इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ यूपी का सबसे बड़ा बजट,योगी सरकार ने बढ़ाया विकास का दायरा
उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस बार 9.12 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश कर प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट रखा है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा प्रस्तुत यह बजट पिछले वित्त वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बड़ा है और इसे विकास, रोजगार और कल्याण के संतुलन का प्रयास बताया जा रहा है।

विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि सरकार प्रदेश के समग्र और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि यह बजट न केवल आर्थिक मजबूती की दिशा में कदम है, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की नींव को और मजबूत करेगा। सरकार का दावा है कि बढ़ते बजट आकार के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन बनाए रखा गया है।
रोजगार और युवाओं पर फोकस
बजट में युवाओं और रोजगार को खास तवज्जो दी गई है। सरकार ने आने वाले समय में 10 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में रोजगार केंद्र और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाने का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को आधुनिक कौशल, तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार किया जाएगा।
किसानों को राहत, कृषि पर जोर

कृषि क्षेत्र के लिए भी बजट में बड़े प्रावधान किए गए हैं। किसानों को मुफ्त बिजली की सुविधा जारी रखने का ऐलान किया गया है, जिससे खेती की लागत कम हो सके। इसके अलावा, प्रदेश में एग्रो एक्सपोर्ट हब स्थापित किए जाएंगे, ताकि किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल सके। सरकार का मानना है कि इससे किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी और कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता

स्वास्थ्य क्षेत्र में आम जनता को राहत देने के उद्देश्य से दवाइयों के दाम कम करने की घोषणा की गई है। जन औषधि केंद्रों और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया गया है। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों के लिए टैबलेट और स्मार्टफोन योजना, स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों के विकास के लिए भी बजट में पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं।
अवस्थापना विकास का विस्तार
योगी सरकार के इस रिकॉर्ड बजट में अवस्थापना विकास पर भी बड़ा दांव खेला गया है। सड़क, एक्सप्रेसवे, पुल, शहरी विकास और परिवहन परियोजनाओं के लिए भारी भरकम राशि आवंटित की गई है। सरकार का कहना है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं है, इसलिए इस क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है।
राजनीतिक दृष्टि से अहम बजट
यह बजट राजनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि अगले वर्ष प्रदेश में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और यह योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट है। ऐसे में सरकार ने समाज के हर वर्ग—किसान, युवा, महिलाएं, गरीब और मध्यम वर्ग—को साधने की कोशिश की है।
विपक्ष के सवाल
हालांकि विपक्ष ने इस बड़े बजट पर सवाल भी उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि बजट का आकार भले ही बड़ा हो, लेकिन असली चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की है। उनका आरोप है कि पिछले वर्षों में भी सरकार बजट की पूरी राशि खर्च नहीं कर पाई है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, 9.12 लाख करोड़ रुपये का यह बजट उत्तर प्रदेश के आर्थिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है। सरकार इसे विकास और भविष्य की योजनाओं का रोडमैप बता रही है, जबकि विपक्ष इसकी व्यवहारिकता पर सवाल उठा रहा है। अब आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि यह रिकॉर्ड बजट जमीनी स्तर पर कितना असर दिखा पाता है और जनता को इससे कितना वास्तविक लाभ मिलता है।
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