“बिहार में एमके स्टालिन का वार: कहा– चुनाव आयोग बना रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कठपुतली”

मुजफ्फरपुर में ‘वोटर अधिकार रैली’ में शामिल हुए एम.के. स्टालिन ने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की दोस्ती सिर्फ एक राजनीतिक रिश्ता नहीं है, यह दो भाइयों का रिश्ता है।

बिहार की राजनीति में इन दिनों माहौल गरमाया हुआ है। विपक्षी नेताओं के तेवर तीखे हो चुके हैं और इसी कड़ी में द्रमुक (DMK) प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में चुनाव आयोग अपनी स्वतंत्रता खो चुका है और अब वह “रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कठपुतली” बनकर रह गया है। स्टालिन के इस बयान ने विपक्षी गठबंधन INDIA की एकजुटता और केंद्र सरकार के खिलाफ रणनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

"बिहार में एमके स्टालिन का वार: कहा– चुनाव आयोग बना रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कठपुतली"
“बिहार में एमके स्टालिन का वार: कहा– चुनाव आयोग बना रिमोट कंट्रोल से चलने वाली कठपुतली”

स्टालिन का आरोप

बिहार में आयोजित एक विपक्षी रैली को संबोधित करते हुए एम.के. स्टालिन ने कहा कि भारत का लोकतंत्र गंभीर खतरे में है। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार अपनी राजनीतिक सुविधा के हिसाब से संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल कर रही है। “चुनाव आयोग, जिसे लोकतंत्र का प्रहरी माना जाता है, अब उसकी स्वतंत्रता छिन गई है। उसे सिर्फ रिमोट कंट्रोल से चलाया जा रहा है और वह कठपुतली बन चुका है।”

स्टालिन का आरोप
स्टालिन का आरोप

उन्होंने आगे कहा कि जब-जब विपक्षी दल चुनाव में मजबूती से उतरते हैं, तब-तब नियमों और प्रक्रियाओं का इस्तेमाल उन्हें कमजोर करने के लिए किया जाता है।

विपक्षी गठबंधन को साधा संदेश

स्टालिन ने अपने भाषण में विपक्षी गठबंधन INDIA की एकजुटता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि “आज वक्त आ गया है कि हम सब मिलकर लोकतंत्र की रक्षा करें। अगर हम चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी।” उन्होंने बिहार की धरती से यह संदेश दिया कि दक्षिण से लेकर उत्तर तक विपक्षी दल एकजुट हैं और उनकी लड़ाई लोकतंत्र को बचाने की है।

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हों। बीते कुछ सालों में कई विपक्षी दलों ने आयोग के फैसलों और उसके कामकाज को लेकर असहमति जताई है। चाहे वह चुनावी आचार संहिता लागू करने का मामला हो या फिर सत्तारूढ़ दलों पर कार्रवाई करने का, आयोग पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं।

स्टालिन ने अपने भाषण में यह भी कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब चुनाव कराने वाली संस्था पूरी तरह से निष्पक्ष होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर जनता का विश्वास ही कमजोर हो गया तो फिर चुनाव की प्रक्रिया का क्या मतलब रह जाएगा?”

बिहार की राजनीतिक सरगर्मी

बिहार की धरती पर दिया गया स्टालिन का यह बयान खास मायने रखता है। यहां अगले चुनावों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और विपक्ष जनता के बीच यह संदेश देना चाहता है कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद नेता तेजस्वी यादव पहले ही कई बार केंद्र सरकार पर हमला बोल चुके हैं। अब स्टालिन के बयान ने विपक्ष की आवाज़ को और तेज़ कर दिया है।

बीजेपी का पलटवार

दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं ने स्टालिन के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। पार्टी के प्रवक्ता का कहना है कि विपक्ष केवल चुनाव से पहले सियासी फायदे के लिए संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था है और उसके ऊपर इस तरह के आरोप लगाना लोकतांत्रिक परंपराओं को ठेस पहुंचाना है।

जनता की प्रतिक्रिया

चुनावी मौसम में जनता भी इस बहस को गंभीरता से देख रही है। एक ओर लोग चाहते हैं कि चुनाव आयोग पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग से काम करे, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के आरोपों से यह बहस फिर से तेज हो गई है कि क्या संस्थाएं सच में राजनीतिक दबाव में काम कर रही हैं।

निष्कर्ष

एम.के. स्टालिन का यह बयान बिहार की राजनीति में नया तूफान ला सकता है। विपक्षी दल जहां इसे केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुटता का मुद्दा बना रहे हैं, वहीं बीजेपी इसे महज चुनावी सियासत बता रही है। लेकिन इतना तय है कि “चुनाव आयोग कठपुतली बन गया है” जैसा बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनेगा और देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर गहन चर्चा को जन्म देगा।

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