थरूर के बाद अब मनीष तिवारी भी कांग्रेस से नाराज?

शशि थरूर और कांग्रेस के बीच नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। इस बीच अब कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी कांग्रेस से नाराजगी जताई है। दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर पर बहस को लेकर कांग्रेस की लिस्ट में इन दोनों नेताओं के नाम बाहर कर दिए गए हैं। इसके बाद मनीष तिवारी ने एक पोस्ट भी किया है।

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने हाल ही में एक ट्वीट कर पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जाहिर की है। यह नाराजगी तब सामने आई जब पार्टी ने लोकसभा में होने वाली एक अहम बहस के लिए अपने वक्ताओं की सूची में मनीष तिवारी का नाम शामिल नहीं किया। तिवारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “भारत की बात सुनाता हूं…”, जो उनके राजनीतिक अनुभव और संसद में योगदान के बावजूद उन्हें नजरअंदाज किए जाने पर एक कटाक्ष माना जा रहा है।

थरूर के बाद अब मनीष तिवारी भी कांग्रेस से नाराज?
थरूर के बाद अब मनीष तिवारी भी कांग्रेस से नाराज?

नाराजगी का कारण

28 जुलाई को लोकसभा में एक महत्त्वपूर्ण बहस प्रस्तावित थी जिसमें केंद्र सरकार की नीतियों और “भारत” बनाम “इंडिया” नामकरण पर भी चर्चा होने वाली थी। कांग्रेस ने इस बहस के लिए अपने प्रमुख वक्ताओं की सूची जारी की, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, शशि थरूर, गौरव गोगोई और कुछ अन्य नेताओं के नाम शामिल थे। लेकिन मनीष तिवारी, जो न सिर्फ अनुभवी सांसद हैं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक विषयों पर गहरी समझ रखते हैं, उनका नाम इस सूची में नहीं था। इस पर उन्होंने अप्रत्यक्ष तौर पर नाराजगी जाहिर की।

मनीष तिवारी का ट्वीट

मनीष तिवारी ने ट्वीट में लिखा:

“मैं 2009 से संसद में हूं। मैंने भारत के कई संवेदनशील मुद्दों पर आवाज़ उठाई है। लेकिन शायद अब मेरी बात सुनी नहीं जाती। फिर भी मैं भारत की बात सुनाता हूं…”

यह बयान न केवल उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया दर्शाता है बल्कि यह भी इंगित करता है कि पार्टी के अंदर वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा का मुद्दा अब सतह पर आ रहा है।

शशि थरूर की नाराजगी पहले ही सामने आ चुकी

शशि थरूर की नाराजगी पहले ही सामने आ चुकी
शशि थरूर की नाराजगी पहले ही सामने आ चुकी

इससे पहले शशि थरूर भी केरल में कांग्रेस के कुछ फैसलों से असहमति जताते हुए खुले मंच से नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने संकेत दिए थे कि पार्टी के अंदर संवाद और विचार-विमर्श का अभाव है और अनुभवी नेताओं की राय को कम महत्व दिया जा रहा है।

पार्टी के अंदर असंतोष?

मनीष तिवारी और शशि थरूर जैसे नेताओं की नाराजगी से यह सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस पार्टी में वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार किया जा रहा है? कई जानकार मानते हैं कि पार्टी नेतृत्व अपने युवा चेहरों और तय रणनीतिक चेहरों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है, जबकि अनुभवी और नीतिगत विषयों में माहिर नेताओं को मंच पर कम मौका दिया जा रहा है।

क्या यह ‘G-23’ की गूंज है?

गौरतलब है कि मनीष तिवारी और शशि थरूर दोनों ही कांग्रेस के उस ‘G-23’ समूह का हिस्सा रह चुके हैं, जिसने 2020 में सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व में बदलाव की मांग की थी। तब से इन नेताओं और नेतृत्व के बीच संबंधों में कुछ दूरी देखने को मिली है।

पार्टी का रुख

अब तक कांग्रेस पार्टी की ओर से मनीष तिवारी की टिप्पणी पर कोई औपचारिक बयान नहीं आया है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि डिबेट के लिए वक्ताओं का चयन रणनीति और विषयों की प्राथमिकता के आधार पर होता है, न कि किसी की वरिष्ठता के हिसाब से।

निष्कर्ष

मनीष तिवारी का यह सार्वजनिक बयान कांग्रेस पार्टी में भीतर ही भीतर चल रही खींचतान को एक बार फिर उजागर करता है। जहां एक ओर पार्टी खुद को 2024 की चुनावी लड़ाई के लिए तैयार कर रही है, वहीं अंदरूनी असंतोष और वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी इसके लिए चुनौती बन सकती है। देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे को कैसे संभालता है और क्या वरिष्ठ नेताओं को उचित मंच और सम्मान दिया जाता है।

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