दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ा बदलाव — अब महिला बनेगी मुखिया !

दिल्ली सरकार ने बताया है कि किसी पुरुष को घर का मुखिया तभी माना जाएगा, जब परिवार में कोई बालिग महिला न हो। इसके साथ ही कार्ड के लिए अधिकतम आय 1.2 लाख रुपये कर दी गई है।

दिल्ली सरकार ने राशन कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा और अहम बदलाव किया है, जिसका सीधा असर लाखों लाभार्थी परिवारों पर पड़ेगा। नए नियमों के तहत अब न केवल राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया बदली गई है, बल्कि परिवार के मुखिया को लेकर भी स्पष्ट और नया पैमाना तय किया गया है। दिल्ली सरकार ने यह बदलाव दिल्ली खाद्य सुरक्षा नियम, 2026 के तहत किए हैं, जिन्हें हाल ही में अधिसूचित कर दिया गया है।

दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ा बदलाव — अब महिला बनेगी मुखिया !
दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ा बदलाव — अब महिला बनेगी मुखिया !

नए नियमों के अनुसार, अब राशन कार्ड जारी करने के लिए परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला सदस्य को परिवार का मुखिया माना जाएगा। यानी राशन कार्ड में मुखिया के रूप में महिला का नाम प्राथमिकता से दर्ज किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम पहल है और इससे महिलाओं की भूमिका को परिवार और सरकारी योजनाओं में अधिक मजबूत किया जा सकेगा।

हालांकि, नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी परिवार में केवल एक ही महिला सदस्य है और उसकी उम्र 18 वर्ष से कम है, तो उस स्थिति में परिवार के सबसे बुजुर्ग पुरुष सदस्य को मुखिया माना जाएगा। सरकार ने यह प्रावधान इसलिए रखा है ताकि नाबालिग को कानूनी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से न जोड़ा जाए।

दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ा बदलाव — अब महिला बनेगी मुखिया !
दिल्ली में राशन कार्ड पर बड़ा बदलाव — अब महिला बनेगी मुखिया !

राशन कार्ड नियमों में बदलाव सिर्फ मुखिया के निर्धारण तक सीमित नहीं है। नए नियमों के तहत सालाना आय के मानकों और राशन कार्ड की श्रेणियों में भी संशोधन किया गया है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राशन का लाभ सही और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे। इसके लिए आय से जुड़े मापदंडों को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाया गया है, ताकि अपात्र लोग सरकारी सब्सिडी का गलत फायदा न उठा सकें।

दिल्ली खाद्य सुरक्षा नियम, 2026 के तहत यह भी तय किया गया है कि एक परिवार के लिए कितने राशन कार्ड जारी किए जा सकते हैं और किन परिस्थितियों में नए कार्ड के लिए आवेदन मान्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी राशन कार्ड पर रोक लगेगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को ज्यादा पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव का एक बड़ा मकसद यह भी है कि राशन वितरण प्रणाली को सामाजिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया जाए। अक्सर यह देखा गया है कि परिवार की जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर होती है, लेकिन सरकारी दस्तावेजों में मुखिया के रूप में पुरुष का नाम दर्ज होता है। नए नियम इस असंतुलन को दूर करने की कोशिश हैं।

दिल्ली सरकार का मानना है कि बुजुर्ग महिला को परिवार का मुखिया मानने से राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से परिवार तक पहुंचेगा। इसके साथ ही महिलाओं की निर्णय लेने की भूमिका भी मजबूत होगी। खासकर उन परिवारों में, जहां महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ परिवार की आर्थिक व्यवस्था भी संभाल रही हैं।

विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ संगठनों ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है, जबकि कुछ ने सवाल उठाया है कि आय मानकों में बदलाव से कहीं वास्तविक जरूरतमंद परिवार बाहर न हो जाएं। सरकार का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नियम बनाए गए हैं और जरूरत पड़ने पर इनमें सुधार भी किया जा सकता है।

दिल्ली सरकार के अनुसार, नए नियमों को लागू करने के लिए संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। मौजूदा राशन कार्ड धारकों को भी समय-समय पर अपने दस्तावेज अपडेट कराने होंगे, ताकि नए मानकों के अनुसार रिकॉर्ड दुरुस्त किए जा सकें। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

कुल मिलाकर, दिल्ली खाद्य सुरक्षा नियम, 2026 के तहत किए गए ये बदलाव राशन वितरण प्रणाली में एक बड़ा संरचनात्मक सुधार माने जा रहे हैं। बुजुर्ग महिला को परिवार का मुखिया मानने का फैसला न सिर्फ प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि सामाजिक सोच में भी बदलाव की दिशा में एक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इन नियमों का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव पड़ता है और इससे वास्तव में जरूरतमंद परिवारों को कितना लाभ मिल पाता है।

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