योगी कैबिनेट की मुहर के बाद GCC की नई SOP लागू!

 योगी सरकार की नीति के अनुसार गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जनपदों में स्थापित होने वाली पात्र जीसीसी इकाइयों को 30 प्रतिशत भूमि सब्सिडी मिलेगी.

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) इकाइयों को आकर्षित करने और निवेश को गति देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जीसीसी नीति से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी गई है, जिसके तहत पात्र इकाइयों को भूमि खरीद पर फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य राज्य को आईटी, तकनीकी सेवाओं और उच्च कौशल आधारित रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाना है।

योगी कैबिनेट की मुहर के बाद GCC की नई SOP लागू!
योगी कैबिनेट की मुहर के बाद GCC की नई SOP लागू!

नई एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि यह सब्सिडी केवल पात्र जीसीसी इकाइयों को ही मिलेगी और इसका लाभ को-वर्किंग स्पेस पर लागू नहीं होगा। सरकार का मानना है कि इससे स्थायी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और दीर्घकालिक आधार पर रोजगार सृजन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग सब्सिडी दरें

योगी सरकार ने प्रदेश के संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग सब्सिडी दरें तय की हैं। नीति के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में स्थापित होने वाली पात्र जीसीसी इकाइयों को भूमि खरीद पर 30 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। ये जिले पहले से ही आईटी और औद्योगिक गतिविधियों के बड़े केंद्र हैं, ऐसे में यहां नियंत्रित दर पर प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है।

योगी कैबिनेट की मुहर के बाद GCC की नई SOP लागू!
योगी कैबिनेट की मुहर के बाद GCC की नई SOP लागू!

पश्चिमांचल (गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद को छोड़कर) तथा मध्यांचल क्षेत्र में निवेश को और आकर्षक बनाने के लिए भूमि सब्सिडी की दर 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इससे मेरठ, सहारनपुर, आगरा, कानपुर और लखनऊ जैसे क्षेत्रों में नई जीसीसी इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

वहीं, पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने 50 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी का प्रावधान किया है। सरकार का मानना है कि इससे इन क्षेत्रों में आईटी आधारित निवेश बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

को-वर्किंग स्पेस को सब्सिडी से बाहर रखा गया

नई एसओपी में यह भी साफ कर दिया गया है कि को-वर्किंग स्पेस में संचालित जीसीसी इकाइयों को भूमि सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह प्रावधान केवल उन इकाइयों के लिए है, जो स्थायी रूप से भूमि खरीदकर या स्वयं का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर निवेश करेंगी। इससे रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे के विकास को भी मजबूती मिलेगी।

रोजगार और निवेश बढ़ाने पर जोर

राज्य सरकार का दावा है कि जीसीसी नीति के जरिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों को उत्तर प्रदेश में अपने बैक-ऑफिस, रिसर्च, आईटी सर्विसेज, डेटा एनालिटिक्स और इंजीनियरिंग डिज़ाइन जैसे कार्य स्थापित करने के लिए आकर्षित किया जा रहा है। इससे न केवल प्रत्यक्ष रूप से उच्च कौशल वाले रोजगार पैदा होंगे, बल्कि सहायक सेवाओं के माध्यम से अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जीसीसी इकाइयां राज्य के युवाओं को वैश्विक कंपनियों के साथ काम करने का अवसर देंगी, जिससे उनकी स्किल डेवलपमेंट और आय में वृद्धि होगी। इसके साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

निवेशकों में बढ़ी रुचि

योगी सरकार के इस कदम को निवेशक अनुकूल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्पष्ट एसओपी, क्षेत्रवार सब्सिडी और स्थिर नीति ढांचे से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा। खासकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 50 प्रतिशत तक भूमि सब्सिडी का प्रावधान इन क्षेत्रों को आईटी और टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने में मददगार साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, योगी सरकार की जीसीसी नीति और नई एसओपी उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम मानी जा रही है।

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