गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में निशांत कुमार ने बिहार की जनता को बधाई दी. इस दौरान उनसे राजनीति में डेब्यू करने को लेकर भी सवाल पूछा गया.
बिहार की राजनीति में एक बार फिर ऐतिहासिक दिन दर्ज हुआ, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे। लेकिन कार्यक्रम में एक और चेहरा भी मीडिया और लोगों का ध्यान खींच रहा था—मुख्यमंत्री के बेटे निशांत कुमार।

सालों से निजी जीवन और लो-प्रोफाइल पब्लिक इमेज के लिए जाने जाने वाले निशांत कुमार इस बार मीडिया से रूबरू होते हुए दिखाई दिए। शपथ समारोह के बाद उन्होंने पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत की, जिसमें उन्होंने राज्य की जनता और खास तौर पर महिला मतदाताओं का धन्यवाद करते हुए “ऐतिहासिक जनादेश” के लिए आभार व्यक्त किया।
“बिहार की जनता को नमन”—निशांत का विनम्र संदेश
पत्रकारों से बातचीत के दौरान निशांत कुमार ने बड़े शांत और संयमित अंदाज़ में कहा,
“बिहार की जनता को नमन और शुभकामनाएं। मैं दिल से धन्यवाद देता हूं और बधाई देता हूं। लोगों ने जिस तरह काम किया, महिलाओं ने जिस तरह मतदान किया, उनकी विशेष भागीदारी बिहार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”
निशांत ने इस चुनाव में महिलाओं की भूमिका को विशेष रूप से उजागर किया। उन्होंने कहा कि बिहार के विकास में महिलाओं की सहभागिता लगातार बढ़ रही है और इस चुनाव ने एक बार फिर इसे मजबूत तरीके से साबित किया है। उन्होंने इसे “बिहार के सामाजिक परिवर्तन का संकेत” बताया।
हालांकि आमतौर पर निशांत बिहार की राजनीति से दूरी बनाए रखते हैं और उनकी लाइमलाइट में उपस्थिति कम ही देखने को मिलती है, लेकिन इस बार उनका मीडिया के सामने आकर जनता को धन्यवाद देना खुद में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक डेब्यू का सवाल टाल गए निशांत
हालांकि, बातचीत का सबसे अहम हिस्सा तब देखने को मिला जब निशांत से पूछा गया कि क्या वे आने वाले समय में राजनीति में कदम रखेंगे? क्या इस चुनाव या सरकार के गठन के बाद उनका राजनीतिक पदार्पण जल्द देखने को मिल सकता है?
इस सवाल पर निशांत ने मुस्कुराते हुए कहा—
“इस समय मैं बस लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूं। राजनीति की बात अभी नहीं।”
उनके इस जवाब ने एक बार फिर उन कयासों को हवा दे दी है कि क्या निशांत भविष्य में राजनीति में सक्रिय होंगे या नहीं। पिछले कुछ वर्षों में कई बार चर्चा उठी कि क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने उत्तराधिकारी के रूप में अपने बेटे को तैयार कर रहे हैं। लेकिन हर बार निशांत ने राजनीति से दूरी बनाए रखी।
निशांत कुमार, जो इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं, ने हमेशा निजी जीवन को प्राथमिकता दी है। वे सार्वजनिक मंचों पर कम ही दिखाई देते हैं और सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों में भी भागीदारी नहीं रखते। यही कारण है कि उनके हर छोटे बयान और उपस्थिति को राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा गंभीरता से देखा जाता है।
परिवार और सत्ता का समीकरण
नीतीश कुमार ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर कहा है कि उनका परिवार राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से दूर है और उनका बेटा राजनीति में नहीं आएगा। लेकिन समय-समय पर राजनीतिक हलकों में निशांत के भविष्य को लेकर चर्चाएं उठती रहती हैं। बिहार के तेजी से बदलते राजनीतिक माहौल और गठबंधनों की राजनीति में किसी भी नए चेहरे का उदय महत्वपूर्ण हो सकता है।
निशांत की यह उपस्थिति और जनता को दिया गया संदेश भी कुछ नई संभावनाओं को जन्म देता दिख रहा है।
गांधी मैदान में शक्ति प्रदर्शन
गांधी मैदान में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह इस बार बेहद भव्य था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व दिया। कई विपक्षी दलों ने इस आयोजन पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं दीं, लेकिन इस बीच निशांत का संयमित बयान अलग ही सुर्खियाँ बना गया।
आखिर में—एक संकेत, या सिर्फ औपचारिकता?
निशांत कुमार का जनता को धन्यवाद देना एक औपचारिकता भी हो सकती है और एक संभावित राजनीतिक संकेत भी। वे राजनीति में आएंगे या नहीं, यह भविष्य के गर्भ में है। लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं कि उनके कुछ शब्दों ने बिहार की सियासत में नई चर्चा का दरवाजा खोल दिया है।
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