EPIC नंबर फर्जीवाड़ा! तेजस्वी यादव की दो वोटर ID पर घिरीं मुश्किलें !

तेजस्वी यादव ने शनिवार को दावा किया कि उनका नाम वोटर लिस्ट से काट दिया गया है। इस दावे के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि तेजस्वी का नाम वोटर लिस्ट में मतदान केंद्र संख्या 204, क्रमांक 416 पर दर्ज है। चुनाव आयोग ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस बार मामला है EPIC (Electors Photo Identity Card) नंबर फर्जीवाड़े का, जिसमें तेजस्वी यादव के नाम पर दो अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र पाए गए हैं। दोनों वोटर ID में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख है, जिससे मामला गंभीर हो गया है। अब इस पूरे प्रकरण की जांच चुनाव आयोग ने शुरू कर दी है।

EPIC नंबर फर्जीवाड़ा! तेजस्वी यादव की दो वोटर ID पर घिरीं मुश्किलें !
EPIC नंबर फर्जीवाड़ा! तेजस्वी यादव की दो वोटर ID पर घिरीं मुश्किलें !

क्या है पूरा मामला?

तेजस्वी यादव के नाम पर दो अलग-अलग मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) दर्ज होने का मामला सामने आया है, जिनमें एक पटना जिले की राघोपुर विधानसभा सीट का है, जबकि दूसरा पटना सिटी क्षेत्र के किसी अन्य मतदान केंद्र से जुड़ा हुआ है। दोनों ही कार्ड पर नाम, जन्मतिथि और अन्य जानकारी एक जैसी है, लेकिन EPIC नंबर और पते में भिन्नता है।

इस तरह के दोहरे रजिस्ट्रेशन को लेकर चुनाव आयोग गंभीर हो गया है और उसने तुरंत संबंधित जिलों के निर्वाची पदाधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।

चुनाव आयोग की कार्रवाई

चुनाव आयोग की कार्रवाई
चुनाव आयोग की कार्रवाई

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इस संदर्भ में स्पष्ट किया कि प्रारंभिक जांच में दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में एक ही व्यक्ति के नाम से पंजीकरण पाया गया है। इस पर स्पष्टीकरण मांगते हुए संबंधित BLO (Booth Level Officer) और ERO (Electoral Registration Officer) से जवाब तलब किया गया है।

चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
“यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर दो जगहों पर मतदाता के रूप में पंजीकृत होता है, तो यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951 के तहत दंडनीय अपराध है। मामले की जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”

राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए तेजस्वी यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेता नित्यानंद राय ने कहा,
“अगर विपक्ष के बड़े नेता ही चुनावी प्रक्रिया को धता बता रहे हैं, तो आम जनता क्या उम्मीद करे? यह लोकतंत्र के लिए घातक है। तेजस्वी यादव को तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए।”

वहीं, राजद की ओर से इस मामले पर सफाई दी गई है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि
“यह तकनीकी त्रुटि हो सकती है, तेजस्वी यादव ने कभी जानबूझकर दो जगह से वोटर आईडी नहीं बनवाई। हम जांच में सहयोग करेंगे। यह सत्ताधारी दल द्वारा ध्यान भटकाने की साजिश भी हो सकती है।”

कानून की नजर में अपराध

यदि जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि तेजस्वी यादव ने दो मतदाता पहचान पत्र बनवाए हैं, तो उन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 17 और 31 के तहत सजा हो सकती है।

  • धारा 17: किसी व्यक्ति का दो स्थानों पर नाम दर्ज होना अपराध है।
  • धारा 31: जानबूझकर गलत जानकारी देना और धोखाधड़ी से नाम दर्ज कराना दंडनीय है, जिसमें एक वर्ष तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

इसके अलावा, यह नैतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी एक गंभीर मामला है, जिससे एक जनप्रतिनिधि की छवि पर असर पड़ सकता है।

जनता और विपक्ष की नजरें

इस मामले पर जनता के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाए हैं कि जब देश का चुनाव आयोग डिजिटल और बायोमेट्रिक सिस्टम के जरिए मतदाता सूची को मजबूत बना रहा है, तो ऐसे दोहरे पंजीकरण कैसे हो रहे हैं?

वहीं विपक्षी दलों ने भाजपा पर जांच को ‘राजनीतिक हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि “जांच होनी चाहिए लेकिन निष्पक्ष और कानून के अनुसार। भाजपा इस मुद्दे को चुनावी हथियार न बनाए।”

निष्कर्ष

तेजस्वी यादव के खिलाफ EPIC नंबर फर्जीवाड़े का यह मामला बेहद संवेदनशील बनता जा रहा है। चुनाव आयोग की जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी, लेकिन यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनावी पारदर्शिता को लेकर अब भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यदि दोष सिद्ध होता है, तो इसका असर न केवल तेजस्वी यादव की राजनीतिक छवि पर पड़ेगा, बल्कि आगामी चुनावों पर भी इसका प्रभाव देखा जा सकता है।

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