उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को सदन में योगी के मंत्री नंद गोपाल नंदी और अखिलेश यादव की विधायक रागिनी सोनकर के बीच जमकर बहस हो गई. जिसके बाद सदन में हंगामा हुआ.
उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर और योगी सरकार में औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी के बीच सदन में तीखी नोकझोंक हो गई। औद्योगिक निवेश और रोजगार को लेकर पूछे गए सवालों पर मंत्री के जवाब से असंतुष्ट रागिनी सोनकर ने बीच में ही टोकते हुए सीधे और तथ्यात्मक जवाब देने की मांग की, जिसके बाद सदन में कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बन गई।

दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान सपा विधायक रागिनी सोनकर ने औद्योगिक निवेश के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि योगी सरकार लगातार बड़े-बड़े दावे कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार 45 लाख करोड़ रुपये के एमओयू (MoU) साइन होने और उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। रागिनी सोनकर ने सवाल किया कि बीते नौ वर्षों में इन एमओयू में से सिर्फ करीब नौ प्रतिशत पर ही काम हो पाया है, तो आखिर इसका कारण क्या है? उन्होंने मंत्री से साफ शब्दों में पूछा कि अगर सरकार के दावे सही हैं, तो निवेश जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा।
सपा विधायक के इस सवाल पर मंत्री नंद गोपाल नंदी ने जवाब देना शुरू किया, लेकिन उन्होंने वर्तमान सरकार के बजाय पूर्ववर्ती सरकारों का जिक्र करना शुरू कर दिया। इस पर रागिनी सोनकर ने आपत्ति जताई और कहा कि वह पुरानी सरकारों की नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार की उपलब्धियों और विफलताओं का जवाब चाहती हैं। उन्होंने मंत्री को बीच में टोकते हुए कहा कि जनता को सीधा और स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।
रागिनी सोनकर ने इसके बाद डिफेंस कॉरिडोर का मुद्दा उठाते हुए सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार ने डिफेंस कॉरिडोर को लेकर बड़े वादे किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि चित्रकूट, झांसी, अलीगढ़ और आगरा जैसे जिलों में स्थिति जीरो बनी हुई है। उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए कहा कि कानपुर में सिर्फ एक और लखनऊ में मात्र दो यूनिट्स ही स्थापित हो पाई हैं। उन्होंने मंत्री से पूछा कि जिन जगहों पर डिफेंस कॉरिडोर को औद्योगिक विकास का बड़ा जरिया बताया गया था, वहां आज भी निवेश क्यों नहीं पहुंच पाया।
इतना ही नहीं, सपा विधायक ने एक्सप्रेस-वे के आसपास उद्योगों के विकास के सरकारी दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि एक्सप्रेस-वे के किनारे बड़े पैमाने पर इंडस्ट्री विकसित की जाएगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, लेकिन आज स्थिति यह है कि वहां भी इंडस्ट्री लगभग शून्य है। रागिनी सोनकर ने पूछा कि अगर एक्सप्रेस-वे बनने के बावजूद उद्योग नहीं आ रहे, तो सरकार की नीति और योजना पर सवाल उठना लाजमी है।
रागिनी सोनकर ने तीखे अंदाज़ में मंत्री से यह भी पूछा कि उनका विभाग “जीरो विभाग” क्यों बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास से प्रदेश के युवाओं की उम्मीदें जुड़ी होती हैं, क्योंकि यही क्षेत्र सबसे ज्यादा रोजगार देने की क्षमता रखता है। विधायक ने कहा कि सरकार प्रति व्यक्ति आय एक लाख रुपये होने का दावा कर रही है, लेकिन यह भी बताया जाए कि औद्योगिक विकास विभाग ने कितनी नौकरियां दी हैं और उनमें से कितनी नौकरियों में एक लाख रुपये या उससे अधिक वेतन मिलता है।
इस पूरे सवाल-जवाब के दौरान सदन में शोरगुल बढ़ गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। मंत्री नंद गोपाल नंदी जहां सरकार की नीतियों का बचाव करते नजर आए, वहीं विपक्ष लगातार जवाबों को अधूरा बताते हुए सरकार को घेरता रहा। यह टकराव योगी सरकार की औद्योगिक नीति और उसके जमीनी क्रियान्वयन को लेकर विपक्ष के तेवरों को साफ तौर पर दिखाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि औद्योगिक निवेश और रोजगार का मुद्दा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा विषय बन सकता है। विपक्ष इसे सरकार की विफलता के रूप में पेश कर रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल अपनी नीतियों और भविष्य की योजनाओं के जरिए जवाब देने की कोशिश कर रहा है। विधानसभा में हुई यह गहमा-गहमी इसी राजनीतिक टकराव की एक झलक मानी जा रही है।
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