बिहार चुनाव के Exit Poll भाजपा-जदयू और अन्य दलों के एनडीए गठबंधन को बहुमत मिलते हुए बताया गया है। एग्जिट पोल पर भाजपा का पहला बयान सामने आ गया है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का मतदान संपन्न हो चुका है और अब सभी की निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ — पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को शेष 122 सीटों पर वोट डाले गए। मतदान के दौरान राज्य भर में जनता का उत्साह देखने लायक था। अब जबकि परिणाम की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है, विभिन्न मीडिया हाउस और सर्वे एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल जारी कर दिए हैं। इन एग्जिट पोल्स में एनडीए गठबंधन को स्पष्ट बहुमत और सत्ता में वापसी की संभावना जताई गई है।

इन एग्जिट पोल्स के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से पहला आधिकारिक बयान सामने आया है। पार्टी ने इसे जनता के विश्वास की जीत बताया है। बीजेपी प्रवक्ता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमें पहले से भरोसा था कि बिहार की जनता इस बार भी विकास और स्थिरता के नाम पर वोट देगी। पूरे राज्य में एनडीए के पक्ष में एकतरफा लहर थी, और अब एग्जिट पोल ने वही दिखाया है। हमें पूरा विश्वास है कि नतीजे हमारी उम्मीदों से भी आगे होंगे।”

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी पर जनता का भरोसा कायम है। “पिछले दस वर्षों में बिहार ने विकास के जिस रास्ते पर कदम बढ़ाए हैं, जनता ने उसी का समर्थन किया है। हमारी सरकार ने गांवों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में जो काम किए हैं, उन्हें जनता ने महसूस किया है,” उन्होंने कहा।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि बीजेपी को 2010 और 2020 के मुकाबले इस बार और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। कई सीटों पर कड़ी टक्कर के बावजूद पार्टी नेताओं को विश्वास है कि एनडीए को 150 से अधिक सीटें मिल सकती हैं। वहीं, महागठबंधन की स्थिति कई एग्जिट पोल्स में कमजोर दिख रही है। कांग्रेस और आरजेडी के गढ़ों में भी इस बार एनडीए उम्मीदवारों ने कड़ी चुनौती दी है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने एग्जिट पोल्स को “पूर्वनियोजित” और “भ्रम फैलाने वाला” बताया है। आरजेडी प्रवक्ता ने कहा कि “जनता का असली फैसला 14 नवंबर को सामने आएगा। एग्जिट पोल्स पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि कई बार यह गलत साबित हुए हैं।”
हालांकि, बीजेपी नेताओं का कहना है कि उन्हें जमीनी स्तर पर जनता का मूड पहले से साफ दिखाई दे रहा था। बिहार के हर जिले में रैलियों में भारी भीड़, महिलाओं और युवाओं का उत्साह और मतदान प्रतिशत में हुई बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि जनता ने एक स्थिर सरकार के लिए वोट दिया है।
चुनाव विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार बीजेपी ने अपने अभियान को पूरी तरह “विकास और सुशासन” के मुद्दों पर केंद्रित रखा। पार्टी ने न तो जातीय समीकरणों पर अत्यधिक भरोसा किया और न ही विभाजनकारी राजनीति पर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों ने भी चुनावी माहौल में जबरदस्त प्रभाव डाला। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी विकास और कानून व्यवस्था को अपनी प्रमुख उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रखा।
बीजेपी के वरिष्ठ नेता संजय जायसवाल ने कहा, “यह सिर्फ एग्जिट पोल नहीं, बल्कि जनता के मन की बात है। बिहार की जनता ने झूठे वादों और परिवारवाद की राजनीति को नकार दिया है। हमें भरोसा है कि 14 नवंबर को जनता का फैसला एक बार फिर एनडीए सरकार के पक्ष में होगा।”
जैसे-जैसे परिणाम का दिन नजदीक आ रहा है, राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पार्टी दफ्तरों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जबकि प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में मतगणना केंद्रों पर नजरें टिकाए हुए हैं। एग्जिट पोल्स ने एनडीए खेमे में उत्साह बढ़ा दिया है, वहीं विपक्षी दलों में चिंताएं गहराने लगी हैं।
अब 14 नवंबर का दिन तय करेगा कि बिहार की सत्ता पर कौन काबिज होगा — क्या एनडीए एक बार फिर मजबूत वापसी करेगा या विपक्ष कोई बड़ा उलटफेर दिखाएगा। लेकिन फिलहाल, बीजेपी का दावा साफ है — “बिहार में इस बार जनता ने एकतरफा वोट दिया है, और परिणाम इसका सबसे बड़ा सबूत होंगे।”
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