भवन निर्माण विभाग ने राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास के बजाय वैकल्पिक रूप से 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया है. अब इस पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.
बिहार की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल बढ़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को सरकार द्वारा आवंटित सरकारी आवास में बदलाव किए जाने के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक रूप ले लिया है। इस फैसले को लेकर आरजेडी की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, खासकर तेज प्रताप यादव की टिप्पणी ने सियासी माहौल को और गरम कर दिया है।

तेज प्रताप यादव का नीतीश कुमार पर सीधा हमला
राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास खाली कराकर 39 हार्डिंग रोड वाले आवास में शिफ्ट किए जाने के आदेश को लेकर तेज प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:

“छोटे भाई (नीतीश कुमार) ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बड़े भाई के बंगले को खाली करने का आदेश दे दिया। गिर ही गए, लेकिन इतना नीचे नहीं गिरना था। इतिहास दोनों हाथों में कालिख लिए नीतीश कुमार का इंतजार कर रहा है।”
तेज प्रताप की यह टिप्पणी केवल नाराजगी भर नहीं दिखाती, बल्कि यह सत्ता परिवर्तन के बाद से अलग-अलग मोर्चों पर चल रही राजनीतिक खींचतान को भी उजागर करती है। उन्होंने नीतीश कुमार को ‘छोटे भाई’ और खुद को ‘बड़ा भाई’ कहकर संबोधित कर फिर से पुराने रिश्तों और राजनीतिक समीकरणों की ओर भी इशारा किया।
सरकार ने दिया नया आवास, लेकिन क्यों?
बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने मंगलवार, 25 नवंबर 2025 को आदेश जारी करते हुए राबड़ी देवी को दिए गए सरकारी आवास में परिवर्तन किया। पहले उन्हें 10 सर्कुलर रोड वाला आवास मिला हुआ था, जो लंबे समय से आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का मुख्य राजनीतिक ठिकाना माना जाता है। लेकिन नए आदेश के तहत अब उन्हें वैकल्पिक तौर पर 39 हार्डिंग रोड स्थिति आवास दिया गया है।
सरकारी विभाग के अनुसार यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, और आवास परिवर्तन नियमित प्रक्रिया के तहत किया गया है। हालांकि विपक्षी दल इसे राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देख रहे हैं।
आरजेडी इसे ‘बदले की राजनीति’ बता रहा है
तेज प्रताप यादव के अलावा आरजेडी के कई अन्य नेताओं ने भी इस फैसले को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि सत्ता में वापस आने के तुरंत बाद नीतीश कुमार ने ऐसे फैसले लिए हैं, जो विपक्ष को टारगेट करने और लालू परिवार की राजनीतिक ज़मीन को कमजोर करने की कोशिश हैं।
आरजेडी का तर्क है कि 10 सर्कुलर रोड केवल एक आवास से ज्यादा है—वह पार्टी का मुख्य केंद्र है, जहां से लालू परिवार ने दशकों तक राजनीति का संचालन किया है। ऐसे में उस आवास को बदलना एक प्रतीकात्मक चोट है, जिसे वे आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे।
नीतीश सरकार की ओर से प्रतिक्रिया?
नीतीश कुमार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं आई है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि आवासलाभ, बंगलों का आवंटन और पुनर्वितरण हमेशा प्रशासनिक नियमों के अनुसार होता है और इसे राजनीतिक रंग देना अनुचित है।
कुछ अधिकारी यह भी कहते दिखे कि राज्य के सरकारी आवासों के पुनर्गठन का काम वर्षों से लंबित था, जिसे अब पूरा किया जा रहा है।
राजनीतिक तापमान और बढ़ा
तेज प्रताप यादव की टिप्पणी का लहजा और तीखापन यह दर्शाता है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। आरजेडी इसे जनता के सामने सत्ता की ‘दुर्व्यवहार की राजनीति’ के रूप में पेश कर सकती है। दूसरी ओर, जेडीयू और सत्तापक्ष इसे सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया बताकर मामले को ठंडा रखने की कोशिश करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस आवास विवाद का असर विधानसभा और परिषद की राजनीति में भी साफ दिखाई देगा। लालू परिवार के किसी भी मुद्दे पर तेज प्रताप और तेजस्वी यादव दोनों खुलकर बोलते रहे हैं, और यह मामला भी अपवाद नहीं है।
निष्कर्ष
राबड़ी देवी का सरकारी आवास बदले जाने का फैसला न केवल एक प्रशासनिक आदेश है, बल्कि बिहार की राजनीति के दिल में चल रही गहरी प्रतिस्पर्धा और अविश्वास की भावना को भी सामने लाता है। तेज प्रताप यादव की प्रतिक्रिया से साफ है कि आरजेडी इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि नीतीश सरकार या जेडीयू की ओर से इस विवाद पर क्या आधिकारिक बयान आता है, और यह विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में मोड़ लेता है।