‘थम्मा’ रिव्यू: आयुष्मान खुराना का दमदार अभिनय, बाकी किरदारों ने भी किया कमाल !

आयुष्मान खुराना और रश्मिका मंदाना की ‘थामा’ सिनेमाघरों में आज रिलीज हो गई है। फिल्म की कहानी कैसी है और सितारों ने कैसा अभिनय किया है, ये जानने के लिए नीचे स्क्रोल करें और जानें फिल्म देखने लायक है या नहीं।

बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद अभिनेताओं में से एक आयुष्मान खुराना एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट आए हैं अपनी नई फिल्म ‘Thamma’ के साथ। इस फिल्म का निर्देशन अमित शर्मा ने किया है, जो पहले भी सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाते हैं।
‘थम्मा’ एक ऐसी कहानी है जो पारिवारिक रिश्तों, मानसिक संघर्ष और समाज की सोच के बीच उलझे इंसान की गहराई को बखूबी दिखाती है। फिल्म न केवल आयुष्मान की शानदार परफॉर्मेंस से सजी है, बल्कि इसके सह-कलाकारों ने भी अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया है।

‘थम्मा’ रिव्यू: आयुष्मान खुराना का दमदार अभिनय, बाकी किरदारों ने भी किया कमाल !
‘थम्मा’ रिव्यू: आयुष्मान खुराना का दमदार अभिनय, बाकी किरदारों ने भी किया कमाल !

कहानी: एक भावनात्मक सफर

‘थम्मा’ की कहानी अर्जुन मेहरा (आयुष्मान खुराना) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक सफल लेकिन भावनात्मक रूप से टूटा हुआ व्यक्ति है। वह अपनी दादी थम्मा (नीना गुप्ता) के बेहद करीब है। जब थम्मा की तबीयत अचानक बिगड़ती है और वह धीरे-धीरे याददाश्त खोने लगती हैं, तो अर्जुन का जीवन एक नए मोड़ पर पहुंच जाता है।
थम्मा अपने अतीत में फंसी हुई हैं, और अर्जुन उनकी यादों को जोड़ने की कोशिश करता है — लेकिन इस सफर में उसे अपने जीवन की अनकही सच्चाइयों का सामना करना पड़ता है।

कहानी परिवार, यादों, और समय के बदलाव के बीच बुनी गई है। यह फिल्म सिर्फ एक दादी और पोते की कहानी नहीं, बल्कि उन सभी रिश्तों की झलक है जो समय के साथ कमजोर होते हैं, लेकिन भावनाओं की डोर से अब भी जुड़े रहते हैं।


आयुष्मान खुराना की अदाकारी: फिल्म की रीढ़

आयुष्मान खुराना की अदाकारी: फिल्म की रीढ़
आयुष्मान खुराना की अदाकारी: फिल्म की रीढ़

आयुष्मान खुराना ने ‘थम्मा’ में एक बार फिर साबित किया है कि वह भावनाओं को बेहद बारीकी से पर्दे पर उतारने की कला रखते हैं। उनका किरदार अर्जुन एक ऐसे शख्स का प्रतीक है जो बाहर से मजबूत दिखता है, लेकिन अंदर से टूट चुका होता है।
उनके चेहरे की झलक, आंखों की नमी और संवादों की सादगी दर्शकों को भीतर तक छू जाती है। आयुष्मान की यह परफॉर्मेंस उनके करियर की बेहतरीन अदाकारी में गिनी जा सकती है।


नीना गुप्ता ने फिर जीता दिल

नीना गुप्ता ने फिर जीता दिल
नीना गुप्ता ने फिर जीता दिल

फिल्म की जान हैं नीना गुप्ता, जिन्होंने थम्मा का किरदार निभाया है। अल्ज़ाइमर से पीड़ित एक महिला की भूमिका में उन्होंने भावनाओं का ऐसा समंदर दिखाया है, जो दर्शकों को कई बार रुला देता है।
उनके संवाद कम हैं, लेकिन अभिव्यक्ति इतनी गहरी है कि हर फ्रेम में उनकी उपस्थिति महसूस होती है।
थम्मा और अर्जुन के बीच के दृश्य फिल्म का सबसे भावनात्मक हिस्सा हैं — जहां एक बूढ़ी दादी अपने पोते को पहचानने की कोशिश करती है, और पोता अपनी पहचान उसके दिल में वापस पाने की।


सह-कलाकारों की चमक

फिल्म में श्रेया धनवंतरी, गजराज राव, और राजेश शर्मा ने भी शानदार काम किया है। श्रेया ने अर्जुन की पत्नी के किरदार में संवेदनशीलता और व्यावहारिकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया है।
गजराज राव ने एक पारिवारिक डॉक्टर के रूप में कहानी में हल्का हास्य और गहराई दोनों जोड़े हैं।


निर्देशन और लेखन

निर्देशक अमित शर्मा ने ‘थम्मा’ को एक धीमी लेकिन असरदार गति में पेश किया है। फिल्म का टोन बेहद भावनात्मक है, लेकिन यह ओवरड्रामैटिक नहीं लगती।
लेखन टीम ने कहानी में छोटे-छोटे पलों को खूबसूरती से पिरोया है — जैसे थम्मा का पुराना गाना गुनगुनाना, या अर्जुन का पुराने फोटो एलबम के पन्ने पलटना।
यह दृश्य फिल्म को एक ‘इमोशनल रिलेटेबिलिटी’ देते हैं, जिससे दर्शक अपने परिवार की यादों में खो जाते हैं।


संगीत और सिनेमैटोग्राफी

फिल्म का संगीत अमित त्रिवेदी ने तैयार किया है, और उन्होंने एक बार फिर कमाल किया है।
गीत “यादें जो बाकी हैं” और “थम्मा बोले धीरे से” पहले से ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो चुके हैं।
सिनेमैटोग्राफी में प्रकाश झा ने लखनऊ और देहरादून की खूबसूरती को बेहद कोमल रंगों में दिखाया है, जो फिल्म के भावनात्मक टोन को और गहराई देता है।


कमज़ोरियां

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका धीमा नैरेटिव है। कुछ दर्शकों को यह लग सकता है कि कहानी बहुत देर तक एक ही भाव में टिकी रहती है।
दूसरे हाफ में कुछ दृश्य खिंचे हुए लगते हैं, लेकिन अभिनय और भावनाओं की गहराई इन कमियों को काफी हद तक संतुलित कर देती है।


फैसला: देखना बनता है

‘थम्मा’ एक ऐसी फिल्म है जो दिल को छूती है, रुलाती है, और सोचने पर मजबूर करती है।
यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जो परिवार, रिश्तों और यादों से जुड़ी कहानियों को महसूस करना पसंद करते हैं।

रेटिंग: ⭐️⭐️⭐️⭐️ (4/5)
देखने का कारण: आयुष्मान और नीना गुप्ता की दिल छू लेने वाली परफॉर्मेंस, भावनाओं से भरी कहानी, और सुंदर निर्देशन।

‘थम्मा’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, एक अनुभव है — जो आपको अपने दादा-दादी की याद दिला देगा।

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