धमकी कॉल से मचा हड़कंप: रवि किशन और भगवान राम पर आपत्तिजनक बातें !

गोरखपुर सांसद रवि किशन के निजी सचिव शिवम द्विवेदी को फोन कर धमकी दी गई है। धमकी देने वाले ने भगवान राम को लेकर भी अभद्र बातें कही हैं। आरोपी ने खेसारी लाल यादव के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने मंदिर की जगह अस्पताल बनाने की बात कही थी।

भोजपुरी अभिनेता व भाजपा सांसद रवि किशन शुक्ला को फोन पर जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। धमकीभरा कॉल सांसद के निजी सचिव शिवम द्विवेदी के मोबाइल पर आया जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को अजय कुमार यादव बताकर कहा कि “रवि किशन यादवों पर टिप्पणी करते हैं, इसलिए मैं उन्हें गोली मार दूंगा।” घटना की जानकारी मिलते ही गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर हड़कंप मच गया।

धमकी कॉल से मचा हड़कंप: रवि किशन और भगवान राम पर आपत्तिजनक बातें !
धमकी कॉल से मचा हड़कंप: रवि किशन और भगवान राम पर आपत्तिजनक बातें !

मामले में बताया जा रहा है कि धमकी देने वाला व्यक्ति बिहार के आरा जिले के जवनिया (जवनिया/जौहनिया) गांव का रहने वाला है और वह खुद को खेसारी लाल यादव का समर्थक भी बता रहा था। कॉल के दौरान आरोपी ने न सिर्फ सांसद के खिलाफ अपशब्द बोले, बल्कि उनकी माता और भगवान राम के प्रति भी अपमानजनक टिप्पणी की, जिसके बाद सांसद के कार्यालय ने मामले की शिकायत स्थानीय पुलिस को दर्ज कराई।

धमकी मिलने के बाद रवि किशन की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए निजी सचिव शिवम द्विवेदी की तहरीर के आधार पर रामगढ़ताल थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्राथमिक जाँच शुरू कर दी है और कॉल के रिकॉर्ड तथा नंबर ट्रेस कर आरोपी तक पहुंचने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी सत्यापन और कॉल डिटेल की जांच से ही साफ होगा कि कॉल किस जगह से और किन मोबाइल नंबरों से की गई थी।

पार्टी और सुरक्षा दायरे में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। हालांकि सांसद रवि किशन ने सोशल मीडिया पर खुद को डरने वालों में से नहीं बताया और कहा कि वे अपने दायित्व का निर्वहन जारी रखेंगे, लेकिन घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा संसाधनों पर भी विचार किया जा सकता है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि धमकी के कारण स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सांसद की सुरक्षा व्यवस्था पर नज़र रखनी शुरू कर दी है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि के मद्देनज़र यह मामला संवेदनशील माना जा रहा है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक धमकी देने वाले ने यह भी कहा कि चार दिन बाद अगर सांसद बिहार आएँगे तो उन्हें निशाना बनाया जाएगा, जिससे चुनावी माहौल में और तनाव बढ़ने का खतरा दिखता है। इन परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित सांप्रदायिक उन्माद से बचने के लिए पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई आवश्यक मानी जा रही है।

केंद्र व राज्य स्तर पर पिछले कुछ समय से नेताओं व सार्वजनिक हस्तियों को मिलने वाली धमकियों की घटनाएँ सुनवाई में हैं, इसलिए इस तरह के मामलों की नाजुकता और उनके प्रभाव पर भी टिप्पणियाँ हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित फोरेंसिक जांच, कॉल-डिटेल्स का विश्लेषण और आरोपितों की पहचान व गिरफ्तारी से ही स्थिति नियंत्रण में लाई जा सकती है। पुलिस ने भी जांच के दायरे को सीमित न रखकर, संभावित सहयोगियों और फोन नेटवर्क की तह तक पहुंचने का संकेत दिया है।

सूत्र बताते हैं कि मामला दर्ज होते ही तकनीकी और कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक समन्वय भी हो रहा है ताकि किसी भी तरह की अफ़वाह या तनाव न पनपे। अब देखना यह होगा कि जांच अधिकारियों को कितनी जल्द आरोपी तक पहुँचने और उसकी साफ-सुथरी पहचान करने में सफलता मिलती है तथा क्या इस घटना के बाद सांसद व उनके कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव होते हैं।

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