एनडीए ने बिहार चुनाव को लेकर अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इसे संकल्प पत्र का नाम दिया गया है। अपने संकल्प पत्र में एनडीए ने पंचामृत गारंटी की भी बात कही है। आइये जानते हैं कि पंचामृत गारंटी क्या है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनज़र एनडीए ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने संयुक्त रूप से इस घोषणा पत्र को जारी किया। एनडीए ने इस बार अपने संकल्प पत्र को ‘पंचामृत गारंटी’ का नाम दिया है, जिसे गठबंधन के विकास और जनकल्याण का प्रतीक बताया जा रहा है। इस संकल्प पत्र में रोजगार, महिला सशक्तिकरण, कृषि, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़े वादे किए गए हैं।

एनडीए के नेताओं का कहना है कि यह ‘पंचामृत गारंटी’ बिहार को आत्मनिर्भर और विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि “हमारा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बिहार को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है। यह संकल्प पत्र सिर्फ वादों का दस्तावेज नहीं, बल्कि विकास के नए अध्याय की शुरुआत है।”
क्या है ‘पंचामृत गारंटी’?

एनडीए के संकल्प पत्र में शामिल ‘पंचामृत गारंटी’ पांच प्रमुख वादों पर आधारित है —
- रोजगार और उद्यमिता गारंटी: एनडीए ने वादा किया है कि अगले पांच सालों में राज्य में 1 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे। इसमें सरकारी नौकरियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जाएगा।
- महिला सशक्तिकरण गारंटी: महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए विशेष योजनाएं लागू करने की घोषणा की गई है। विधवा पेंशन को ₹1100 से बढ़ाकर ₹1500 करने और महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता देने का वादा किया गया है।
- कृषि और किसान कल्याण गारंटी: किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य के साथ फसलों की खरीद के लिए नई व्यवस्था, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और फसल बीमा योजना के सशक्त क्रियान्वयन का वादा किया गया है।
- शिक्षा और कौशल विकास गारंटी: युवाओं को रोजगार के लिए सक्षम बनाने हेतु नई टेक्निकल यूनिवर्सिटीज़, पॉलीटेक्निक कॉलेज और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (ITI) की स्थापना की जाएगी।
- बुनियादी ढांचा और सुशासन गारंटी: सड़कों, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नीतीश कुमार ने कहा कि “हर गांव तक चौड़ी सड़कें, हर घर में बिजली और हर नागरिक तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना हमारा वादा है।”
एनडीए नेताओं के बयान
घोषणापत्र जारी करते समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “हमने पहले भी बिहार को पिछड़ेपन से निकालकर विकास की राह पर लाया है। ‘पंचामृत गारंटी’ हमारी नई पीढ़ी को बेहतर भविष्य देने का खाका है।”
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि “महागठबंधन केवल वादे करता है, लेकिन एनडीए ने जो कहा है, उसे पूरा किया है। यह घोषणापत्र बिहार के हर वर्ग के लिए विकास का रोडमैप है।”
वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि “एनडीए का यह संकल्प पत्र अमृत की तरह काम करेगा — जो गठबंधन को मजबूत करेगा और बिहार को आत्मनिर्भर बनाएगा।”
महागठबंधन पर निशाना
घोषणापत्र जारी करते समय एनडीए नेताओं ने महागठबंधन पर भी निशाना साधा। नीतीश कुमार ने कहा कि “जिन लोगों ने बिहार को अराजकता की ओर धकेला, वे आज फिर सपने दिखा रहे हैं। जनता जानती है कि किसने राज्य को ‘गुंडाराज’ से निकालकर विकास की राह पर लाया।”
जनता की उम्मीदें और राजनीतिक प्रभाव
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ‘पंचामृत गारंटी’ एनडीए की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है। यह घोषणापत्र युवाओं और महिलाओं को साधने का प्रयास है, क्योंकि यही वर्ग चुनावी समीकरण को निर्णायक रूप से प्रभावित करता है। दूसरी ओर, विपक्ष इसे “वादों की झड़ी” बताते हुए कह रहा है कि एनडीए अपने पुराने वादे भी पूरे नहीं कर पाया।
हालांकि, जनता के बीच इस घोषणापत्र को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। ग्रामीण इलाकों में रोजगार और किसान कल्याण के वादे चर्चा में हैं, जबकि शहरी मतदाता बुनियादी ढांचे और शिक्षा संबंधी योजनाओं को लेकर उत्साहित हैं।
एनडीए का दावा है कि ‘पंचामृत गारंटी’ बिहार को विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता के नए दौर में ले जाएगी। अब देखना यह है कि जनता इन वादों को कितना भरोसेमंद मानती है और क्या यह संकल्प पत्र एनडीए के लिए चुनावी जीत का अमृत साबित होता है।
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