“नवाबों की नगरी में शुभांशु शुक्ला का शाही स्वागत, लखनऊ की गलियों में उमड़ा जनसैलाब”

शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष से धरती पर लौटने के बाद पहली बार अपने शहर लखनऊ पहुंचे हैं। यहां उनका शानदार स्वागत किया गया। परेड के दौरान लोगों ने सड़क के किनारे खड़े होकर उनका स्वागत किया।

लखनऊ, जिसे नवाबों की नगरी कहा जाता है, एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक परंपरा और मेहमाननवाज़ी का परिचय दिया। इस बार अवसर था युवा चेहरा और चर्चित व्यक्तित्व शुभांशु शुक्ला के भव्य स्वागत का। अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूकर लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का आज अपने शहर लखनऊ पहुंच चुके हैं, जहां उनका जोरदार स्वागत हो रहा है. एयरपोर्ट पर खुद उत्तर प्रदेश डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक कैप्टन शुभांशु शुक्ला के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे ,

"नवाबों की नगरी में शुभांशु शुक्ला का शाही स्वागत, लखनऊ की गलियों में उमड़ा जनसैलाब"
“नवाबों की नगरी में शुभांशु शुक्ला का शाही स्वागत, लखनऊ की गलियों में उमड़ा जनसैलाब”

शहर की गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक हर ओर उत्साह और उमंग का माहौल देखने को मिला। हजारों की संख्या में लोग अपने प्रिय नेता व समाजसेवी का स्वागत करने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। पूरे लखनऊ में इस अवसर को एक त्यौहार की तरह मनाया गया। दोपहर 12 बजे, शुभांशु चुनिंदा मीडिया से भी बातचीत करेंगे. 3 बजे, वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आधिकारिक आवास या कार्यालय में मुलाकात करेंगे. इसके बाद लोक भवन में उन्हें राज्य स्तरीय नागरिक सम्मान प्रदान किया जाएगा.

नवाबी अंदाज़ में हुआ स्वागत

लखनऊ की पहचान हमेशा से उसकी तहज़ीब और नवाबी अंदाज़ रही है। यही वजह रही कि जब शुभांशु शुक्ला का काफिला शहर में प्रवेश कर रहा था, तब जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई। ढोल-नगाड़ों और बैंडबाजे की गूंज से वातावरण गुंजायमान हो उठा। परंपरागत इत्र और गुलाब की पंखुड़ियों से सजे चौक-चौराहों ने पूरे माहौल को और भव्य बना दिया। कई जगहों पर लोगों ने सजावट कर ‘नवाबी स्वागत द्वार’ तैयार किए थे, जिनसे गुजरते ही शुभांशु शुक्ला का अभिनंदन किया गया।

जनता का उत्साह चरम पर

शहर के सभी वर्गों के लोग—युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे—सब अपने-अपने तरीके से स्वागत में शामिल हुए। महिलाएं थालियों में आरती सजाकर खड़ी थीं तो युवाओं ने मोटरसाइकिल रैलियां निकालकर अपने नेता का समर्थन जताया। कई स्थानों पर बच्चों ने हाथों में तिरंगा और शुभांशु शुक्ला के स्वागत बैनर लेकर नारों के साथ उनका अभिनंदन किया।

लखनऊ विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों के छात्र भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। उन्होंने अपने अंदाज़ में नारे लगाए—“लखनऊ का शेर, शुभांशु शुक्ला”। माहौल में जोश और उत्साह साफ झलक रहा था।

शुभांशु शुक्ला का संबोधन

शुभांशु शुक्ला का संबोधन
शुभांशु शुक्ला का संबोधन

लंबे इंतज़ार के बाद जब शुभांशु शुक्ला ने मंच संभाला, तो तालियों और नारों से पूरा मैदान गूंज उठा। उन्होंने सबसे पहले लखनऊवासियों को दिल से धन्यवाद दिया और कहा—
“नवाबों की इस नगरी ने हमेशा अपनापन दिया है। आज जो स्नेह और प्यार आप सबने दिया है, यह मेरे लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं। मैं वादा करता हूँ कि इस शहर और इसके लोगों की सेवा के लिए हमेशा समर्पित रहूँगा।”

उनके संबोधन में समाज सेवा, युवाओं के लिए अवसर और शहर के विकास की रूपरेखा पर खास जोर रहा। उन्होंने युवाओं को आगे बढ़ने और सकारात्मक योगदान देने का संदेश भी दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजा माहौल

स्वागत कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। कथक नृत्य, अवधी गीत और शायरी ने लखनऊ की परंपरा को जीवंत कर दिया। मशहूर कलाकारों ने भी मंच पर आकर अपनी प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने रंग-बिरंगे कपड़ों में पारंपरिक नृत्य कर सभी का दिल जीत लिया।

प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था

भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था की थी। पुलिस और स्वयंसेवक हर जगह तैनात रहे ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो सके। ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक मार्ग तय किए थे, जिससे शहरवासियों को अधिक परेशानी न हो।

निष्कर्ष

शुभांशु शुक्ला का यह नवाबी स्वागत लखनऊ की मेहमाननवाज़ी और संस्कृति की शानदार मिसाल बन गया। यह सिर्फ एक स्वागत नहीं था, बल्कि जनता और नेता के बीच गहरे संबंध का प्रमाण भी था। जिस उत्साह और श्रद्धा से लोगों ने उनका अभिनंदन किया, उससे साफ है कि लखनऊ के दिलों में उनके लिए विशेष स्थान है।

आखिर में, यह कहना गलत नहीं होगा कि लखनऊ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उसकी पहचान सिर्फ इमारतों या तहज़ीब से नहीं, बल्कि अपने लोगों के जज़्बे और अपनत्व से भी है। शुभांशु शुक्ला का स्वागत उसी जज़्बे का प्रतीक बन गया, जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।

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