कहा कि यदि स्वास्थ्य सचमुच समस्या थी, तो उस पर राजनीति करना उचित नहीं है।
इस्तीफा: स्वास्थ्य या राजनीति?
जब पीएम मोदी स्वास्थ्य को प्रमुख कारण बताते हैं, तो एक प्रकार से वह इसे संवेदनशील और निजी मामला बना कर देख रहे हैं। लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक संकेत मान रहा है और प्रधानमंत्री की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। ऐसे में यह प्रतिध्वनि राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनी हुई है।
जयराम रमेश ने सार्वजनिक रूप से कहा कि मोदी को धनखड़ को मनाने की कोशिश करनी चाहिए—“राष्ट्रहित में” । यह विपक्ष की उस लाइन को दर्शाता है, जिसमें कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री ‘वास्तविक कारण’ जानते हैं।
निष्कर्ष
पीएम मोदी की पहली प्रतिक्रिया स्पष्ट, संयमित और सम्मानजनक रही—उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी बातें कहीं और धनखड़ के योगदान की सराहना की। इससे संसद में क्रमबद्धता बनी। लेकिन विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इसे पर्याप्त नहीं मान रहा और सवाल उठा रहा है कि प्रधानमंत्री ‘राष्ट्रहित में’ धनखड़ को रोक सकते थे। आने वाले दिनों में नए उपराष्ट्रपति के चुनाव, संसदीय बहस और विपक्ष‑सरकार गतिरोध इस परिदृश्य को और जटिल बना सकते हैं।