घटना के बाद बच्चा डर के कारण चुप रहा, लेकिन जब उसकी तबीयत बिगड़ी और परिजनों ने पूछताछ की तो उसने रोते हुए पूरी घटना बता दी. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
उत्तर प्रदेश के संभल जनपद के चंदौसी थाना क्षेत्र से नाबालिग छात्र के साथ यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित छात्र के परिजनों ने पहले कोतवाली में तहरीर दी थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर उन्होंने जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया से मुलाकात कर उन्हें लिखित शिकायत सौंपी। जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद आरोपी पक्ष के लोगों ने उन्हें धमकाकर समझौता करने का दबाव बनाया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी पुलिस से शिकायत की थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब डीएम के निर्देश के बाद मामला दर्ज होने से परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।
क्या है पूरा मामला ?
पीड़ित छात्र के मां ने बताया कि उनका लगभग 10 वर्षीय पुत्र कक्षा पांच का छात्र है. आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति के घर आने-जाने वाले एक युवक ने पहले बच्चे को गेम खेलने का बहाना बनाकर दुकान के अंदर बुलाया, फिर उसे स्कूटी सिखाने के बहाने सुनसान जगह पर ले गया और उसका रेप किया.
उस समय छात्र डर के कारण घरवालों को कुछ नहीं बता सका. वारदात के बाद बच्चा डर के कारण चुप रहा, लेकिन जब उसकी तबीयत बिगड़ी और परिजनों ने पूछताछ की और उसने रोते हुए अपने माता-पिता को पूरी बात बता दी.
डर के कारण चुप रहा मासूम
पीड़ित छात्र घटना के बाद डर और मानसिक तनाव में रहा। वह कई दिनों तक चुपचाप रहा और सामान्य व्यवहार करने की कोशिश करता रहा, ताकि किसी को शक न हो। परिजनों के अनुसार, बच्चे ने डर की वजह से शुरुआत में किसी को कुछ नहीं बताया। इस दौरान परिवार को भी यह अंदाजा नहीं था कि उनके बेटे के साथ इतना गंभीर अपराध हो चुका है।
कुछ दिनों बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी। जब उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और परिजनों ने उससे बार-बार पूछताछ की, तो वह भावनात्मक रूप से टूट गया। उसने रोते हुए अपने माता-पिता को पूरी घटना की जानकारी दी। बेटे की बात सुनकर परिवार सदमे में आ गया।
पुलिस की शुरुआती भूमिका पर सवाल
घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन तत्काल कोतवाली पहुंचे और आरोपी के खिलाफ तहरीर दी। हालांकि, आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसी बीच आरोपी के परिवार की ओर से पीड़ित परिवार को धमकाने और समझौते का दबाव बनाने का सिलसिला शुरू हो गया।
परिजनों का कहना है कि वे लगातार न्याय की गुहार लगाते रहे, लेकिन जब स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने जिलाधिकारी से मिलने का फैसला किया।
डीएम के हस्तक्षेप से दर्ज हुआ केस
पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और लिखित शिकायत सौंपी। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद चंदौसी थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। पीड़ित छात्र के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और मेडिकल जांच की प्रक्रिया भी पूरी कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
आरोपियों ने बनाया समझौते का दबाव
इसके बाद पीड़ित परिवार ने पड़ोसियों से बात की, लेकिन आरोप है कि कुछ लोग आरोपी को बचाने का प्रयास करते रहे और समझौते का दबाव बनाया गया. पीड़ित छात्र छात्राओं की मां ने कोतवाली चंदौसी पुलिस से न्याय की गुहार लगाई थी लेकिन पुलिस ने जांच का आश्वासन देकर महिला को टरका दिया.
आब जब परिवार डीएम संभल चंदौसी के पास पहुंचा, तो महिला ने उनके सामने अपना दुखड़ा रो दिया. इसके बाद डीएम के हस्तक्षेप के बाद मामले में एफआईआर दर्ज की गई है. इस घटना ने पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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