अनंत सिंह की सिविल कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी है. अब वह पटना हाईकोर्ट में इसे चुनौती देंगे.
बिहार की सियासत में चर्चित नाम और मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को गुरुवार को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में आरोपी बनाए गए अनंत सिंह की जमानत याचिका सिविल कोर्ट ने खारिज कर दी। इस फैसले के साथ ही अनंत सिंह को अभी जेल में ही रहना पड़ेगा। अब उनका कानूनी रास्ता केवल पटना हाईकोर्ट से ही खुल सकता है, जहां वे इस आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला 30 अक्टूबर का है, जब बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान मोकामा के निवासी दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या की गूंज सियासी गलियारों से लेकर पटना की अदालतों तक सुनाई देती रही। मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने इस हत्या के पीछे अनंत सिंह और उनके गुर्गों का हाथ बताया था। इसी आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और अनंत सिंह को मुख्य आरोपी बनाया।
हत्या के बाद से ही इस केस ने तूल पकड़ लिया था। कई गवाहों के बयान, मोबाइल लोकेशन, स्थानीय लोगों की शिकायतों और चुनावी रंजिश के एंगल को जोड़ते हुए पुलिस ने अनंत सिंह को नामजद किया और कार्रवाई तेज कर दी। कुछ ही दिनों में पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद से वे पटना के बेऊर जेल में बंद हैं।
कोर्ट ने जमानत क्यों खारिज की?

सिविल कोर्ट में अनंत सिंह की ओर से यह दलील दी गई कि मामला राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और उन्हें बेवजह फंसाया जा रहा है। वकीलों ने कहा कि चुनावी माहौल में उनके खिलाफ षड्यंत्र रचकर यह केस बनाया गया है। साथ ही, उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि अनंत सिंह का अब तक का रिकॉर्ड, चुनाव ड्यूटी के दौरान उनकी गतिविधियां और उनकी सेहत को देखते हुए उन्हें राहत दी जाए।
लेकिन सरकारी वकीलों ने इसके उलट दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि हत्या की घटना गंभीर अपराध है, और चूंकि अनंत सिंह का आपराधिक इतिहास रहा है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ देना मामले की जांच को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने अदालत को बताया कि कई गवाहों ने उनके खिलाफ बयान दिए हैं और उन्हें जमानत मिलने से गवाहों पर दबाव पड़ने की आशंका है।
इन तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने अनंत सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों और मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है।
अब आगे क्या?
अनंत सिंह की ओर से उनके वकील ने बताया कि सिविल कोर्ट के आदेश को जल्द ही पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। हाईकोर्ट में वे इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करेंगे। अगर हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली, तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाने की संभावना है।
राजनीतिक तौर पर भी यह मामला काफी महत्वपूर्ण है। अनंत सिंह का बाहुबली छवि के बावजूद मोकामा क्षेत्र में बड़ा जनाधार है। उनकी गिरफ्तारी और केस की सुनवाई लगातार बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय रही है। चुनाव期间 में हुई इस हत्या की वजह से विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ने इसे मुद्दा बनाकर अपने-अपने आरोप लगाए।
बिहार की राजनीति पर असर
चूंकि यह केस चुनावी माहौल में हुआ था, इसलिए यह राजनीतिक रूप से भी बहुत संवेदनशील है। विपक्ष इसे कानून व्यवस्था की विफलता बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि अपराधियों पर कार्रवाई में सरकार कोई समझौता नहीं कर रही। अनंत सिंह की जेल में बंदी और केस की तफ्तीश बिहार के राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है, खासकर मोकामा और आसपास के इलाकों में।
निष्कर्ष
सिविल कोर्ट के फैसले से अनंत सिंह को तगड़ा झटका लगा है। फिलहाल वे बेऊर जेल में ही रहेंगे और उनके भविष्य का अगला फैसला अब पटना हाईकोर्ट के हाथ में होगा। दुलारचंद यादव हत्याकांड की गुत्थी अभी और भी खुलनी बाकी है, और आने वाले दिनों में यह मामला बिहार की सियासत में और भी बड़ा मोड़ ले सकता है।
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