समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकारी नौकरियों में OBC/SC/ST के आरक्षण में लूट का आरोप लगाया, सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि बीते पांच सालों में आरक्षित पद लूट लिए गए.
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बीते पांच वर्षों में प्रदेश में हुई भर्तियों में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग के आरक्षित पदों पर “जमकर लूट” हुई है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि आरक्षण व्यवस्था को कमजोर कर भाजपा सरकार ने पीडीए वर्ग के हक छीने हैं।

अखिलेश यादव ने यह आरोप अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (पूर्व में ट्विटर) के जरिए लगाए। उन्होंने एक डेटा साझा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अलग-अलग भर्तियों में आरक्षित वर्गों को उनके हक के मुताबिक पद नहीं दिए गए। सपा अध्यक्ष ने चार बड़ी भर्तियों का उदाहरण पेश कर भाजपा पर आरक्षण छीनने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव के अनुसार, साल 2019 में 69,000 सहायक शिक्षक पदों पर हुई भर्ती इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने दावा किया कि इस भर्ती में कुल आरक्षण के हिसाब से OBC, SC और ST वर्ग को 34,500 पद मिलने चाहिए थे, लेकिन वास्तव में उन्हें केवल 5,161 पद ही दिए गए। सपा प्रमुख का आरोप है कि इस भर्ती में करीब 29,333 आरक्षित पदों की “लूट” की गई और इन्हें जानबूझकर आरक्षित वर्गों से छीन लिया गया।
सपा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब संविधान आरक्षण का अधिकार देता है, तो फिर सरकार इसे लागू करने में क्यों विफल रही। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार यह दावा करती है कि वह सामाजिक न्याय के पक्ष में है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। अखिलेश यादव ने कहा, “भाजपा सरकार ने पीडीए के आरक्षण पर डाका डाला है। यह सरकार आरक्षण देने की नहीं, बल्कि छीनने की नीति पर चल रही है।”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि केवल शिक्षक भर्ती ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों में हुई भर्तियों में भी यही पैटर्न देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जानबूझकर ऐसी चयन प्रक्रियाएं अपनाईं, जिनसे आरक्षित वर्गों को नुकसान पहुंचे। सपा प्रमुख का दावा है कि आरक्षण के नाम पर दिखावा किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर पीडीए वर्ग को उसका हक नहीं मिला।
सपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पीडीए समाज की आबादी उत्तर प्रदेश में बहुसंख्यक है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नौकरियों और संसाधनों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियां “मनुवादी सोच” से प्रेरित हैं, जो आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करना चाहती हैं। अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी सत्ता में आई तो आरक्षण के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
इस मुद्दे पर सपा के अन्य नेताओं ने भी सरकार पर हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आरक्षण सिर्फ एक संवैधानिक व्यवस्था नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का आधार है। यदि इसे कमजोर किया गया, तो इसका सीधा असर समाज के कमजोर तबकों पर पड़ेगा। सपा ने मांग की है कि सरकार सभी भर्तियों का श्वेत पत्र जारी करे और यह स्पष्ट करे कि आरक्षित वर्गों को वास्तव में कितने पद मिले।
वहीं, भाजपा की ओर से इन आरोपों को सिरे से खारिज किया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सभी भर्तियां संविधान और नियमों के तहत की गई हैं और आरक्षण व्यवस्था का पूरी तरह पालन किया गया है। भाजपा का आरोप है कि अखिलेश यादव चुनावी फायदे के लिए भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरक्षण का मुद्दा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में और ज्यादा गरमाने वाला है। पीडीए वर्ग को लेकर अखिलेश यादव लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और भाजपा को घेरने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।