महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के नेता अबू असीम आजमी ने बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनावों में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हलाल सर्टिफिकेट और अखिलेश यादव पर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की। आजमी ने कांग्रेस और अन्य पार्टियों पर भी हमला बोला।
महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष अबू असीम आजमी ने शुक्रवार को एक बड़ा राजनीतिक ऐलान किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी आगामी बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगरपालिका) और स्थानीय निकाय चुनावों में किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। आजमी ने साफ कहा कि सपा महाराष्ट्र और मुंबई में अकेले मैदान में उतरेगी, और जनता के मुद्दों पर खुद लड़ाई लड़ेगी।

सपा का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अबू आजमी ने कहा, “हमने फैसला किया है कि समाजवादी पार्टी अब किसी के सहारे नहीं चलेगी। न कांग्रेस के साथ, न एनसीपी के साथ और न ही किसी अन्य दल के साथ गठबंधन किया जाएगा। हमने देखा है कि गठबंधन के नाम पर कई बार हमारे मुद्दों को दरकिनार कर दिया जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हम जनता के बीच जाकर अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे।”
उन्होंने कहा कि सपा की प्राथमिकता गरीबों, मजदूरों, अल्पसंख्यकों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ना है। “हम उन लोगों की आवाज बनेंगे जिन्हें कोई सुनने वाला नहीं है। चाहे महंगाई हो, बेरोजगारी हो या स्थानीय निकायों की भ्रष्ट व्यवस्था — सपा इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी,” आजमी ने कहा।
योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला

अबू आजमी ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि योगी का हालिया बयान नफरत फैलाने वाला और सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला है।
दरअसल, योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में बिहार के सिवान में चुनावी सभा के दौरान हलाल सर्टिफिकेट और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर कटाक्ष किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आजमी ने कहा,
“योगी आदित्यनाथ को विकास की बात करनी चाहिए, न कि नफरत फैलाने वाली राजनीति। हलाल सर्टिफिकेट पर बयान देकर वे लोगों के बीच धार्मिक तनाव पैदा करना चाहते हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत जैसे देश में जहां सभी धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं, वहां ऐसे बयान समाज को बांटने का काम करते हैं।”
आजमी ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ को यह समझना चाहिए कि “लोग अब नफरत नहीं, रोजगार और शिक्षा चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि “यदि भाजपा वास्तव में जनता की सेवा करना चाहती है, तो उसे किसानों की कर्जमाफी, युवाओं को रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए, न कि चुनावी बयानबाजी पर।”
कांग्रेस गठबंधन से दूरी क्यों?
अबू आजमी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन से दूरी बनाने के फैसले की वजह भी बताई। उन्होंने कहा कि सपा को कई बार कांग्रेस के साथ गठबंधन से नुकसान हुआ है।
“कांग्रेस ने हमेशा छोटे दलों को कमजोर करने की कोशिश की है। हमने उत्तर प्रदेश में भी यह देखा और अब महाराष्ट्र में भी यही कोशिशें हो रही हैं। लेकिन समाजवादी पार्टी अब किसी की बी-टीम नहीं बनेगी,” आजमी ने कहा।
उन्होंने दावा किया कि सपा की जड़ें मुंबई और महाराष्ट्र के कई इलाकों में मजबूत हैं, खासकर मुस्लिम और पिछड़े वर्गों में। “हम स्थानीय निकाय चुनावों में अपने उम्मीदवारों को पूरी ताकत से उतारेंगे। यह चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि सम्मान और विचारधारा की लड़ाई है,” उन्होंने जोड़ा।
स्थानीय मुद्दों पर फोकस
अबू आजमी ने मुंबई और महाराष्ट्र की जनता के स्थानीय मुद्दों पर भी फोकस किया। उन्होंने कहा कि “मुंबई की सड़कों की हालत खराब है, ट्रैफिक की समस्या बढ़ती जा रही है, और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। सपा इन मुद्दों को चुनाव में प्रमुखता से उठाएगी।”
उन्होंने बीएमसी पर भी निशाना साधा और कहा कि “पिछले कई सालों से एक ही तरह की राजनीति चल रही है। अब बदलाव का समय है। सपा इस बार लोगों को एक नया विकल्प देगी।”
राजनीतिक समीकरण पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अबू आजमी का यह फैसला महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में नया समीकरण बना सकता है। बीएमसी चुनाव में जहां शिवसेना (उद्धव) और शिवसेना (शिंदे गुट) आमने-सामने हैं, वहीं कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार गुट) मिलकर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। ऐसे में सपा का अकेले चुनाव लड़ना मुस्लिम और पिछड़े वोट बैंक में असर डाल सकता है।
अबू आजमी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा,
“हमारी लड़ाई सत्ता पाने की नहीं, बल्कि समाज को न्याय दिलाने की है। और यह लड़ाई हम अकेले लड़ने को तैयार हैं।”
इस ऐलान के साथ महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है — जहां अब सपा की राहें कांग्रेस और अन्य दलों से अलग होती नजर आ रही हैं।
Also Read :
बिहार में एनडीए का चुनावी मंत्र—‘पंचामृत गारंटी’ से जनता को भरोसे का तोहफा!