सीएम योगी ने लखीमपुर-खीरी के गांव मुस्तफाबाद का नाम बदलने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लखीमपुर खीरी जिले के मुस्तफाबाद गांव का नाम बदलकर “कबीरधाम” करने का प्रस्ताव लाएगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर नाम परिवर्तन को लेकर बड़ा ऐलान किया है। इस बार मामला लखीमपुर-खीरी जिले के एक छोटे से गांव मुस्तफाबाद का है, जिसका नाम अब “कबीरधाम” रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा रविवार को एक जनसभा के दौरान की, जिसमें उन्होंने कहा कि यह निर्णय महान संत संत कबीरदास की शिक्षाओं और विचारों को सम्मान देने के लिए लिया जा रहा है।

इस घोषणा के साथ ही लखीमपुर खीरी का यह ऐतिहासिक गांव अब आधिकारिक तौर पर एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है।
जनसभा में किया बड़ा ऐलान
सीएम योगी रविवार को लखीमपुर खीरी के दौरे पर थे, जहां उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इसी दौरान उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा,
“राज्य सरकार मुस्तफाबाद गांव का नाम बदलकर ‘कबीरधाम’ करने का प्रस्ताव लाएगी। यह वही स्थान है जो सदियों पहले संत कबीर की तपोस्थली के रूप में जाना जाता था।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नाम परिवर्तन सिर्फ प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने का प्रयास है।
कबीरदास से जुड़ी है मुस्तफाबाद की ऐतिहासिक पहचान
लखीमपुर खीरी का मुस्तफाबाद गांव लंबे समय से संत कबीरदास की तपोस्थली माना जाता रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, संत कबीर यहां कुछ समय तक रहे थे और उन्होंने यहां पर प्रवचन दिए थे।
गांव के निवासियों का कहना है कि यहां आज भी कबीर से जुड़े कई स्थानीय लोककथाएँ और पुरानी निशानियाँ मौजूद हैं।
कई विद्वान और कबीरपंथी अनुयायी वर्षों से इस जगह का नाम “कबीरधाम” करने की मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी का यह निर्णय उसी मांग को पूरा करता है।
मुख्यमंत्री ने बताया नाम बदलने का उद्देश्य

सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार उन सभी ऐतिहासिक स्थलों और व्यक्तित्वों को उचित सम्मान देगी जिन्होंने भारत की संस्कृति, एकता और समाज सुधार में योगदान दिया है।
उन्होंने कहा,
“संत कबीरदास ने समाज को जात-पात से ऊपर उठकर एकता और समानता का संदेश दिया। उनका जीवन समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक है। इसलिए, उनके नाम पर इस स्थान को ‘कबीरधाम’ के रूप में जाना जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि नाम बदलने की प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं के बाद पूरी की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखेगी और फिर केंद्र को भेजा जाएगा।
स्थानीय लोगों में खुशी की लहर
इस घोषणा के बाद लखीमपुर खीरी और आसपास के गांवों में खुशी की लहर दौड़ गई। मुस्तफाबाद के निवासियों ने सीएम योगी के इस फैसले का स्वागत किया।
गांव के प्रधान राजकुमार वर्मा ने कहा,
“हम लोग कई सालों से इस मांग को उठा रहे थे कि हमारे गांव का नाम कबीरधाम रखा जाए। आखिरकार हमारी आवाज सरकार तक पहुंची और आज यह सपना पूरा हो रहा है।”
स्थानीय कबीरपंथी संगठनों ने भी मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया और कहा कि इससे युवाओं में संत कबीरदास के विचारों को समझने की नई प्रेरणा मिलेगी।
राज्य में पहले भी बदले गए कई नाम
सीएम योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में यह पहला मौका नहीं है जब किसी स्थान का नाम बदला गया हो।
इससे पहले इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज, फैजाबाद का नाम अयोध्या, और मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन किया जा चुका है।
योगी सरकार का कहना है कि नाम परिवर्तन का मकसद ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करना है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि सरकार को नाम बदलने की बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर ध्यान देना चाहिए।
सपा प्रवक्ता ने कहा,
“नाम बदलने से विकास नहीं होता। सरकार को यह बताना चाहिए कि गांव के युवाओं को रोजगार कब मिलेगा।”
इस पर भाजपा नेताओं का कहना है कि नाम परिवर्तन सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में कदम है।
कबीरधाम बनेगा पर्यटन केंद्र
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि मुस्तफाबाद, जिसे अब “कबीरधाम” कहा जाएगा, को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
यहां संत कबीरदास की स्मृति में एक भव्य स्मारक, कबीर साहित्य अध्ययन केंद्र, और पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही “कबीर मार्ग” नामक एक पर्यटन सर्किट शुरू किया जाएगा, जो उन सभी स्थानों को जोड़ेगा जो संत कबीर से जुड़े हैं — जैसे मगहर (संत कबीर की समाधि स्थल), काशी, और अब कबीरधाम।
निष्कर्ष
लखीमपुर खीरी के मुस्तफाबाद का नाम बदलकर “कबीरधाम” रखना न केवल एक प्रशासनिक फैसला है, बल्कि यह भारतीय संत परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का सम्मान भी है।
जहां एक ओर यह निर्णय राज्य की पहचान को मजबूत करता है, वहीं दूसरी ओर यह उन संतों की विरासत को पुनर्जीवित करता है जिनकी शिक्षाएं आज भी समाज में प्रासंगिक हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि “कबीरधाम” के नाम के साथ इस गांव का विकास भी उसी रफ्तार से हो पाएगा या नहीं — लेकिन इतना तय है कि यह गांव अब उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक नक्शे पर एक नई पहचान पा चुका है।
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