मुरादाबाद में रेलवे लाइन के किनारे बुलडोजर एक्शन से घबराए दुकानदारों ने रविवार रात को ही अपनी दुकानें खाली करना शुरू कर दी थीं. इसके पहले व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया था.
मुरादाबाद में रेलवे लाइन के किनारे दशकों से लगे खोखों को हटाने को लेकर सोमवार को पूरे दिन तनावपूर्ण हालात बने रहे। सुबह से ही रेलवे प्रशासन की ओर से बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी थी, लेकिन करीब पांच घंटे की जद्दोजहद के बाद भी रेलवे अधिकारी दुकानों को तोड़ने में नाकाम रहे। व्यापारियों के भारी विरोध और मौके पर बने हालात को देखते हुए दोपहर करीब तीन बजे रेलवे अधिकारियों ने रणनीति बदलते हुए दुकानों को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस दौरान 4 से 5 दुकानों को सील भी कर दिया गया, जिससे क्षेत्र में आक्रोश और बढ़ गया।

रेलवे प्रशासन का कहना है कि ये खोखे रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बने हुए हैं। रेलवे ने पहले ही इन दुकानदारों को नोटिस जारी कर 28 दिसंबर तक दुकानें खाली करने की मोहलत दी थी। नोटिस मिलने के बाद बुलडोजर कार्रवाई की आशंका से घबराए कई दुकानदारों ने रविवार रात से ही अपनी दुकानों से सामान निकालना शुरू कर दिया था। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में दुकानदार अपनी दुकानों को टूटने से बचाने के लिए डटे रहे।
सुबह से जुटी पुलिस, हालात रहे तनावपूर्ण
सोमवार सुबह जैसे ही रेलवे अधिकारी और मशीनें मौके पर पहुंचीं, दुकानदारों ने विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को संभालने के लिए जीआरपी, आरपीएफ के साथ-साथ सिविल पुलिस की भारी तैनाती की गई। एसपी सिटी खुद शहर के कई थानों की फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दुकानदारों को समझाने की कोशिश की, लेकिन व्यापारी अपनी दुकानों को हटाने या तोड़ने देने के लिए तैयार नहीं थे।

करीब पांच घंटे तक रेलवे अधिकारी बुलडोजर चलाने की तैयारी करते रहे, लेकिन व्यापारियों के विरोध और कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई। इसके बाद रेलवे प्रशासन ने दुकानों को सील करने का फैसला लिया।
165 दुकानों पर फिलहाल रुका बुलडोजर एक्शन
रेलवे लाइन के किनारे कुल 165 के करीब दुकानें और खोखे बताए जा रहे हैं, जिनमें से फिलहाल किसी को भी तोड़ा नहीं गया है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बुलडोजर एक्शन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और अब अवैध कब्जे की श्रेणी में आने वाली दुकानों को चरणबद्ध तरीके से सील किया जाएगा। दोपहर बाद की गई कार्रवाई में 4-5 दुकानों को सील कर दिया गया, जबकि बाकी दुकानों पर भी कभी भी कार्रवाई हो सकती है।
रेलवे अधिकारियों का तर्क है कि यह जमीन रेलवे परियोजनाओं और सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है, इसलिए अवैध कब्जों को हटाना जरूरी है। अधिकारियों ने साफ किया है कि नियमानुसार आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।
व्यापारियों में रोष, रोजी-रोटी का सवाल
दूसरी ओर दुकानदारों का कहना है कि वे दशकों से यहां दुकानें चला रहे हैं और यही उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। अचानक की जा रही कार्रवाई से सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। व्यापारियों का आरोप है कि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना हटाया जा रहा है, जो सरासर अन्याय है।
कई दुकानदारों ने बताया कि वे पहले भी रेलवे और प्रशासन से पुनर्वास की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। इसी वजह से वे कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं।
सियासत भी हुई तेज
इस कार्रवाई के बाद सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी ने रेलवे की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे गरीब और छोटे व्यापारियों के खिलाफ बताया है। सपा नेताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे का नहीं, बल्कि सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ा है। पार्टी ने मांग की है कि जब तक दुकानदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई न की जाए।
फिलहाल मुरादाबाद में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। रेलवे अधिकारी दुकानों को सील करने में जुटे हैं, जबकि व्यापारी आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
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