उत्तर प्रदेश में ठंड बढ़ने के साथ ही हवा लगातार जहरीली बनी हुई हैं. कई जगहों पर तो हालात बेहद ख़राब हो गए हैं. यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 के पार चला गया है.
उत्तर प्रदेश में पिछले दो दिनों से शीतलहर का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। तापमान में तेज गिरावट के बाद सुबह और शाम के समय ठंड काफी बढ़ गई है। सर्द मौसम के बीच हवा की गुणवत्ता भी तेजी से बिगड़ने लगी है। कई जिलों में हवा में धुंध और धुएं का घनत्व इतना बढ़ गया है कि आसमान पर स्मॉग की मोटी चादर छा गई है। मौसम विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, प्रदेश के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 से 450 के बीच पहुंच चुका है, जो ‘गंभीर श्रेणी’ में आता है और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।

नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में बिगड़ी हवा की गुणवत्ता
दिल्ली से सटे जिलों—नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ में सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर बेहद खराब स्थिति में पहुंच गया है। एडवाइजरी के अनुसार, इन शहरों में AQI लगातार 400 के आसपास बना हुआ है। हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों के कारण लोगों को आंखों में जलन, खांसी, सांस फूलने और गले में खराश की शिकायत तेजी से बढ़ी है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह स्थिति खासकर बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन संबंधी मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है।
हापुड़ और बागपत भी हुए प्रदूषण की चपेट में

अबकी बार प्रदूषण का असर केवल NCR तक सीमित नहीं है। हापुड़ और बागपत जैसे जिलों में भी हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ स्थिति में पहुंच गई है। इन जिलों में AQI 400 से ऊपर दर्ज किया गया है, जिससे सुबह और शाम के समय घनी धुंध का प्रभाव दिखाई दे रहा है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि सुबह की सड़कों पर कुछ मीटर आगे तक भी साफ दिखाई नहीं देता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि हवा की गति कम होने और तापमान गिरने से प्रदूषकों का फैलाव रुक जाता है। यही वजह है कि पूरे वायुमंडल में जहरीले कण जमा होते जा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर की हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में

मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर जैसे जिलों में भी हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में आ गई है। यहां AQI 300 से 350 के बीच रिकॉर्ड किया जा रहा है, जो स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डालने के लिए पर्याप्त है। स्थानीय प्रशासन ने स्कूलों को सुबह की प्रार्थना बाहर करने से रोकने और बच्चों को मास्क पहनने की सलाह देने की तैयारी शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब AQI 400 से ऊपर जा पहुंचता है, तो यह स्वस्थ व्यक्तियों के फेफड़ों पर भी असर डालता है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या दिल संबंधी बीमारियां हैं, उनकी हालत और बिगड़ सकती है। डॉक्टरों के अनुसार:
- हवा में मौजूद PM2.5 कण फेफड़ों के बेहद अंदर तक घुस जाते हैं
- सांस फूलना, सीने में दर्द और खांसी बढ़ सकती है
- बच्चों और बुजुर्गों पर इसका दुष्प्रभाव सबसे तेज पड़ता है
कई अस्पतालों में पिछले 48 घंटों में सांस की समस्या वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड में
प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंचते ही प्रशासन भी सतर्क हो गया है। कई जगहों पर निर्माण कार्यों को सीमित करने, कूड़ा जलाने पर रोक लगाने और सड़कों पर पानी का छिड़काव बढ़ाने का आदेश दिया गया है। ट्रैफिक पुलिस को भी भारी वाहनों के प्रवेश पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश मिले हैं।
इसके अलावा, सरकारी एजेंसियां औद्योगिक क्षेत्रों में स्मॉग टावर्स और एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाने की पहल भी कर रही हैं।
आगे क्या?
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 3–4 दिनों में उत्तर भारत में ठंड और बढ़ सकती है। तापमान में और गिरावट के साथ हवा की गति धीमी होने की संभावना है, जिससे प्रदूषण का स्तर और बढ़ने की आशंका है। फिलहाल आम जनता को मास्क पहनने, सुबह की सैर कम करने और घरों में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करने की सलाह दी गई है।