गुजरात-दिल्ली समेत देश के कई राज्यों से आठ ठगों को गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
राजस्थान के झालावाड़ जिले की पुलिस ने देश की अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश किया है। इस सनसनीखेज मामले में केंद्र सरकार की कई सामाजिक योजनाओं का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई थी। पुलिस ने इस मामले में एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी सरकारी अधिकारियों की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर सरकारी पोर्टलों से फर्जीवाड़ा करते थे।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई – ‘ऑपरेशन शटर डाउन’
झालावाड़ पुलिस ने इस अभियान को ‘ऑपरेशन शटर डाउन’ नाम दिया था। कई दिनों की गुप्त जांच और तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस को इस बड़े साइबर गैंग का पता चला। जांच में सामने आया कि यह गिरोह केंद्र सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं, खासकर पीएम किसान सम्मान निधि योजना, में सेंध लगाकर पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करता था। पुलिस ने जब छापेमारी की, तो इनके पास से देशभर के 1256 सरकारी अफसरों — जिनमें राजस्थान के कई कलेक्टर भी शामिल हैं — की लॉगिन आईडी और पासवर्ड बरामद किए गए।
मास्टरमाइंड बना सरकारी दफ्तर का ऑपरेटर
इस ठगी का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है मोहम्मद लईक, जो जयपुर स्थित पीएम किसान सम्मान निधि योजना के स्टेट नोडल ऑफिस में ऑपरेटर के पद पर काम करता था। लईक की पहुंच सरकारी पोर्टल और सिस्टम तक थी। इसी का फायदा उठाते हुए वह अन्य अफसरों के लॉगिन और पासवर्ड की जानकारी हासिल करता था और फिर यह जानकारी गिरोह के बाकी सदस्यों को दे देता था।
लईक और उसकी टीम इन लॉगिन्स का इस्तेमाल कर फर्जी खातों में पैसे ट्रांसफर करते थे। बताया जा रहा है कि इन फर्जी ट्रांजैक्शन्स के लिए करीब 4 हजार किराए के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, जिनके जरिये करोड़ों रुपये की हेराफेरी हुई।
गिरोह का नेटवर्क देशभर में फैला
झालावाड़ पुलिस के अनुसार, गिरोह के तार केवल राजस्थान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों से भी जुड़े हैं। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ था और सरकारी पोर्टलों में सेंध लगाने के लिए अलग-अलग साइबर तकनीकें अपनाई जा रही थीं।
गिरोह में शामिल आरोपी साइबर फ्रॉड में माहिर थे और सरकारी वेबसाइटों की कमजोरियों का फायदा उठाकर लॉगिन क्रेडेंशियल्स चुरा लेते थे। इसके बाद वे योजनाओं के लाभार्थियों की जगह अपने फर्जी खातों में पैसा डालते थे।
पुलिस ने जब्त किए अहम सबूत
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई लैपटॉप, मोबाइल, पेन ड्राइव, डेबिट कार्ड और पासबुक बरामद की हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि ठगों ने अलग-अलग राज्यों के सरकारी पोर्टलों में घुसपैठ की थी और कई योजनाओं के रिकॉर्ड तक पहुंच बना ली थी।
झालावाड़ के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस मामले में केंद्र सरकार के आईटी विभाग और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है। सभी सरकारी पोर्टलों के पासवर्ड तुरंत बदलने और सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगे की जांच जारी
गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि और कौन-कौन लोग इस नेटवर्क में शामिल हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि ठगी की रकम का एक हिस्सा क्रिप्टो करेंसी और डिजिटल वॉलेट्स के जरिए विदेशों में ट्रांसफर किया गया।
पुलिस ने कहा है कि इस साइबर घोटाले में कई और नाम सामने आ सकते हैं। सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और डेटा लीक के इस मामले ने पूरे सिस्टम की साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
झालावाड़ पुलिस के इस खुलासे ने पूरे देश को हिला दिया है, और अब केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर इस मामले की गहराई से जांच कर रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
Also Read :
दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा पर एसिड अटैक, कॉलेज के पास वारदात से हड़कंप !