12 बोरी दवाएं राख में बदलीं, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप!

स्वास्थ्य केंद्र में जलाई गईं 12 बोरियां दवाइयों में से कई सिरप की बोतलें, इंजेक्शन एवं टैबलेट स्ट्रिप्स भी थे। ये सभी दवाइयां मरीजों के लिए बेहद जरूरी थे। स्वास्थ्य केंद्र के आरपियों के खिलाप एक्शन लिया गया है।

उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। जिले के सफीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में लगभग 10 से 12 बोरी दवाइयां अस्पताल परिसर में ही जला दी गईं। इनमें से कई दवाएं ऐसी थीं जो 2026 तक इस्तेमाल योग्य थीं। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने जांच के आदेश देते हुए अधीक्षक समेत दो कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।

12 बोरी दवाएं राख में बदलीं, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप!
12 बोरी दवाएं राख में बदलीं, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप!

जानकारी के अनुसार, घटना बीते सप्ताह की है जब स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने बड़ी मात्रा में पुरानी और कुछ नई दवाओं को इकट्ठा कर परिसर के पीछे खाली जगह पर जला दिया। जब धुएं और जली हुई दवाओं की गंध फैलने लगी, तो स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। मौके पर पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और पुलिस टीम ने जब जांच की, तो पाया कि जलाई गई दवाओं में कई ऐसी थीं जो अभी पूरी तरह वैध थीं और उनकी एक्सपायरी 2026 तक थी।

जांच में सामने आया कि इन दवाओं को जलाने से पहले न तो कोई आधिकारिक अनुमति ली गई थी और न ही नियमानुसार दवाओं के निस्तारण की प्रक्रिया अपनाई गई थी। अस्पताल के रिकॉर्ड में भी इन दवाओं की एंट्री मौजूद थी। इससे साफ हो गया कि यह मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार और गड़बड़ी का भी है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने तुरंत मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित की। समिति ने प्राथमिक जांच में पाया कि अस्पताल के अधीक्षक और दो अन्य कर्मचारियों ने बिना किसी आदेश के दवाओं को नष्ट करने का फैसला लिया। जांच रिपोर्ट के आधार पर अधीक्षक को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।

CMO डॉ. अशोक कुमार (नाम काल्पनिक) ने कहा, “यह अत्यंत गंभीर मामला है। जिन दवाओं की वैधता अभी बाकी थी, उन्हें जलाना न केवल सरकारी संपत्ति की हानि है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के साथ अन्याय भी है। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब अस्पताल परिसर में दवाएं फेंकी या जलाई गई हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में अक्सर पुरानी या एक्सपायर दवाएं खुले में पड़ी रहती हैं। लेकिन इस बार जो दवाएं जलाई गईं, उनमें कई महंगी और आवश्यक दवाएं थीं, जो गरीब मरीजों के इलाज में काम आ सकती थीं।

एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हमने देखा कि अस्पताल के पीछे कई बोरी दवाओं में आग लगी थी। बाद में पता चला कि वे सरकारी दवाएं थीं। यह जनता के पैसे की बर्बादी है, और इसके जिम्मेदारों को सजा मिलनी चाहिए।”

जांच में यह भी पता चला है कि जलाई गई दवाओं में एंटीबायोटिक्स, पेन किलर्स, सलाइन और बच्चों की दवाएं शामिल थीं। इनमें से अधिकांश की एक्सपायरी 2025 और 2026 की थी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि इस घटना से पर्यावरण को भी नुकसान हुआ है क्योंकि बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के दवाओं को जलाना प्रदूषण फैलाने वाला कृत्य है।

उधर, जिले के प्रशासन ने इस मामले की रिपोर्ट लखनऊ भेज दी है और राज्य स्तर पर भी जांच की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कुछ दवाओं की गुमशुदगी और फर्जी स्टॉक एंट्री की शिकायतें पहले भी आई थीं, जिन्हें छिपाने के लिए यह कदम उठाया गया हो सकता है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने सफीपुर CHC में सभी दवाओं के स्टॉक और निस्तारण प्रक्रिया की ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अन्य सभी स्वास्थ्य केंद्रों को सख्त हिदायत दी गई है कि किसी भी दवा को नष्ट करने से पहले नियमानुसार अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

यह घटना न केवल सरकारी व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि स्तर पर अब भी निगरानी की कमी और जवाबदेही का अभाव है। मरीजों की जरूरत की दवाएं जब लापरवाही से आग में झोंक दी जाती हैं, तो सवाल उठता है कि जनता के स्वास्थ्य से इस तरह का खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा।

धुआं उठते दिखे पहुंची टीम

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉक्टर सत्य प्रकाश ने घटना का संज्ञान लेते हुए सीएचसी अधीक्षक और फार्मासिस्ट को हटाकर उन्हें सीएमओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, परिसर से उठता धुआं देखकर जब वे मौके पर पहुंचे तो वहां सिरप की बोतलें, इंजेक्शन एवं टैबलेट स्ट्रिप्स जलती हुई मिलीं। कुछ अधजली दवाओं पर अंकित तिथि से स्पष्ट हुआ कि दवाओं के उपयोग की तिथि समाप्त नहीं हुई थी। 

धुआं उठते दिखे पहुंची टीम
धुआं उठते दिखे पहुंची टीम

सूत्रों ने बताया कि जलाई गई दवाओं में कई आवश्यक दवाएं शामिल थीं, जिनका उपयोग मौसमी बीमारियों में सर्वाधिक होता है। सफीपुर सीएचसी में करीब 250 से 300 मरीज उपचार के लिए प्रतिदिन पहुंचते हैं, जिनमें से कइयों को इन्हीं दवाओं की जरूरत होती है। घटना की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। 

तत्काल प्रभाव से हटाए गए अधिकारी

सीएमओ के निर्देश पर एसीएमओ डॉक्टर एच.एन. प्रसाद मौके पर पहुंचे और प्रारंभिक जांच शुरू की। सीएमओ डॉक्टर सत्य प्रकाश ने बताया कि इस मामले में सफीपुर सीएचसी प्रभारी डॉक्टर राजेश वर्मा और फार्मासिस्ट प्रेम शंकर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है और जांच होने तक सीएमओ कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया है। 

दवाइयों को जलाए जाने के बताया ये कारण

जब उनसे पूछा गया कि कुछ ऐसी दवाएं भी जला दी गईं हैं जिनकी ‘एक्सपायरी’ 2026 की है। इस पर उन्होंने कहा कि जांच हो रही है और संबंधित तथ्य सामने आ जाएंगे। इस बीच, विभागीय अधिकारियों ने बताया कि दवाओं के इस्तेमाल की अवधि समाप्त हों या नहीं, उन्हें इस तरह जलाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी !

Also Read :

योगी के बयान पर अबू आजमी का पलटवार, कांग्रेस गठबंधन पर दिया बड़ा बयान !