हार के बाद RJD में भूचाल! रोहिणी आचार्य ने तोड़ा पारिवारिक नाता !

रोहिणी आचार्य ने राष्ट्रीय जनता दल और परिवार से नाता तोड़ दिया है. इसकी जानकारी सोशल मीडिया साइट एक्स पर दी है.

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर ही उथल-पुथल और पारिवारिक कलह खुलकर सामने आ गई है। चुनावी नतीजों में RJD को महज़ 25 सीटों पर सिमटना पड़ा, जिसके बाद अब लालू प्रसाद यादव के परिवार में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस तनाव ने शनिवार को एक बड़ा मोड़ ले लिया, जब लालू यादव की दूसरी बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर परिवार से नाता तोड़ने और राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी।

हार के बाद RJD में भूचाल! रोहिणी आचार्य ने तोड़ा पारिवारिक नाता !
हार के बाद RJD में भूचाल! रोहिणी आचार्य ने तोड़ा पारिवारिक नाता !

रोहिणी आचार्य, जो अब तक अपने पिता और भाई तेजस्वी यादव के लिए मुखर समर्थन देती रही हैं, ने अचानक लिखा—
“मैं राजनीति छोड़ रही हूँ और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूँ।”
उनकी इस पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्होंने अपनी पोस्ट को एडिट किया और उसमें राज्यसभा सांसद संजय यादव और रमीज़ का नाम भी जोड़ दिया। एडिटेड पोस्ट में रोहिणी ने लिखा कि संजय यादव और रमीज़ ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था और वह सारे दोष अपने ऊपर ले रही हैं।

इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर रोहिणी के इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएँ शुरू हो गईं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि RJD की हार के बाद पार्टी में भीतर ही भीतर असंतोष पनप रहा था, जो अब खुलकर दिखाई दे रहा है। खास बात यह है कि रोहिणी आचार्य के दोनों वर्जन—पहले वाला और बाद में एडिट किया हुआ—सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। उनके बदले हुए रुख से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि परिवार के भीतर गंभीर मतभेद उभर आए हैं और रोहिणी उन विवादों को सार्वजनिक रूप से सामने ला रही हैं।

बिहार की राजनीति में रोहिणी आचार्य हमेशा एक महत्वपूर्ण चेहरा रही हैं, खासकर सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता और पार्टी के नेताओं के लिए उनका अटूट समर्थन चर्चा में रहता था। लेकिन इस बार नतीजों के बाद उनकी निराशा और आक्रोश साफ झलक रहा है। माना जा रहा है कि RJD की हार के लिए जिम्मेदार रणनीतिक फैसलों पर आंतरिक खींचतान चरम पर है, जिसका असर परिवारिक रिश्तों तक पहुँच गया है।

रोहिणी के इस पोस्ट पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की भी बाढ़ आ गई है। विरोधी दलों ने इसे तुरंत मुद्दा बना लिया। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के प्रवक्ता नीरज यादव ने रोहिणी की पोस्ट पर निशाना साधते हुए कहा कि RJD सिर्फ एक “परिवार की पार्टी” बनकर रह गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जब पार्टी का ढांचा परिवारवाद पर खड़ा हो, तो ऐसे विवाद होना स्वाभाविक है। अब लालू यादव के अपने परिवार की कलह भी जनता के सामने आ चुकी है।”

जदयू की यह टिप्पणी राजनीतिक तौर पर काफी भारी मानी जा रही है, क्योंकि चुनावी मैदान में पहले से ही महागठबंधन की हार के कारणों पर कई सवाल खड़े हो चुके हैं। अब परिवार के भीतर इस तरह के विवाद सामने आने से RJD की छवि पर और भी गहरा असर पड़ सकता है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि रोहिणी की नाराज़गी सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि RJD के भीतर रणनीतिक असंतुलन, संवादहीनता और अफसरशाही के बढ़ते दखल का संकेत हो सकती है। संजय यादव, जिन्हें तेजस्वी यादव का प्रमुख सलाहकार और रणनीतिकार माना जाता है, उनके नाम का उल्लेख रोहिणी द्वारा सार्वजनिक रूप से किए जाने से यह साफ हो रहा है कि परिवार में आंतरिक मतभेद गंभीर स्तर पर पहुँच चुके हैं।

फिलहाल RJD या लालू-तेजस्वी परिवार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन RJD की हार और परिवार के भीतर इस विवाद ने बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है। आने वाले दिनों में इस विवाद का असर RJD के संगठन, नेतृत्व और राजनीतिक भविष्य पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

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