लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बजट पर चर्चा में भाग लिया। राहुल गांधी के भाषण के दौरान एपस्टीन शब्द बोलने के बाद लोकसभा में शोर-शराबा देखने को मिला। उनके भाषण के दौरान आसन पर जगदंबिका पाल बैठे थे।
संसद के बजट सत्र का आज 11वां दिन रहा, जिसमें केंद्रीय बजट पर चर्चा जारी है। इसी क्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बजट पर अपनी बात रखते हुए सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी का भाषण अपने अनोखे अंदाज और अलग उदाहरणों के कारण चर्चा में रहा। उन्होंने मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की, जिससे सदन में मौजूद सदस्य भी कुछ देर के लिए चौंक गए।

लोकसभा में उस समय आसन पर जगदंबिका पाल विराजमान थे। राहुल गांधी ने मार्शल आर्ट में “ग्रिप” और “चोक” के महत्व का उल्लेख करते हुए राजनीति से उसकी तुलना की। उन्होंने कहा कि जैसे मार्शल आर्ट में ग्रिप दिखाई नहीं देती, लेकिन वही मुकाबले का रुख तय करती है, उसी तरह राजनीति में भी एक ग्रिप होती है, जो नजर तो नहीं आती, लेकिन पूरे सिस्टम को नियंत्रित करती है। राहुल गांधी के इस बयान को सत्ता और शक्ति संरचना पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि बजट में आम जनता की समस्याओं का समाधान नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान बड़े उद्योगपतियों और चुनिंदा वर्गों पर केंद्रित है, जबकि किसान, युवा, मजदूर और मध्यम वर्ग लगातार दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि बजट में रोजगार सृजन को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बन चुकी है और युवा लगातार सवाल कर रहे हैं कि उन्हें रोजगार कब मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, लेकिन बजट में इससे निपटने के लिए कोई ठोस रोडमैप नजर नहीं आता। राहुल ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल आंकड़ों और भाषणों के जरिए तस्वीर को बेहतर दिखाने की कोशिश कर रही है।

अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने जैसे ही “एपस्टीन” शब्द का उल्लेख किया, लोकसभा में शोर-शराबा देखने को मिला। सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया। शोर-शराबे के बीच आसन पर बैठे जगदंबिका पाल ने सदस्यों से संयम बरतने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की।
हालांकि हंगामे के बावजूद राहुल गांधी ने अपना भाषण जारी रखा और कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि सरकार को आलोचना से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसे जवाब देना चाहिए। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि बजट देश की दिशा तय करता है, लेकिन मौजूदा बजट से यह स्पष्ट नहीं होता कि सरकार आम लोगों के भविष्य को लेकर कितनी गंभीर है।
राहुल गांधी के भाषण के बाद सत्ता पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। भाजपा सांसदों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जानबूझकर विवादित शब्दों और उदाहरणों का इस्तेमाल कर सदन का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों के नेताओं ने राहुल गांधी के भाषण का समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने बजट की कमजोरियों को उजागर किया है।
कुल मिलाकर, बजट सत्र के 11वें दिन लोकसभा में राहुल गांधी का भाषण काफी चर्चा में रहा। मार्शल आर्ट की “ग्रिप” से लेकर राजनीति की पकड़ तक और फिर एपस्टीन शब्द के जिक्र तक, उनका संबोधन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का कारण बना। आने वाले दिनों में बजट पर चर्चा के दौरान संसद में राजनीतिक तापमान और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
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