संभल हिंसा केस में हाई कोर्ट का हस्तक्षेप, अनुज चौधरी को अंतरिम राहत ,संभल कोर्ट द्वारा एएसपी अनुज चौधरी समेत पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने पर अंतरिम रोक लगा दी है. कोर्ट ने शिकायतकर्ता से दोनों याचिकाओं पर जवाब मांगा है.
संभल हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने संभल की निचली अदालत द्वारा अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। इस आदेश के साथ ही तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर को भी राहत मिल गई है।हाईकोर्ट का यह फैसला मंगलवार को आया, जिसने इस संवेदनशील मामले में नया मोड़ ला दिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह मामला जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आया था। यह याचिका एएसपी अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें संभल कोर्ट द्वारा पारित एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती दी गई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट का आदेश, शिकायतकर्ता से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में शिकायतकर्ता यामीन को नोटिस जारी करते हुए उनसे दोनों याचिकाओं पर अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद की जाएगी। तब तक के लिए संभल कोर्ट के एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक प्रभावी रहेगी।
कोर्ट के इस आदेश से न केवल एएसपी अनुज चौधरी बल्कि इस मामले में नामजद अन्य पुलिसकर्मियों को भी फिलहाल राहत मिल गई है।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला संभल में हुई हिंसा से जुड़ा हुआ है। संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत एएसपी अनुज चौधरी समेत करीब 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
यह याचिका संभल हिंसा में घायल युवक के पिता यामीन द्वारा दाखिल की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उनका बेटा घर से दुकान पर काम करने के लिए निकला था, लेकिन इसी दौरान पुलिस ने जान से मारने की नीयत से उस पर गोली चला दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि यह कार्रवाई गैरकानूनी और अत्यधिक बल प्रयोग का मामला है, जिसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
एफआईआर दर्ज न होने पर पहुंचा मामला हाईकोर्ट

सीजेएम कोर्ट के आदेश के बावजूद एएसपी अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद अनुज चौधरी और उत्तर प्रदेश सरकार ने निचली अदालत के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में तर्क दिया गया कि बिना पर्याप्त जांच और तथ्यों की पुष्टि के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर का आदेश कानूनन सही नहीं है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी कहा गया कि हिंसा के दौरान पुलिस ने अपने कर्तव्य का निर्वहन किया और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई थी। ऐसे में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज करने का आदेश न्यायोचित नहीं है।
कोर्ट के फैसले से बदला माहौल
हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद इस मामले में फिलहाल कानूनी कार्रवाई पर विराम लग गया है। इस फैसले को पुलिस महकमे के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष अब अगली सुनवाई में अपना पक्ष मजबूती से रखने की तैयारी कर रहा है।
कानूनी जानकारों के मुताबिक, हाईकोर्ट का यह आदेश अंतरिम है और अंतिम फैसला दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद ही लिया जाएगा।
आगे की कार्रवाई पर नजर
अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि निचली अदालत का एफआईआर दर्ज करने का आदेश बरकरार रहेगा या रद्द किया जाएगा। फिलहाल, हाईकोर्ट के आदेश से एएसपी अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
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