समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हरियाणा में आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या पर कहा कि ये गंभीर विषय है. जाति के आधार पर उसे अपमानित किया जा रहा है.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी ने माहौल गरमा दिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की हालिया रैली पर तीखा तंज कसा है। अखिलेश ने कहा कि “आज आकाश आनंद की जरूरत बसपा को नहीं, बल्कि बीजेपी को ज्यादा है।” उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है।

मायावती की रैली और बदला सियासी मूड

दरअसल, 9 अक्टूबर को लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी की बड़ी रैली हुई थी, जिसमें बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का रोडमैप पेश किया। इस रैली में मायावती ने बीजेपी की आलोचना करने के बजाय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “कांग्रेस और सपा दोनों ने दलितों और पिछड़ों को सिर्फ वोट बैंक समझा, लेकिन बसपा ने हमेशा उन्हें सम्मान दिया।”
इतना ही नहीं, मायावती ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तारीफ करते हुए कहा कि “योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में कुछ सुधार किए हैं।” उनके इस बयान ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी।
रैली में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपने भतीजे आकाश आनंद के नेतृत्व में एकजुट होने की अपील की और कहा कि “बसपा का भविष्य युवाओं के हाथ में है।”
अखिलेश यादव का पलटवार
बसपा रैली के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “अब लगता है कि आकाश आनंद की जरूरत बसपा को नहीं, बल्कि बीजेपी को ज्यादा है।”
अखिलेश का इशारा इस ओर था कि बसपा का रवैया अब बीजेपी के लिए मददगार साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि “मायावती जी का भाषण सुनकर लग रहा था कि वे विपक्ष की नहीं, बल्कि सत्ताधारी दल की भाषा बोल रही हैं।”
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि “उत्तर प्रदेश की जनता अब सब समझ चुकी है। बसपा का असली मकसद बीजेपी को फायदा पहुंचाना है। जब-जब चुनाव आते हैं, बसपा किसी न किसी तरह विपक्षी मतों को बांटने का काम करती है।”
बीजेपी और बसपा पर सवाल
अखिलेश के बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि समाजवादी पार्टी अब बसपा के रवैये को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है।
विश्लेषकों के अनुसार, मायावती का बीजेपी पर नरम रुख़ और सपा-कांग्रेस पर हमलावर रणनीति यह संकेत दे रही है कि बसपा एक “अलग लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी-सहायक भूमिका” में जा रही है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि बसपा के पिछले कुछ चुनावी फैसले भी बीजेपी को लाभ पहुंचाने वाले रहे हैं। विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनावों में बसपा के प्रत्याशी कई बार विपक्षी वोटों के बंटवारे का कारण बने।
आकाश आनंद की सक्रियता और सियासी चर्चा
बसपा सुप्रीमो मायावती के भतीजे आकाश आनंद इन दिनों लगातार राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। वे युवाओं को जोड़ने और सोशल मीडिया पर बसपा की छवि को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
मायावती ने रैली के दौरान उन्हें बसपा के भविष्य का चेहरा बताया और पार्टी कार्यकर्ताओं से उनका पूरा समर्थन करने की अपील की।
अखिलेश यादव ने इसी पर तंज कसते हुए कहा कि “बसपा का युवा चेहरा बनाकर बीजेपी को फायदा पहुंचाने की तैयारी हो रही है।”
उन्होंने कहा, “जब विपक्ष के मतदाताओं को भ्रमित करने का काम होता है, तब बीजेपी को मेहनत नहीं करनी पड़ती — क्योंकि बसपा उसके लिए रास्ता तैयार कर देती है।”
सियासी समीकरण और आगामी चुनाव
बिहार और उत्तर प्रदेश दोनों में विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच विपक्षी गठबंधन की मजबूती एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
जहां कांग्रेस और सपा विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं बसपा ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं होगी।
मायावती ने कहा था कि “बसपा अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी और किसी के सहारे सत्ता में नहीं आएगी।”
हालांकि, विपक्षी खेमे में यह धारणा बन रही है कि बसपा का यह कदम अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी को फायदा पहुंचा सकता है।
निष्कर्ष
अखिलेश यादव का यह बयान कि “आकाश आनंद की जरूरत बसपा को नहीं, बीजेपी को ज्यादा है” — उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया सियासी तंज बन गया है।
बसपा की रैली और मायावती के बयान ने जहां बीजेपी पर नरमी और विपक्ष पर हमले की नई बहस छेड़ दी है, वहीं अखिलेश यादव का पलटवार इस बहस को और गरमा गया है।
अब देखना यह होगा कि बसपा इस आरोप पर क्या प्रतिक्रिया देती है और आगामी विधानसभा चुनाव में यह सियासी समीकरण किस ओर झुकता है।
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